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Himachal: हिमाचल के एंटी चिट्टा मॉडल से सीखेंगे देश के अन्य राज्य, एनसीबी ने मांगा मॉडल का विस्तृत विवरण

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 14 May 2026 06:07 PM IST
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सार

नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश से इस मॉडल का विस्तृत विवरण मांगा है, जिससे इसके अध्ययन के बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की संभावनाएं तलाश की जा सकें।

Other states across the country to learn from Himachal's Anti Chitta model; NCB seeks detailed particulars of
एनसीबी - फोटो : ANI
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में लागू एंटी चिट्टा मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश से इस मॉडल का विस्तृत विवरण मांगा है, जिससे इसके अध्ययन के बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की संभावनाएं तलाश की जा सकें। प्रदेश में चिट्टा तस्करी और नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए तैयार किए गए इस मॉडल की खास बात पंचायत स्तर तक की गई विस्तृत मैपिंग है। हिमाचल देश का पहला राज्य माना जा रहा है, जहां पंचायतों को चिट्टा प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सर्वेक्षण में 234 पंचायतों को सबसे अधिक प्रभावित मानते हुए रेड श्रेणी में रखा गया। इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और विशेष अभियान चलाने के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आने का दावा किया जा रहा है।

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मॉडल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष आर्थिक कार्रवाई है। पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत 174 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही नशा तस्करों से जुड़ी लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने 700 से अधिक मामलों की जांच की, जिनमें करीब 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति जब्ती के लिए उपयुक्त पाया गया। एंटी चिट्टा अभियान केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया है। नशे की लत से प्रभावित युवाओं के पुनर्वास पर भी फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में आधुनिक पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जबकि शिमला के मशोबरा और कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में भी नए पुनर्वास केंद्र शुरू करने की तैयारी है।

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