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Shimla News: ओवर स्पीड, ओवरटेकिंग से 78 फीसदी हादसे, 77 लोगों की मौत
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पुलिस और परिवहन विभाग की जांच में खुलासा, अब दोनों विभाग जिले में चलाएंगे विशेष जागरूकता अभियान
शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही सड़क दुर्घटनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। पुलिस और परिवहन विभाग की जांच में सामने आया है कि पिछले साल हुए 78 फीसदी हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड, गलत ओवरटेकिंग और गलत लेन पर वाहन चलाने से हुए हैं। इन हादसों में 77 लोगों की जान गई है।
पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य एजेंसियां अब लोगों को सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए इस साल विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जिला शिमला में वर्ष 2025 में 268 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 102 लोगों की मौतें हुईं और 436 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। सड़क हादसों के आकलन से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह भी यातायात नियमों का उल्लंघन ही है।
जिले के शहरी क्षेत्रों में 74 सड़क दुर्घटनाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में 194 दुर्घटनाएं हुई हैं। सड़क दुर्घटनाओं का शहरी क्षेत्र में पीक टाइम शाम 6 से रात 12 बजे तक और ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर 3 से रात 9 बजे तक दर्ज किया गया। इसमें व्यावहारिक उल्लंघन के चलते 208 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। जिले में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं बालूगंज थाना के तहत पेश आई हैं। बालूगंज थाना क्षेत्र के तहत पिछले साल 40 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 10 लोगों की जान चली गई। रोहड़ू थाना के तहत 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें 8 मौतें हुईं।
न्यू शिमला थाना के तहत 21 सड़क दुर्घटनाएं सामने आई हैं। इसमें 6 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। ठियोग थाना के तहत 21 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 7 लोगों की मौत हुई। कुमारसैन थाना के तहत 18 सड़क दुर्घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। इसमें 10 लोगों की मौत हुई। हालांकि पुलिस की और से सख्ती के बाद हर साल होने वाले सड़क हादसों में कमी दर्ज की गई लेकिन इसके बावजूद यातायात नियमों का उल्लंघन होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग जान गंवा रहे हैं।
एनएच पर हुईं 114 सड़क दुर्घटनाएं
जिले में औसतन तीन सड़क दुर्घटनाओं में एक मौत हुई है। सड़क हादसों के आकलन से पता चला है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर 114 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 15 मौतें और 207 लोग घायल हुए हैं। राज्य राजमार्ग पर 27 सड़क दुर्घटनाओं में 21 लोगों की मौत हुई है। जिले के ग्रामीण और अन्य संपर्क मार्गों पर सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इन मार्गों पर 129 सड़क दुर्घटनाएं पिछले साल दर्ज की गई हैं। इसमें 60 लोगों की जान चली गई है। सड़क दुर्घटनाओं का शहरी क्षेत्र में पीक टाइम शाम 6:00 से रात 12:00 बजे तक और ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर 3:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्ज किया गया।
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शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही सड़क दुर्घटनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। पुलिस और परिवहन विभाग की जांच में सामने आया है कि पिछले साल हुए 78 फीसदी हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने, ओवर स्पीड, गलत ओवरटेकिंग और गलत लेन पर वाहन चलाने से हुए हैं। इन हादसों में 77 लोगों की जान गई है।
पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य एजेंसियां अब लोगों को सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए इस साल विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जिला शिमला में वर्ष 2025 में 268 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 102 लोगों की मौतें हुईं और 436 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। सड़क हादसों के आकलन से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह भी यातायात नियमों का उल्लंघन ही है।
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जिले के शहरी क्षेत्रों में 74 सड़क दुर्घटनाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में 194 दुर्घटनाएं हुई हैं। सड़क दुर्घटनाओं का शहरी क्षेत्र में पीक टाइम शाम 6 से रात 12 बजे तक और ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर 3 से रात 9 बजे तक दर्ज किया गया। इसमें व्यावहारिक उल्लंघन के चलते 208 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। जिले में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं बालूगंज थाना के तहत पेश आई हैं। बालूगंज थाना क्षेत्र के तहत पिछले साल 40 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 10 लोगों की जान चली गई। रोहड़ू थाना के तहत 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें 8 मौतें हुईं।
न्यू शिमला थाना के तहत 21 सड़क दुर्घटनाएं सामने आई हैं। इसमें 6 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। ठियोग थाना के तहत 21 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 7 लोगों की मौत हुई। कुमारसैन थाना के तहत 18 सड़क दुर्घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। इसमें 10 लोगों की मौत हुई। हालांकि पुलिस की और से सख्ती के बाद हर साल होने वाले सड़क हादसों में कमी दर्ज की गई लेकिन इसके बावजूद यातायात नियमों का उल्लंघन होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग जान गंवा रहे हैं।
एनएच पर हुईं 114 सड़क दुर्घटनाएं
जिले में औसतन तीन सड़क दुर्घटनाओं में एक मौत हुई है। सड़क हादसों के आकलन से पता चला है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर 114 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 15 मौतें और 207 लोग घायल हुए हैं। राज्य राजमार्ग पर 27 सड़क दुर्घटनाओं में 21 लोगों की मौत हुई है। जिले के ग्रामीण और अन्य संपर्क मार्गों पर सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इन मार्गों पर 129 सड़क दुर्घटनाएं पिछले साल दर्ज की गई हैं। इसमें 60 लोगों की जान चली गई है। सड़क दुर्घटनाओं का शहरी क्षेत्र में पीक टाइम शाम 6:00 से रात 12:00 बजे तक और ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर 3:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्ज किया गया।
