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Shimla News: राशन डिपुओं में अब लोगों को पसंद के अनुसार मिलेंगी दालें
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खाद्य निरीक्षक 10 दिन तक लोगों से लेंगे फीडबैक, लोगों की पसंद पर तय सर्वे रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी
डीसी अनुपम कश्यप ने बैठक बुलाकर दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राशन डिपुओं में मिलने वाली दाल अब सरकार द्वारा तय व्यवस्था के बजाय लोगों की पसंद और जरूरत के अनुसार उपलब्ध करवाई जा सकती है। प्रशासन ने इसे लेकर सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
सर्वे के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग के खाद्य निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई है। 10 दिन तक खाद्य निरीक्षक लोगों से फीडबैक लेंगे। साथ ही यह भी पता करेंगे कि डिपुओं में किस दाल और खाद्य वस्तुओं की सबसे अधिक मांग है। सर्वे रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इसके आधार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन में बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। राजधानी समेत ग्रामीण क्षेत्रों में दाल, चीनी और बैकलॉग के खाद्य तेल की आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं। अमर उजाला ने 18 जुलाई के अंक में लोगों को नहीं मिला दो महीने का खाद्य तेल, अब चीनी भी हुई गायब शीर्षक से इस खबर को प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। इसके चलते शनिवार सुबह उपायुक्त अनुपम कश्यप ने इस संबंध में तत्काल बैठक बुलाई। यह बैठक जिला सार्वजनिक वितरण समिति और जिला स्तरीय सतर्कता समिति की थी।
बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उपायुक्त ने खाद्य आपूर्ति विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को किस दाल और खाद्य वस्तुओं की अधिक आवश्यकता है, वर्तमान व्यवस्था से कितने संतुष्ट हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। कई क्षेत्रों में कुछ दालों की खरीद बहुत कम हो रही है, जबकि अन्य दालों की मांग अधिक है। ऐसे में लोगों की वास्तविक जरूरत के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बैठक के दौरान उपायुक्त ने बताया कि जिले में वर्तमान में दो उचित मूल्य की दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें एक चिड़गांव के छौहारा क्षेत्र और दूसरी चौपाल तहसील के शिलावणी गांव में संचालित है। उन्होंने इन समूहों के सफल संचालन का उल्लेख करते हुए अन्य स्वयं सहायता समूहों से भी आगे आने का आह्वान किया।
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बैठक में उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन के बाद औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने के मामलों पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान, खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अनीता ठाकुर, खाद्य निरीक्षक दीपक दत्याल समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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डीसी अनुपम कश्यप ने बैठक बुलाकर दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राशन डिपुओं में मिलने वाली दाल अब सरकार द्वारा तय व्यवस्था के बजाय लोगों की पसंद और जरूरत के अनुसार उपलब्ध करवाई जा सकती है। प्रशासन ने इसे लेकर सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
सर्वे के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग के खाद्य निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई है। 10 दिन तक खाद्य निरीक्षक लोगों से फीडबैक लेंगे। साथ ही यह भी पता करेंगे कि डिपुओं में किस दाल और खाद्य वस्तुओं की सबसे अधिक मांग है। सर्वे रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इसके आधार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन में बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। राजधानी समेत ग्रामीण क्षेत्रों में दाल, चीनी और बैकलॉग के खाद्य तेल की आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं। अमर उजाला ने 18 जुलाई के अंक में लोगों को नहीं मिला दो महीने का खाद्य तेल, अब चीनी भी हुई गायब शीर्षक से इस खबर को प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। इसके चलते शनिवार सुबह उपायुक्त अनुपम कश्यप ने इस संबंध में तत्काल बैठक बुलाई। यह बैठक जिला सार्वजनिक वितरण समिति और जिला स्तरीय सतर्कता समिति की थी।
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बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उपायुक्त ने खाद्य आपूर्ति विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को किस दाल और खाद्य वस्तुओं की अधिक आवश्यकता है, वर्तमान व्यवस्था से कितने संतुष्ट हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। कई क्षेत्रों में कुछ दालों की खरीद बहुत कम हो रही है, जबकि अन्य दालों की मांग अधिक है। ऐसे में लोगों की वास्तविक जरूरत के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बैठक के दौरान उपायुक्त ने बताया कि जिले में वर्तमान में दो उचित मूल्य की दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें एक चिड़गांव के छौहारा क्षेत्र और दूसरी चौपाल तहसील के शिलावणी गांव में संचालित है। उन्होंने इन समूहों के सफल संचालन का उल्लेख करते हुए अन्य स्वयं सहायता समूहों से भी आगे आने का आह्वान किया।
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बैठक में उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन के बाद औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने के मामलों पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान, खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अनीता ठाकुर, खाद्य निरीक्षक दीपक दत्याल समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।