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रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल में 3,816 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा, शिमला में सबसे ज्यादा

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 24 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) नई दिल्ली में राज्य सरकार की ओर से दायर ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में विभिन्न जिलों में मार्च 2024 तक 3,816 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण है।

Report reveals: 3816 hectares of forest land encroached in Himachal, Shimla has the highest
वन भूमि। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर बेहद चौंकाने आंकड़ा सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) नई दिल्ली में राज्य सरकार की ओर से दायर ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में विभिन्न जिलों में मार्च 2024 तक 3,816 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण है। प्रशासन अभी तक 2,573 हेक्टेयर भूमि को ही कब्जामुक्त करवा पाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की राजधानी शिमला की वन भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में सबसे संवेदनशील और पहले पायदान पर हैं।

शिमला में सबसे अधिक 1,839.72 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण हुआ है जो कि पूरे प्रदेश के कुल अतिक्रमण का लगभग आधा हिस्सा है। राहत की बात यह है कि शिमला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए इसमें से 1,328.01 हेक्टेयर भूमि वापस अपने कब्जे में ले ली है। शिमला के बाद दूसरे नंबर पर कुल्लू जिला है, जहां 815.06 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा दर्ज किया गया है। इसमें से 495.57 हेक्टेयर भूमि खाली करवाई गई है। कांगड़ा में 318.93 और मंडी में 263.28 हेक्टेयर वन भूमि में अतिक्रमण हुआ है। रिपोर्ट से पता चलता है कि कई जिलों में बेदखली के आदेश जारी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई कानूनी दांवपेंचों के कारण रुकी हुई है।

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वन्यजीव अभ्यारण्यों भी है अतिक्रमण

सरकार की रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि अतिक्रमणकारियों ने न केवल सामान्य वन भूमि बल्कि संरक्षित वनों में अतिक्रमण किया है। संरक्षित वनों में 1,869.96 हेक्टेयर और रिजर्व फॉरेस्ट में 173.14 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण किया है। वन्यजीव अभ्यारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों में भी करीब 4.21 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जे की बात इस रिपोर्ट में सामने आई है। एनजीटी में पेश की गई इस रिपोर्ट के बाद अब वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पर इन अवैध कब्जों को जल्द हटाने और माननीय अदालतों में लंबित मामलों की पैरवी तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

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