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Himachal: रोहित ठाकुर बोले- नहीं मिल रहे योग्य प्री प्राइमरी शिक्षक, भर्ती नियमों में छूट के लिए जाऊंगा दिल्ली

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

प्रदेश में 6,297 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। योग्य शिक्षक मिल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में केंद्र से भर्ती के नियमों में छूट मांगी जाएगी। 

Rohit Thakur Says: Qualified Pre Primary Teachers Are Unavailable; I Will Go to Delhi to Seek Relaxation in Re
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्री प्राइमरी शिक्षक भर्ती करने के लिए नियमों में छूट मांगने वह दिल्ली जाएंगे। नर्सरी-केजी कक्षा के लिए शिक्षक भर्ती में एनसीटीई नियमों की बाध्यता है। प्रदेश में 6,297 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। योग्य शिक्षक मिल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में केंद्र से भर्ती के नियमों में छूट मांगी जाएगी। भविष्य में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) के माध्यम से एनटीटी प्रशिक्षण शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए एनसीटीई को प्रस्ताव भेजा जाएगा। भाजपा विधायक डॉ. जनकराज और प्रकाश राणा के सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा जोगिंद्रनगर, नूरपुर, भंगरोटू और कुनिहार में एक स्कूल सीबीएसई और दूसरा शिक्षा बोर्ड को देने का मामला विचाराधीन है।

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शिक्षा मंत्री ने प्रदेश में नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) भर्ती को लेकर पात्रता शर्तों में बदलाव की मांग के बीच स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों के तहत ही संचालित हो रही है। राज्य स्तर पर इसमें कोई बदलाव संभव नहीं है। एनसीटीई एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जो शिक्षक शिक्षा के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और मानक तय करती है। एनटीटी पदों पर भर्ती के लिए केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पात्र माना गया है, जिनके पास एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थान से दो वर्षीय डिप्लोमा (नर्सरी/प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा) या बीएड (नर्सरी) की डिग्री है।

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प्रदेश में एनटीटी के 6297 पद विज्ञापित किए गए हैं। इन पदों के लिए न्यूनतम योग्यता 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास और संबंधित क्षेत्र में दो वर्षीय डिप्लोमा या बीएड (नर्सरी) अनिवार्य रखा गया है। प्रदेश की 6409 प्राथमिक पाठशालाओं में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इनके संचालन के लिए हमीरपुर, मंडी, ऊना और सिरमौर जिलों में आया के 334 पद भरे जा चुके हैं। वहीं एनटीटी भर्ती प्रक्रिया राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के माध्यम से जारी है। योग्य अभ्यर्थियों की कमी को देखते हुए एनसीटीई से पात्रता शर्तों में शिथिलता देने का अनुरोध किया गया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई मंजूरी नहीं मिली है।

केंद्र ने 225 करोड़, प्रदेश सरकार ने बल्क ड्रग निर्माण को दिए 105.54 करोड़
 जिला ऊना के हरोली में बन रहे बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र सरकार ने अब तक 225 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से पार्क निर्माण के लिए 105.54 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने यह जानकारी विधायक इंद्र दत्त लखनपाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल विभाग की ओर से बल्क ड्रग पार्क की सैद्धांतिक मंजूरी 30 अगस्त, 2022 में मिली है। 2 अक्तूबर, 2022 को इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को भेजी गई। योजना एवं अंतिम स्वीकृति के अनुसार इस पार्क में सामान्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए भारत सरकार की ओर से 996.45 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में प्रदान किए जाने हैं। शेष राशि 1074.55 करोड़ राज्य की ओर से वहन किए जाने हैं। 

पोर्टल के माध्यम से की दवाइयों और सर्जिकल सामान की खरीद
हिमाचल के आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों, क्षेत्रीय व जिला अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के सामान्य प्रसव व सीजेरियन प्रसव के लिए प्रयोग की जा रही दवाइयां व सर्जिकल सामान की खरीद डीवीडीएमएस पोर्टल के माध्यम से की जाती है। जो दवाइयां डीवीडीएमएस पोर्टल में नहीं होती, उन्हें ई-टेंडर के माध्यम से खरीदा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने यह जानकारी आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार की ओर से पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि 16 फरवरी से 28 फरवरी तक मेडिकल कॉलेज नाहन के अलावा किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों द्वारा बाहर की दुकानों से सामान्य प्रसव और सीजेरियन प्रसव के लिए दवाइयां नहीं खरीदी गई है। 

प्रदेश से पंजाब जाने वाले वाहनों पर टैक्स ज्यादा : मुकेश
 उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश से पंजाब जाने वाले वाहनों पर टैक्स ज्यादा पड़ता है, वहीं पंजाब से हिमाचल आनी वाली बसों पर टैक्स कम पड़ता है। पंजाब और हिमाचल सरकार के बीच करों की दरें संबंधित राज्य सरकारों की ओर से उनकी नीतियों, सड़क अवसंरचना के रखरखाव, भौगोलिक परिस्थितियों और राजस्व आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की जाती है। विभिन्न राज्यों में कर निर्धारण की पद्धति एवं दरें भिन्न होने के कारण प्रत्यक्ष तुलना प्रत्येक स्थिति में समान रूप से संभव नहीं होती। ऐसे में दोनों राज्यों में करों में अंतर स्वाभाविक है। उन्होंने यह जानकारी विधायक विवेक शर्मा की ओर से पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। 

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