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हिमाचल: समेज स्कूल आज भी चट्टानों के साये में, नए भवन का इंतजार; बरसात में दो महीने शिफ्ट होती हैं कक्षाएं
Wed, 01 Jul 2026 03:10 PM IST
Ankesh Dogra
विश्वास भारद्वाज, समेज (रामपुर बुशहर)।
विश्वास भारद्वाज, समेज (रामपुर बुशहर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 01 Jul 2026 03:10 PM IST
सार
समेज खड्ड में 2024 की बाढ़ के दो साल बाद भी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समेज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाई है। स्कूल परिसर के बाहर आज भी विशाल चट्टानें मौजूद हैं। बरसात के दौरान स्कूल को दो महीने के लिए महिला मंडल और सत्संग भवन में शिफ्ट किया जाता है। नए भवन के लिए भूमि चयन हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समेज के हाल
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
एक अगस्त 2024 की वह भयावह रात समेज के लोगों के लिए आज भी किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। आधी रात को समेज खड्ड में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी थी। इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में से एक थी कुल्लू जिले के निरमंड ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समेज, जहां कभी बच्चों की चहल-पहल गूंजती थी, वहां सिर्फ मलबा, विशाल चट्टानें और सन्नाटा बचा था। करीब दो वर्ष बाद तस्वीर बदली जरूर है।
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स्कूल परिसर का बड़ा हिस्सा साफ हो चुका है। यह वापसी पूरी तरह सामान्य नहीं है। स्कूल परिसर के ठीक बाहर आज भी बाढ़ के साथ आए कई टन वजनी विशाल पत्थर और चट्टानें खड़ी हैं, जो हर दिन उस भयावह रात की याद ताजा कर देती हैं। स्कूल परिसर से कुछ कदम आगे बढ़ते ही बाढ़ के साथ आए विशाल पत्थरों का ढेर साफ दिखाई देता है। इन्हें हटाना आज तक संभव नहीं हो पाया है। मैदान साफ होने के बावजूद असुरक्षा का एहसास बना हुआ है। बरसात शुरू होते ही समेज स्कूल के बच्चे शरणार्थी बन जाते हैं।
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जुलाई और अगस्त में स्कूल सुरक्षित स्थान पर महिला मंडल भवन और सतसंग भवन में शिफ्ट कर दिया जाता है। इस दौरान प्री-प्राइमरी से प्लस-टू तक की कक्षाएं दो कमरों में सिमट जाती हैं। त्रासदी के बाद सुरक्षित स्थान पर नए स्कूल भवन के निर्माण का निर्णय लिया गया। भूमि का चयन हुआ और उसे शिक्षा विभाग के नाम भी कर दिया गया, लेकिन दो वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। कार्यकारी प्रधानाचार्य भारती देवी ने कहा कि बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा को देखते हुए बरसात के दौरान दो महीने के लिए स्कूल को महिला मंडल भवन और सत्संग भवन में शिफ्ट किया जाता है।
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एसडीएम निरमंड जगदीप राठौर ने बताया कि नए स्थान पर स्कूल भवन के निमार्ण के लिए भूमि का चयन किया जा चुका है। काम शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की गई इसे लेकर लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से इसे लेकर पूछताछ की जाएगी।
बारिश में फिर जिंदा हो जाता है तबाही का डर: स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और त्रासदी की प्रत्यक्षदर्शी जोबना देवी कहती हैं कि मैदान तो साफ हो गया और बच्चे भी लौट आए, लेकिन मन से डर नहीं गया। ओम प्रकाश ने कहा कि आज भी जब तेज बारिश होती है या काले बादल छा जाते हैं तो लगता है कि कहीं समेज खड्ड फिर तबाही न बरपा दे। उस रात की याद आज भी रूह कंपा देती है। एसएमसी अध्यक्ष संदीप चौहान ने कहा कि महिला मंडल और सत्संग भवन में पर्याप्त कमरे नहीं हैं। प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं तक और छठी से लेकर बारहवीं तक की कक्षाएं एक-दो कमरों में चलानी पड़ती हैं।