पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   shimla manisha mittal murder case cctv money trail police investigation

शिमला मनीषा मित्तल हत्याकांड: CCTV, मनी ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों से पुलिस ने 18 दिन में सुलझाई मर्डर मिस्ट्री

Wed, 01 Jul 2026 01:26 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 01 Jul 2026 01:26 PM IST
सार

शिमला के मनीषा मित्तल हत्याकांड में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल एक्सेस लॉग, बैंक ट्रांजैक्शन और तकनीकी जांच के आधार पर 18 दिन में पूरी साजिश का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति विवाद इस हत्या की मुख्य वजह था। मामले में कथित शूटरों समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

विज्ञापन
shimla manisha mittal murder case cctv money trail police investigation
संजौली मनीषा मित्तल हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल स्कूल संजौली के गेट पर स्कूल की संचालिका मनीषा मित्तल की दिन के उजाले में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज वारदात से शिमला से लेकर हरियाणा तक सनसनी फैल गई थी। हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने गाड़ी, हथियार, मनी ट्रेल और सीसीटीवी की कड़ियों को जोड़ते हुए सुलझाया।

विज्ञापन

दोनों शूटरों ने अपना चेहरा ढका हुआ था और जब तक पुलिस को सूचना मिली और वह हरकत में आई दोनों काफी दूर तक भाग चुके थे। ऐसे में पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए फौरन एसआईटी का गठन किया। पुलिस के मुताबिक जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया था उससे साफ पता चल रहा था कि आरोपी प्रोफेशनल हैं। पुलिस का पहला लक्ष्य शूटरों को पकड़ना था और इसके लिए फौरन टीमों को हरियाणा और पंजाब के लिए रवाना किया गया। वहीं एक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सीसीटीवी समेत अन्य तथ्यों को खंगाला। 

विज्ञापन
विज्ञापन

फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। तकनीकी पहलुओं की मदद से पुलिस ने दोनों शूटरों को महज 39 घंटे के भीतर हरियाणा के रोहतक से उस जगह से पकड़ा जहां उन्होंने छिपने का ठिकाना बनाया था। आरोपियों से हत्या में इस्तेमाल किए दो पिस्तौल और गाड़ी भी बरामद की। मनीषा का भाई पहले से ही शक के दायरे में था क्योंकि संपत्ति विवाद का मामला किसी से छिपा नहीं था। 
 
विज्ञापन

मनीषा ने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो में भाई पर शक जाहिर किया था। पुलिस ने गाड़ी के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि इसे गोविंद ने हायर करवाया था। इसके बाद गोविंद की तलाश शुरू की गई लेकिन वह थाईलैंड भाग चुका था।  पुलिस उसकी लगातार तलाश करती रही और हिमांक से भी पूछताछ की। सीसीटीवी की तकनीकी विशेषज्ञों की जांच से पता चला कि इसका एक्सेस हिमांक के पास था।  

सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस लेने पर उसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रहता है। मुख्य सर्वर एप या क्लाउड स्टोरेज में इसका एक एक्सेस लॉग या ऑडिट लॉग बनता है। इसमें सिस्टम में कब, कितने बजे और किस डिवाइस या यूजर  (आईपी एड्रेस) से लॉग-इन किया गया, फुटेज देखी गई या डाउनलोड की गई इसका पूरा डाटा दर्ज हो जाता है। पुलिस ने जब हिमांक के बैंक खातों को खंगाला तो पता चला कि उसने हत्या से पहले 8.50 लाख रुपये गोविंद को ट्रांसफर किए थे। पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने हरियाणा नंबर के वाहन पर हिमाचल का फर्जी पंजीकरण नंबर एचपी-10 सीरीज का लगाया था।

हिमांक के दोस्त गोविंद ने एक शूटर के खाते में डाले थे 20 हजार
हिमांक के दोस्त गोविंद ने एक शूटर के खाते में 20,000 रुपये डाले थे। इन्हीं कड़ियों को जोड़कर पुलिस ने मनीषा के ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाने में कामयाबी हासिल की। एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने कड़ी मेहनत से मामले को सुलझाया है। मामले में हर पहलू को बारीकी से खंगाला गया जिससे हत्या की गुत्थी सुलझ सकी।

एसएसपी गौरव सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने हत्या के हर पहलू की छानबीन की। तत्कालीन एएसपी अभिषेक, एएसपी सिटी मेहर पंवार और थाना संजौली और अन्य टीम के सदस्यों की दिन-रात की मेहनत से पूरा मामला 18 दिन के भीतर सुलझा लिया गया। शिमला पुलिस ने पंजाब और हरियाणा पुलिस की भी इसमें मदद ली।

पिता ने ट्यूशन पढ़ाकर खड़ा किया था करोड़ों का कारोबार
शिमला के मनीषा मित्तल हत्याकांड में गिरफ्तार हिमांक मित्तल के पिता धर्मपाल मित्तल ने कड़ी मेहनत से करोड़ों का कारोबार शुरू किया था। बाबरा मोहल्ले के पुराने सीआईए स्टाफ के नजदीक एक छोटे से कमरे में ट्यूशन पढ़ाकर पांच स्कूल स्थापित किए थे। इसमें बाबरा मोहल्ला, शौरा कोठी, सिंहपुरा, शिमला व दिल्ली में एक-एक स्कूल हैं। पुलिस ने खुलासा किया है कि माता-पिता की मौत के बाद भाई व बहन के बीच चल रहे प्रॉपर्टी विवाद में बहन मनीषा की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। भाई को साजिश रचने के आरोप में शिमला पुलिस ने हिरासत में लिया है।

पुलिस जांच में पता चला है कि बाबरा मोहल्ला निवासी धर्मपाल मित्तल का परिवार मोहल्ले की खातियों वाली गली में रहता था। धर्मपाल ने सबसे पहले पुराने सीआईए स्टाफ के नजदीक एक कमरे में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया था। इसके बाद धर्मपाल जैन स्कूल में ड्राइविंग टीचर के तौर पर नौकरी करने लगे थे। शादी के बाद सबसे पहले बाबरा मोहल्ले में चार मंजिला निजी स्कूल शुरू किया था। इसके बाद मित्तल परिवार लगातार आर्थिक उन्नति करता गया, पत्नी का मायका पक्ष पहले से मजबूत था। 

कब क्या-क्या हुआ 
  • 13 जून शाम 6:00 बजे सरस्वती पैराडाइज स्कूल संजौली के गेट पर मनीषा मित्तल की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई।
  • 15 जून को पुलिस ने हरियाणा के रोहतक से दोनों शूटरों आशीष अहलावत निवासी झज्जर, हरियाणा और दीपक निवासी रोहतक, हरियाणा को गिरफ्तार किया।
  • 28 जून को गोविंद निवासी रोहतक को गिरफ्तार किया।
  • 29 जून को हिमांक मित्तल को शिमला  पुलिस ने गिरफ्तार किया।
  • 30 जून शिमला पुलिस ने को ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाया। 

हिमांक ने रची थी खुद पर हमले की साजिश
मनीषा की हत्या के बाद जब उनके पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए जिसमें उन्होंने संपत्ति विवाद के कारण अपने ही भाई से जान को खतरा बताया था तो शक की सुई हिमांक मित्तल की ओर मुड़ गई थी। लेकिन पुलिस के पास उस समय कोई सबूत नहीं था। पुलिस टीम हिमांक से पूछताछ के लिए पहुंची तो पता चला कि एक जून को उसके ऊपर भी हमला हुआ था और इसमें उसे गंभीर चोटें आई हैं। हिमांक ने सोशल मीडिया पर खुद को बेकसूर बताया और कहा कि वह एक जून के हमले में घायल होने के बाद घर पर ही था। अपने ऊपर हुए हमले को लेकर उसने स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। अब जो तथ्य पुलिस के सामने आए हैं उससे शक है कि हिमांक ने खुद ही अपने ऊपर हमले की कहानी तो नहीं गढ़ी थी जिससे उसके ऊपर बहन की हत्या का शक न जाए।
 

हिमांक के पास था स्कूल के सीसीटीवी का एक्सेस
सरस्वती पैराडाइज स्कूल भट्ठाकुफर की संचालिका मनीषा और उसके छोटे भाई के बीच वर्षों से चल रहे संपत्ति विवाद ने एक बहन की जान ले ली। वहीं हिमांक मित्तल को अपनी ही बहन की हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। माता-पिता की मौत के बाद से ही दोनों के बीच संपत्ति विवाद चल रहा था और इसको लेकर स्कूल परिसर में कई बार मारपीट तथा तनावपूर्ण स्थितियां बन चुकी थीं।

यही वजह थी कि मनीषा ने पहले ही सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि सरस्वती पैराडाइज स्कूल परिसर में सुरक्षा के लिए लगाए सीसीटीवी कैमरों से ही मनीषा पर उसका भाई और अन्य आरोपी नजर रख रहे थे। हिमांक के पास सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस था और उसने ही उसका एक्सेस अपने साथी गोविंद को दिया जिसने आगे एक्सेस दोनों शूटरों को दिए। 

वारदात के दिन भी साजिश के तहत दोनों शूटर हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे और जैसे ही मनीषा स्कूल परिसर से बाहर निकली है, वह मौके पर पहुंच गए। मनीषा दुकान गई थी दोनों शूटर रास्ते में उसका इंतजार कर रहे थे। इस दौरान दोनों ने मुंह ढककर रखा था जिससे उनकी पहचान उजागर न हो। जैसे ही मनीषा बेटी के लिए मैगी लेकर आई तो एक आरोपी ने उसका पीछा किया और स्कूल के गेट के पास पीछे से काफी नजदीक से उसके सिर पर गोलियां चला दीं। इससे मनीषा जमीन पर गिर गई तो फिर दूसरी ओर से दूसरा आरोपी आया और उसने फिर मनीषा पर गोलियां चलाईं जिससे उसके बचने की कोशिश उम्मीद न बचे। 

बेटी के सिर से छिन गया मां का साया
भाई-बहन के बीच चले करोड़ों के संपत्ति विवाद ने मनीषा की नाबालिग बेटी के सिर से मां का साया छीन लिया। हाल ही में उनकी बेटी ने बारहवीं की कक्षा पास की थी और वह कानून की पढ़ाई करके अधिवक्ता बनना चाहती है। इसको लेकर मां अच्छा कॉलेज भी देख रही थी। संपन्न परिवार होने की वजह से उसका यह सपना पूरा होने में कोई बाधा भी नहीं थी लेकिन इसी बीच मनीषा की हत्या ने बेटी की हंसती-खेलती जिंदगी उजाड़ दी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed