Shimla: अमर उजाला कार्यालय शिमला में हुआ संवाद कार्यक्रम, महिलाओं ने आधी आबादी के सशक्तिकरण का दिया संदेश
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला के शिमला कार्यालय में संवाद में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा चुकी महिलाओं ने आधी आबादी के सशक्तिकरण के लिए यह संदेश दिया।
विस्तार
मंचों से महिला सशक्तीकरण की बातें करने से बदलाव नहीं आ सकता, असली बदलाव की बयार तब बहेगी जब आधी आबादी खुद अपनी जड़ों से बाहर निकलने का साहस करेगी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला के शिमला कार्यालय में संवाद में विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमा चुकी महिलाओं ने आधी आबादी के सशक्तिकरण के लिए यह संदेश दिया। संवाद में मौजूद प्रबुद्ध महिलाओं ने पारंपरिक विमर्श से हटकर इस बात पर गहरी चोट की कि पितृसत्तात्मक मानसिकता को जीवित रखने में कहीं न कहीं खुद महिलाएं भी जिम्मेदार हैं। इस चर्चा का सबसे प्रभावी और मौलिक निचोड़ यह रहा कि अब केवल बेटियों को बचाने या पढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि घर के बेटों को संस्कार और प्रशिक्षण देने की जरूरत है ताकि वे महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदल सकें। सदियों से चली आ रही पुरुष प्रधान मानसिकता को महिलाएं ही अनजाने में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रही हैं। मां या दादी ही घर में लड़के और लड़की के बीच भेदभाव की पहली लकीर खींचती हैं। यदि रूढ़ियां तोड़नी हैं, तो इसकी शुरुआत स्वयं महिलाओं को अपने व्यवहार से करनी होगी। जब तक एक मां अपने बेटे को यह नहीं सिखाएगी कि घर के काम केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं हैं, तब तक समाज की संरचना नहीं बदलेगी। महिलाएं ही समाज को असली दिशा दे सकती हैं, बशर्ते वे खुद को उन बेड़ियों से मुक्त करें जो उन्होंने परंपरा के नाम पर पहन रखी हैं।
राजनीति में छात्राओं की भागीदारी जरूरी: कृतिका
आरकेएमवी में बीएड छात्रा कृतिका ने कहा कि कॉलेजों और विवि में छात्राओं को राजनीति में आगे रहने चाहिए। आज भी छात्राएं कॉलेजों और विवि राजनीति में आने से हिचकिचाती हैं। इसके लिए कई कारण जिम्मेवार हैं। छात्राओं को सशक्त बनना चाहिए और समाज को भी उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।
मदद नहीं सशक्तिकरण की आवश्यकता: प्रिया
एचपीयू के पत्रकारिता विषय की छात्रा प्रिया ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला की ओर से संवाद करवाना अच्छी पहल है। कहा कि सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं और नीतियां बना रही हैं। समाजसेवी संस्थाएं भी इस दिशा में कार्य कर रही हैं।
महिलाओं को दान नहीं हुनर दें: सुनीता
हेल्पिंग हेंड वेलफेयर संस्था की पदाधिकारी सुनीता बंसल ने कहा कि वह महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दे रही हैं। ताकि, वह सशक्त हों और आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को आर्थिक सहायता यानी दान की नहीं, बल्कि हुनर की जरूरत है।
महिलाओं के लिए शिक्षा ही सशक्तीकरण: पूजा
रोटरी क्लब हील क्वींस शिमला की अध्यक्ष पूजा गोयल ने महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उन्हें शिक्षित बनाने पर जोर दिया। पूजा ने कहा कि महिलाएं तभी सशक्त होंगी, जब वह शिक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि क्लब भी महिलाओं और बेटियों के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
परिवार का सहयोग जरूरी: बिंदु रानी
शोधकर्ता बिंदु रानी ने कहा कि बेटियों के लिए उनके परिवार का सहयोग होना जरूरी है। अगर बचपन से ही बेटियों को शिक्षा, संस्कार और सशक्त बनाया जाएगा, तभी वह समाज में एक मजबूत महिला के रूप में उभरेगी और बदलाव लाने की हिम्मत भी जुटाएगी। महिलाओं को प्रेरित करने की जरुरत है।
आर्थिक और मानसिक रूप से हों मजबूत: निर्मल चंदेल
एकल नारी शक्ति संगठन की प्रदेश अध्यक्ष निर्मल चंदेल ने कहा महिलाओं के लिए सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने कहा समाज आज भी एकल महिलाओं को वह स्थान नहीं मिल पाया है, जिसकी वह हकदार हैं। महिलाओं को समाज की बेड़ियों को तोड़कर आगे आने होगा।
घर से होती है बदलाव की शुरूआत: डॉ. ट्विंकल
कमला नेहरू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ट्विंकल ने कहा कि महिलाओं के लिए चलाए जा रहे जागरुकता कार्यक्रमों में पुरुषों को शामिल करना भी जरूरी है। मासिक धर्म प्राकृतिक प्रक्रिया है, आज भी जब इसके बारे में बात करनी हो छिपकर बेटियों से होती है। पुरुषों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
लड़की को यह न बोलें...तू लड़की है: डॉ. गंगा
डीडीयू अस्पताल की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. गंगा ने बताया कि समाज में यह चीज बहुत जरूरी है कि लड़की को यह न बोला जाए कि ...तू एक लड़की है। घर में लड़का और लड़की दोनों को बराबरी का माहौल देना जरूरी है। इसकी शुरूआत खुद से करनी पड़ेगी। लड़कियाें के लिए यह जरूरी है कि अधिकारों के लिए जागरूक हों।
लोगों का नजरिया बदलना जरूरी: बिमला ठाकुर
कनेक्टिव लाइव संस्था की संस्थापक बिमला ठाकुर ने कहा कि समाज में लोग जहां विधवा महिलाओं को दया की दृष्टि से देखते हैं, वहीं तलाकशुदा महिलाओं को गलत नजर से। लोग सोचते हैं कि तलाक हुआ है तो जरूर महिला की ही गलती होगी। लोगों को इसके लिए अपना नजरिया बदलना जरूरी है।
संगीत को समाज में सही दर्जा देना जरूरी: अंजली नानक
वॉइस ऑफ शिमला विजेता अंजली नानक ने बताया कि संगीत को समाज में सही दर्जा देना जरूरी है। यदि कोई लड़की संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ती है तो गांव के लोग उसे अलग नजर से देखते हैं, उनकी सोच अभी भी पुराने विचारों तक सीमित है। कई लड़कियों को अपने हुनर के हिसाब से सही मंच नहीं मिल पाता।
परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी जरूरी: डॉ. रजनी शर्मा
कमला नेहरू अस्पताल की प्रशिक्षु डॉ. रजनी शर्मा ने कहा कि महिलाओं को मासिक धर्म, प्रसव पीड़ा सहित अन्य शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और जब बात आती है परिवार नियोजन की तो उसमें भी महिलाओं को ही आगे किया जाता है। इसमें पुरुषों की भी बराबर की भागीदारी होनी चाहिए।
समाज को कुछ देने की भावना के साथ आगे बढ़ें: पूनम ठाकुर
राज्य कर एवं आबकारी विभाग की सहायक आयुक्त पूनम ठाकुर ने कहा कि हमें समाज को कुछ देने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जब हम समाज में निवेश करते हैं तभी हमें वास्तविक उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र विकास में योगदान देना चाहिए।
महिला बदलती है परिवार की दिशा: किमी सूद
रेडक्रॉस की सचिव और समाजसेवी किमी सूद ने कहा कि एक महिला पूरे परिवार की दिशा बदल देती है। वर्तमान समय में महिलाओं को शिक्षा, मनोरंजन और राजनीति सहित सभी चीजों में अलग नजरिए से आंका जाता है। इसलिए महिलाओं को आर्थिक, शारीरिक रूप से मजबूत होना चाहिए।
अपने घर से करें समाज को सुधारने की शुरूआत: तनुजा धांटा
हिमाचली होमस्टे संगठन की अध्यक्ष तनुजा धांटा ने कहा कि महिलाएं वर्तमान में हर क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रही हैं। कुछ लोग हैं जो उन्हें दबाने की कोशिश करते हैं। कहा कि हम समाज को इतनी जल्दी नहीं सुधार सकते, लेकिन इसकी शुरूआत हमें अपने घर और बच्चों से करनी चाहिए।
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