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एचपीयू के शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं की तो होगा आंदोलन : संघ
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सीएएस का एरियर जल्द करने का आग्रह
13 फीसदी महंगाई भत्ता दें और नए आवासीय भवन बनवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिक्षक कल्याण संघ (हपुटा) ने शिक्षकों से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। यह घोषणा शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हपुटा की आम बैठक में की गई।
हपुटा ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो शिक्षक समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करने को मजबूर होगा। संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहे हैं, लेकिन उनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें सीएएस के तहत यूजीसी स्केल 2016 का एरियर, 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर में दो नए भवनों का निर्माण प्रमुख है। उन्होंने कहा कि सीएएस और यूजीसी स्केल का एरियर शिक्षकों का वैधानिक अधिकार है, लेकिन लंबे समय से इसका भुगतान नहीं होने से शिक्षकों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
संघ के महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित रहना शिक्षकों के लिए आर्थिक रूप से कठिन स्थिति पैदा कर रहा है। सरकार को इस मामले में जल्द फैसला लेकर लंबित डीए जारी करना चाहिए। संघ के उपाध्यक्ष डॉ. योगराज ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में लंबे समय से आवासीय सुविधाओं की कमी बनी हुई है। वर्तमान में उपलब्ध आवास पर्याप्त नहीं हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक आवास की सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में शिक्षकों के लिए दो नए आवासीय भवनों का निर्माण जरूरी है।
संघ की सहसचिव डॉ. अंजलि ने कहा कि शिक्षक केवल अपने वैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार इन मुद्दों की अनदेखी करती रही तो शिक्षक कल्याण संघ प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि संघ टकराव नहीं बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन मांगें पूरी न होने पर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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13 फीसदी महंगाई भत्ता दें और नए आवासीय भवन बनवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिक्षक कल्याण संघ (हपुटा) ने शिक्षकों से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। यह घोषणा शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हपुटा की आम बैठक में की गई।
हपुटा ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो शिक्षक समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करने को मजबूर होगा। संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहे हैं, लेकिन उनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें सीएएस के तहत यूजीसी स्केल 2016 का एरियर, 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर में दो नए भवनों का निर्माण प्रमुख है। उन्होंने कहा कि सीएएस और यूजीसी स्केल का एरियर शिक्षकों का वैधानिक अधिकार है, लेकिन लंबे समय से इसका भुगतान नहीं होने से शिक्षकों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
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संघ के महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता लंबित रहना शिक्षकों के लिए आर्थिक रूप से कठिन स्थिति पैदा कर रहा है। सरकार को इस मामले में जल्द फैसला लेकर लंबित डीए जारी करना चाहिए। संघ के उपाध्यक्ष डॉ. योगराज ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में लंबे समय से आवासीय सुविधाओं की कमी बनी हुई है। वर्तमान में उपलब्ध आवास पर्याप्त नहीं हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक आवास की सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में शिक्षकों के लिए दो नए आवासीय भवनों का निर्माण जरूरी है।
संघ की सहसचिव डॉ. अंजलि ने कहा कि शिक्षक केवल अपने वैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार इन मुद्दों की अनदेखी करती रही तो शिक्षक कल्याण संघ प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि संघ टकराव नहीं बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन मांगें पूरी न होने पर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।