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Shimla News: एडवांस्ड स्टडी में चित्रों में उतरी गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर की जीवन गाथा
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संस्थान में टैगोर चित्र दीर्घा लोगों के लिए खुली, टैगोर के जीवन, विचारों और रचनात्मक यात्रा को दर्शाते हैं चित्र
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति पर व्याख्यान भी हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर को समर्पित नई चित्र दीर्घा का उद्घाटन भी किया गया।
संस्थान परिसर में स्थापित यह चित्र दीर्घा गुरुदेव के जीवन, विचारों और रचनात्मक यात्रा को सामने लाती है। दीर्घा में लगाए गए चित्र उनके जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं। इनमें उनके साहित्यिक जीवन, विश्व मंच पर उनकी उपस्थिति और समकालीन महान व्यक्तित्वों के साथ संवाद की झलक मिलती है। एक दीवार पर उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों और कला से जुड़े प्रयोगों को प्रदर्शित किया है जबकि दूसरी दीवार पर शांतिनिकेतन में शुरू किए गए उनके शिक्षा संबंधी प्रयोगों और सांस्कृतिक गतिविधियों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया है। संस्थान के अनुसार यह चित्र दीर्घा आने वाले समय में शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी।
इससे पहले आयोजित स्मृति व्याख्यान में दर्शन शास्त्री प्रो. अरिंदम चक्रवर्ती ने कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा में मानवता और सहअस्तित्व की भावना को केंद्रीय स्थान दिया है। इनके अनुसार आज के समय में जब दुनिया राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानता और पर्यावरणीय संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मानवता पर आधारित यह दृष्टि और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय दर्शन की परंपरा, उसके वैश्विक महत्व और आधुनिक समय में उसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय विचार परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे व्यापक समाज तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर चित्र दीर्घा संस्थान की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे यहां आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति पर व्याख्यान भी हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर को समर्पित नई चित्र दीर्घा का उद्घाटन भी किया गया।
संस्थान परिसर में स्थापित यह चित्र दीर्घा गुरुदेव के जीवन, विचारों और रचनात्मक यात्रा को सामने लाती है। दीर्घा में लगाए गए चित्र उनके जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं। इनमें उनके साहित्यिक जीवन, विश्व मंच पर उनकी उपस्थिति और समकालीन महान व्यक्तित्वों के साथ संवाद की झलक मिलती है। एक दीवार पर उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों और कला से जुड़े प्रयोगों को प्रदर्शित किया है जबकि दूसरी दीवार पर शांतिनिकेतन में शुरू किए गए उनके शिक्षा संबंधी प्रयोगों और सांस्कृतिक गतिविधियों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया है। संस्थान के अनुसार यह चित्र दीर्घा आने वाले समय में शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी।
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इससे पहले आयोजित स्मृति व्याख्यान में दर्शन शास्त्री प्रो. अरिंदम चक्रवर्ती ने कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा में मानवता और सहअस्तित्व की भावना को केंद्रीय स्थान दिया है। इनके अनुसार आज के समय में जब दुनिया राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानता और पर्यावरणीय संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मानवता पर आधारित यह दृष्टि और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय दर्शन की परंपरा, उसके वैश्विक महत्व और आधुनिक समय में उसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय विचार परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे व्यापक समाज तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर चित्र दीर्घा संस्थान की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे यहां आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।