Shimla News: चलौंठी में कई भवनों में दरारें, होटल-घर कराए खाली, फोरलेन के काम पर रोक; लोगों ने लगाए ये आरोप
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चलौंठी में 17 परिवारों को शिफ्ट किया गया है। वहीं, क्षेत्र में पड़ रही दरारों को जांचने के लिए राज्य भूविज्ञानी को भी निरीक्षण के लिए बुलाया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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राजधानी के चलौंठी में दरारें आने से खतरे की जद में आए एक होटल और दो बहुमंजिला मकानों को खाली करवा दिया गया है। इन मकानों से शनिवार शाम तक 17 परिवारों को शिफ्ट कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने यहां फोरलेन टनल के निर्माण पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।
क्षेत्र में पड़ रही दरारों को जांचने के लिए राज्य भूविज्ञानी को भी निरीक्षण के लिए बुलाया गया है। एक हफ्ते के भीतर भूविज्ञानी अपनी रिपोर्ट देंगे। चलौंठी में फोरलेन टनल से सटे मकानों की दीवारों पर दरारें पड़ने के बाद शुक्रवार रात एक मकान को खाली करवाया गया था। शनिवार सुबह एक होटल और एक अन्य मकान को भी खाली करवा दिया गया है। इन मकानों में रहने वाले परिवारों को किसान भवन और जिला परिषद भवन में ठहराया गया है।

पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, उपायुक्त अनुपम कश्यप, एसपी शिमला संजीव गांधी, एडीसी दिव्यांशु सिंगल, एसडीएम ग्रामीण मंजीत शर्मा समेत अन्य अधिकारी शनिवार सुबह ही मौके पर पहुंच गए। प्रभावित परिवारों ने मंत्री के सामने अपनी परेशानी बताई। कहा कि तीन-चार दिन पहले उनके मकानों की दीवारों पर दरारें पड़ गई थीं। इस बारे में जिला प्रशासन से लेकर फोरलेन कंपनी तक को शिकायत दी थी। पहले दावा किया कि कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन शुक्रवार रात अचानक मकान खाली करने को कह दिया गया।
चलौंठी में फोरलेन निर्माण से हुए नुकसान को जांचने के लिए उपायुक्त अनुपम कश्यप ने एसडीएम शिमला ग्रामीण की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट के अनुसार प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा ही स्टेट जियोलॉजिस्ट ने भी शनिवार को नुकसान के कारणों को लेकर मौके का निरीक्षण किया है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट पेश की जाएगी।
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि फोरलेन निर्माण से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। इस मामले को पहले भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने उठा चुके हैं। चलौंठी में सड़क और भवन में दरारें पड़ गई हैं। लोगों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। जिन लोगों को मकान खाली करने पड़े हैं, उनके रहने और खाने की व्यवस्था सरकार करेगी। इसके लिए जिला प्रशासन को निर्देश दे दिए गए हैं।
कहा कि भट्ठाकुफर से लेकर इस क्षेत्र तक फोरलेन किनारे बने भवनों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा। जो भवन अभी खतरे की जद में हैं या पांच से दस साल बाद जिन्हें खतरा हो सकता है, उनकी सूची बनाई जाएगी। इनके मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर एनएचएआई को निर्देश दिए जाएंगे। इनमें ऐसे यंत्र लगाने को कहा जाएगा जिससे निर्माण के दौरान हो रहे नुकसान का पता लग सके। प्रभावित भवनमालिकों को तुरंत मुआवजा देने को भी कहा है।
चलौंठी से पहले भट्ठाकुफर में भी फोरलेन का निर्माण रोका जा चुका है। 22 नवंबर को भट्ठाकुफर में सड़क धंसने के बाद फोरलेन के काम पर रोक लगी थी। करीब डेढ़ महीने बाद यह रोक हटाई गई। अभी मौके पर काम भी शुरू नहीं हुआ था कि फोरलेन टनल के दूसरे छोर संजौली में अब काम पर ब्रेक लग गई।
संजौली-ढली बाईपास में चलौंठी के समीप घरों को खतरे के कारण शनिवार को बड़े वाहनों की आवाजाही बंद रही। इसको देखते हुए पुलिस विभाग ने संजौली-ढली टनल से सुबह और शाम के समय वाहनों की आवाजाही में आंशिक राहत दी। बाईपास से बसों की आवाजाही बंद होने के कारण प्रशासन को यह राहत देनी पड़ी।
दरारें पड़ने के बाद संजौली ढली बाईपास सड़क को शुक्रवार रात से लेकर शनिवार दोपहर तक वाहनों की आवाजाही के लिए बंद किया गया। हालांकि, अब शनिवार शाम इसे छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया है। बड़े वाहन वाया संजौली रवाना होंगे। चलौंठी में एक होटल को भी देर रात खाली करवाया गया। इस होटल में कुछ सैलानी ठहरे थे जिन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया गया।
संजौली के चलौंठी में फोरलेन टनल के निर्माण से रिहायशी कालोनी को खतरा पैदा हो गया है। दो मकानों में दरारें पड़ने के बाद इन्हें खाली करवा दिया गया है। ढली बाईपास पर भी हल्की दरारें देखते हुए बाद जिला प्रशासन ने इस पर भारी वाहनों की आवाजाही पर फिलहाल रोक लगा दी है।
शनिवार सुबह 9:00 बजते ही इन मकानों में रहने वाले लोग अपना सामान निकालने में जुट गए। पुलिस की मौजूदगी में लोगों ने मजदूरों और रिश्तेदारों की मदद से मकानों से सामान निकाला और सड़क पर ढेर लगा दिया। इसके बाद गाड़ियों में इसे दूसरी जगह ले गए। दिन भी मौके पर यह काम चलता रहा।
इनमें ज्यादातर किरायेदार हैं और तीन मकानमालिक हैं। आसपास के लोग भी इस काम में इनकी मदद के लिए आगे आए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि तीन-चार दिन से मकानों की दीवारों पर दरारें पड़नी शुरू हो गई थीं। अंदेशा जताया कि टनल के भीतर धंसाव हो गया है जिससे यह दरारें पड़ गई हैं। चलौंठी का यह क्षेत्र अब काफी घनी आबादी वाला इलाका है।
दरारों को लेकर हमने पहले ही एनएचएआई को सूचित किया था। उनकी टीम भी मौके पर आई थी लेकिन बताया गया कि कोई खतरा नहीं है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे फोन आया कि आप घर से बाहर आ जाओ, आपके मकान को खतरा है। -पूजा शर्मा, मकानमालिक
मकान को खतरा देखते हुए हमने इसे खाली कर दिया है। जीवनभर की कमाई से मकान बनाया है। अब मकान होते हुए हम बेघर हो रहे हैं। रहने के लिए किराये का कमरा लेना पड़ा है। ऐसा कभी नहीं सोचा था कि अपना मकान खाली करना पड़ेगा। प्रशासन जल्द मुआवजा दिलाए और नुकसान की भरपाई करे। -ऊषा धनेट, मकानमालिक