फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   shimla kotkhai apple farmers ropeway transport innovation

Himachal News : सड़क टूटी तो बागवानों ने हवा में बना दिया रास्ता, रोपवे से मिनटों में सड़क तक पहुंच रहा सेब

Mon, 27 Jul 2026 12:47 PM IST
Ankesh Dogra सुरेश शांडिल्य, शिमला।
सुरेश शांडिल्य, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 27 Jul 2026 12:47 PM IST
सार

शिमला के कोटखाई स्थित ग्लेहा गांव में सड़क टूटने के बाद बागवान देवेंद्र सिंह ने करीब 300 मीटर लंबी तार स्पैन (रोपवे) लगाकर बगीचों को मुख्य सड़क से जोड़ दिया। अब सेब की पेटियां कुछ ही मिनटों में सड़क तक पहुंच रही हैं। इस पहल से बारिश में भी फसल समय पर मंडी पहुंच रही है और अन्य बागवान भी इस मॉडल को अपना रहे हैं।

विज्ञापन
shimla kotkhai apple farmers ropeway transport innovation
बागवानों ने हवा में बना दिया रास्ता। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जिला शिमला की कोटखाई तहसील की पंचायत चमैन का ग्लेहा गांव...। ढलानों पर सेब से लदे बगीचे, बीच में गहरा नाला और टूटी कच्ची सड़क। सेब का तुड़ान शुरू हो चुका है लेकिन बागवानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि फसल सड़क तक पहुंचेगी कैसे? 

विज्ञापन


सरकारी मशीनरी से तत्काल राहत की उम्मीद नहीं थी। बरसों से बागवान स्थानीय प्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं पर कुछ नहीं हुआ। ऐसे में गांव के एक बागवान ने खुद ही हवा में रास्ता बना लिया। बगीचों से मुख्य सड़क तक तार स्पैन (रोपवे) लगवा दी। इस रोपवे से अब कुछ ही मिनटों में सेब की पेटियां हवा में लटकते ट्रॉली सिस्टम से सड़क तक पहुंच रही हैं। ग्लेहा की यह पहल अब सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि हिमाचल के बागवानी क्षेत्रों में बदलती सोच की मिसाल बनती जा रही है। 
विज्ञापन


बागवान इस पारंपरिक तकनीक की ओर लौट रहे हैं।  ग्लेहा के बागवान देवेंद्र सिंह ने अपने स्तर पर करीब 300 मीटर लंबी तार स्पैन स्थापित की है। इस पर लगभग दो लाख रुपये खर्च आया। यह तार स्पैन उनके गोदाम को सीधे मुख्य सड़क से जोड़ती है। हर साल उनके बगीचे में सेब की करीब 2,500 से 3,000 पेटियों का उत्पादन होता है। पहले मजदूरों के सहारे खड़ी चढ़ाई और बरसाती नालों को पार कर पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ती थीं। बारिश में सड़क टूटने के बाद यह काम कई बार घंटों तक रुक जाता था। अब डीजल इंजन से चलने वाली इस तार स्पैन में एक बार में चार से छह पेटियां कुछ ही मिनटों में सड़क तक पहुंच जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


देवेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्षों तक सड़क और पुल की मरम्मत का इंतजार किया, लेकिन हर मानसून के बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते थे। आखिरकार उन्होंने अपने खर्च पर तार स्पैन लगाने का फैसला किया। बड़ी बात यह है कि मौसम खराब होने पर भी फसल समय पर सड़क तक पहुंच रही है। यह समस्या केवल ग्लेहा गांव की नहीं है। हर बरसात में सड़कें, पुल और पुलियां क्षतिग्रस्त होने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में कई अन्य इलाकों में लोग अपने स्तर पर या सामूहिक प्रयास से तार स्पैन लगा रहे हैं।

क्यार में भी तार स्पैन लगाने का काम शुरू
जिला शिमला की पंचायत क्यार में भी ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से तार स्पैन लगाने का काम शुरू किया है। इसके लिए स्थानीय प्रतिनिधि मदन लाल वर्मा ने भी बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से कुछ आर्थिक सहायता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। ठियोग तहसील की पंचायत कलींड में भी कई बागवान अपने स्तर पर तार स्पैन लगा चुके हैं। पठानकोट से इनकी आपूर्ति करने वाले नवीन गुप्ता बताते हैं कि हिमाचल से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। स्थानीय विक्रेता वरुण मल्होत्रा के अनुसार इस बार मांग पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। वहीं, शड़ी गांव के तार स्पैन इंस्टॉलर रामलाल शर्मा बताते हैं कि एक तार स्पैन लगाने में सामान्य तौर पर 10 से 15 दिन लगते हैं। हाल ही में मूलकोटी क्षेत्र में भी एक तार स्पैन स्थापित की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed