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HPU Shimla News: एचपीयू में 186 नियुक्तियों की जांच शुरू, पूर्व कुलपतियों की भूमिका भी होगी जांच के दायरे में

Mon, 27 Jul 2026 11:27 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 27 Jul 2026 11:27 AM IST
सार

HPU Recruitment Probe: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 से हुई 186 नियुक्तियों की जांच शुरू हो गई है। कैग रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति बनाई है। पूर्व कुलपतियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होगी। समिति दस्तावेज सत्यापन, पात्रता, आरक्षण नियम और यूजीसी मानकों के पालन की जांच कर रही है।

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hpu recruitment probe 186 appointments cag report shimla
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में वर्ष 2014 से हुई 189 नियुक्तियों की जांच शुरू हो गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित की है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि जिन पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल में ये नियुक्तियां हुईं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। जांच रिपोर्ट कार्यकारी परिषद (ईसी) के समक्ष रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित पूर्व कुलपतियों को भी ईसी की बैठक में बुलाकर उनका  पक्ष सुना जाएगा और जवाबदेही तय की जाएगी।

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कैग की अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में  186 नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन नियुक्तियों में अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का संबंधित जारीकर्ता संस्थानों से सत्यापन नहीं करवाया गया। इसके अलावा एक अयोग्य सहायक प्राध्यापक और एक अतिथि संकाय सदस्य की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के विपरीत पाई गई। 

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कुलपति ने कहा कि समिति तथ्यों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कार्यकारी परिषद के समक्ष रखी जाएगी, जहां परिषद आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो विश्वविद्यालय नियमानुसार कार्रवाई करेगा। समिति नियुक्तियों में अपनाई गई चयन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की पात्रता, दस्तावेजों के सत्यापन, आरक्षण नियमों के पालन और चयन समितियों की कार्रवाई की भी जांच कर रही है। समिति यह भी देख रही है कि भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अधिनियम, यूजीसी विनियमों और अन्य निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई गई थी या नहीं।

कैग रिपोर्ट में भर्ती अनियमितताओं के अलावा विश्वविद्यालय में 27 से 37 प्रतिशत तक संकाय पद रिक्त रहने, शोध गतिविधियों के कमजोर प्रदर्शन, उद्योगों के साथ सीमित सक्रिय समझौते और शैक्षणिक ढांचे में कमियों की भी ओर ध्यान दिलाया गया है। 
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