Shimla News: एचपीवी टीकाकरण के लिए नहीं आ रही बच्चियां, विभाग ने उतारी टीमें
भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने 14 साल की किशोरियों के लिए एचपीवी वैक्सीन अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में अगर शिमला की बात करें तो यहां बच्चियां वैक्सीनेशन (टीकाकरण) के लिए आगे नहीं आ रही हैं। पढे़ं पूरी खबर...
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ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) या सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियां वैक्सीनेशन (टीकाकरण) के लिए आगे नहीं आ रही हैं। इससे विभाग को काफी दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। सबसे अधिक दिक्कत जिले के चिकित्सा खंड सुन्नी, मतियाना, ननखड़ी, कुमारसैन और कोटखाई में आ रही है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से फील्ड में टीमें उतार दी हैं। यह टीमें सूचना, शिक्षा और संपर्क के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रही हैं।
जिले में 29 मार्च से सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण शुरू किया है। 14 से 15 साल 90 दिन पूरे कर चुकी बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण किया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का दूसरा बड़ा कारण बच्चेदानी के मुंह का कैंसर है। सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99.7% मामले ऑन्कोजेनिक (उच्च जोखिम वाले) एचपीवी प्रकारों के लगातार संक्रमण के कारण होते हैं। यह टीका बाजार में 4000 से 5000 रुपये में निजी स्तर पर लगाया जाता है, जबकि सरकार की ओर से इसे अस्पतालों में मुफ्त में लगाया जा रहा है। शिमला जिले के 39 कोल्ड चेन में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित बच्चियों का टीकाकरण किया जा रहा है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों का टीकाकरण इसलिए जरूरी है ताकि गंभीर समस्या से बचाव किया जा सके। वैक्सीन लग जाती है तो बच्चियाें को काफी फायदा होगा। वैक्सीन की एक्युरेसी भी 83 फीसदी है। वैक्सीन लगाने के साथ ही एंटी बॉडी बनना शुरू हो जाती है।
| हेल्थ ब्लॉक | वैक्सीन लगा चुकी बच्चियां |
| चिड़गांव | 142 |
| कोटखाई | 46 |
| कुमारसैन | 43 |
| ननखड़ी | 32 |
| नेरवा | 166 |
| रामपुर | 111 |
| मशोबरा (शिमला शहरी) | 173 |
| सुन्नी | 11 |
| मतियाना | 42 |
| टिक्कर | 105 |