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Shimla News: नई शिक्षा नीति में चुनौती बना दोहरी परीक्षा व्यवस्था का दबाव

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 11:59 PM IST
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The pressure of the dual examination system has become a challenge in the new education policy.
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पुरानी वार्षिक प्रणाली भी रहेगी जारी, नई सेमेस्टर व्यवस्था होगी लागू, कॉलेजों पर बढ़ेगा प्रशासनिक और अकादमिक बोझ

समेस्टर और वार्षिक परीक्षा प्रणाली चलेगी एकसाथ

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति के तहत अगस्त से स्नातक स्तर पर बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। कॉलेजों में पहली बार वार्षिक प्रणाली की जगह सेमेस्टर सिस्टम शुरू होगा। विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, स्किल कोर्स और चार वर्षीय ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री जैसे विकल्प मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने 2026-27 सत्र से सभी यूजी कोर्सों को सेमेस्टर प्रणाली में लाने का निर्णय ले लिया है। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में अब सबसे बड़ी चुनौती दोहरी परीक्षा व्यवस्था है। एक तरफ नए विद्यार्थियों के लिए सेमेस्टर सिस्टम लागू होगा वहीं पुराने बैच के छात्रों के लिए वार्षिक प्रणाली भी समानांतर चलती रहेगी। ऐसे में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को एक साथ दो अलग-अलग अकादमिक और परीक्षा ढांचे संभालने पड़ेंगे। शिक्षा विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके बावजूद कॉलेज स्तर पर अभी कई व्यावहारिक सवाल बने हुए हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यदि एक ही समय में वार्षिक और सेमेस्टर दोनों प्रणालियां चलेंगी तो परीक्षा, परिणाम, टाइम टेबल, आंतरिक मूल्यांकन और फैकल्टी वर्कलोड कई गुना बढ़ जाएगा।
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नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को हर छह महीने में परीक्षा देनी होगी। साथ ही असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, प्रेजेंटेशन और इंटरनल असेसमेंट का हिस्सा भी बढ़ेगा। पहले जहां पूरा मूल्यांकन साल में एक बार होता था अब निरंतर मूल्यांकन प्रणाली लागू होगी। इससे शिक्षकों और परीक्षा शाखाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय माना जा रहा है। प्रदेश में 215 से अधिक कॉलेज एचपीयू से संबद्ध हैं। इनमें से केवल 29 कॉलेजों में शुरुआती चरण में चार वर्षीय कार्यक्रम शुरू किए जाने की संभावना जताई है जबकि बाकी कॉलेज तीन वर्षीय डिग्री ढांचे में रहेंगे। इससे छात्रों के सामने कॉलेज चयन का नया सवाल भी खड़ा हो गया है।
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छात्रों में है अभी असमंजस
कई विश्वविद्यालयों में छात्र अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि तीन वर्षीय डिग्री और चार वर्षीय रिसर्च डिग्री में वास्तविक अंतर क्या होगा और भविष्य में किसे अधिक मान्यता मिलेगी। परीक्षा नियंत्रक श्याम लाल कौशल ने बताया कि परीक्षा इकाई पर दोहरा दबाव होगा लेकिन एनईपी का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अधिक लचीला और शोध आधारित बनाना है।पहले कुछ साल मुश्किल होगी लेकिन सभी कॉलेजों के एक ही प्रणाली के तहत आने के बाद संचालन आसान हो जाएगा।
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