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हिमाचल: सड़क किनारे नालियों में घरेलू सीवेज या कचरा डाला तो प्रतिदिन 1000 रुपये जुर्माना

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 25 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

प्रदेश सरकार ने भारी बारिश और भूस्खलन से होने वाले सड़कों के नुकसान को कम करने के लिए सड़क जल निकासी नीति मंगलवार को राजपत्र में अधिसूचित की है। 

Throwing domestic sewage or garbage into roadside drains will attract a fine of Rs 1,000 per day.
हिमाचल लोक निर्माण विभाग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने भारी बारिश और भूस्खलन से होने वाले सड़कों के नुकसान को कम करने के लिए सड़क जल निकासी नीति मंगलवार को राजपत्र में अधिसूचित की है। बीते वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी आपदाओं को देखते हुए लोक निर्माण विभाग अब सड़कों के डिजाइन में जल निकासी (ड्रेनेज) को एक अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करेगा। नीति के तहत सड़कों के डिजाइन में बड़े बदलाव किए जाएंगे। नई नीति में न केवल इंजीनियरिंग को लेकर बदलाव किए गए हैं बल्कि इन्हें कड़ाई से लागू करने की भी व्यवस्था की गई है। सड़क किनारे नालियों में घरेलू सीवेज या कचरा डालना प्रतिबंधित होगा। ऐसा करने पर हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

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जल निकासी व्यवस्था को वैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल मापदंडों के आधार पर तैयार किया जाएगा। पाइप कल्वर्ट के स्थान पर अब बॉक्स कल्वर्ट को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि मलबे के कारण होने वाली ब्लॉकेज को कम किया जा सके। मलबे की निकासी और मशीनों से सफाई को आसान बनाने के लिए मानक यू-आकार की नालियों का उपयोग किया जाएगा। पहाड़ी ढलानों से आने वाले पानी को सड़क तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए कच वाटर ड्रेन और सब-सरफेस ड्रेनेज सिस्टम बनाए जाएंगे। सड़कों की मरम्मत और नई निकासी प्रणालियों के लिए रोड ड्रेनेज नाम से एक अलग बजट हेड बनाया जाएगा। पहले चरण में सभी मुख्य जिला सड़कों को कवर किया जाएगा, उसके बाद घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य लिंक सड़कों को लिया जाएगा। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सड़कों के जीवनकाल को बढ़ाना और मानसून के दौरान होने वाले करोड़ों रुपये के नुकसान को कम करना है।

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