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Union Budget 2026: केंद्रीय बजट पर हिमाचल की निगाहें, सौगात की उम्मीद; ग्रीन फंड की पैरवी भी कर चुके हैं सीएम
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/बिलासपुर।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 01 Feb 2026 10:43 AM IST
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सार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बजट से हिमाचल प्रदेश की जनता को कई उम्मीदें हैं। पढ़ें पूरी खबर...
Union Budget 2026
- फोटो : PTI
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार के आम बजट से कई उम्मीदें हैं। प्रदेश को विशेष राज्य श्रेणी का लाभ मिल सकता है। आपदा राहत के लिए भी राज्य को खास मदद मिल सकती है। रेल और हवाई परियोजनाओं के लिए भी केंद्र से हिमाचल प्रदेश को बजट मिल सकता है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की थी और हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहायता देने का आग्रह किया था। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष निर्धारित किए जाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से ग्रीन फंड के गठन की पैरवी की थी।
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10 जनवरी को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में बतौर वित्त मंत्री शामिल हुए राजेश धर्माणी ने भी केंद्र सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं। बजट पूर्व राज्यों की प्रस्तुतियों के लिए आयोजित हुई इस बैठक में हिमाचल को बीआईएस की ओर से भूकंप जोन छह में रखे जाने का मामला उठाते हुए इसी हिसाब से हिमाचल को फंडिंग करने का मामला उठाया था।
उधर, बीबीएन के उद्योगपतियों को केंद्रीय बजट में वित्तीय घाटा कम करने, आयात- निर्यात के गैप को कम करने, उद्योगपतियों पर विश्वास करने व व्यापार को सरल करने की उम्मीद है।
पर्यटन में मिल सकता है सहयोग : भारद्वाज
कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से भाजपा सांसद राजीव भारद्वाज ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि हिमाचल प्रदेश को पर्यटन, रेलवे, आधारभूत ढांचा विकास, शिक्षा आदि के लिए केंद्र सरकार के आम बजट में प्रावधान होगा।
कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से भाजपा सांसद राजीव भारद्वाज ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि हिमाचल प्रदेश को पर्यटन, रेलवे, आधारभूत ढांचा विकास, शिक्षा आदि के लिए केंद्र सरकार के आम बजट में प्रावधान होगा।
बजट आने से पहले क्या बता सकते हैं : कश्यप
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और शिमला से लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि बजट में क्या मिलेगा, इसका पता रविवार को ही चलेगा। उससे पहले वह क्या बता सकते हैं।
कई उम्मीदें : सिकंदर
राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि सभी सांसद अलग-अलग मंत्रालयों में मिले हैं। हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार और अन्य आधारभूत ढांचा विकास को लेकर मांगें उठा चुके हैं। बजट से उम्मीद है कि हिमाचल के लिए भी कई प्रावधान होंगे।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और शिमला से लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि बजट में क्या मिलेगा, इसका पता रविवार को ही चलेगा। उससे पहले वह क्या बता सकते हैं।
कई उम्मीदें : सिकंदर
राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि सभी सांसद अलग-अलग मंत्रालयों में मिले हैं। हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार और अन्य आधारभूत ढांचा विकास को लेकर मांगें उठा चुके हैं। बजट से उम्मीद है कि हिमाचल के लिए भी कई प्रावधान होंगे।
बिलासपुर-लेह रेल लाइन बजट में हो सकती है शामिल
हिमाचल और लद्दाख को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन को आज पेश होने वाले केंद्रीय बजट में शामिल किए जाने की संभावना है।
सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस परियोजना को पहले ही वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास पहुंचा था। एनएसए के स्तर पर चर्चा के बाद फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी, जहां से अंतिम स्वीकृति के बाद अब बजट आवंटन और निर्माण की समय-सीमा तय हुई है। रेल मंत्रालय की ओर से इस रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट वर्ष 2022 में तैयार की गई थी।
उस समय परियोजना की अनुमानित लागत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी थी। बाद में संशोधनों के चलते इसकी लागत बढ़कर 1.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण सुरंगों की संख्या, लंबाई में इजाफा है। डीपीआर के अनुसार इस परियोजना का निर्माण कार्य लेह की ओर से शुरू किया जाएगा। चीन सीमा से सटे इलाकों में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है। रक्षा मंत्रालय के समर्थन से तैयार इस रेललाइन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति मजबूत करना है।
हिमाचल और लद्दाख को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन को आज पेश होने वाले केंद्रीय बजट में शामिल किए जाने की संभावना है।
सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस परियोजना को पहले ही वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास पहुंचा था। एनएसए के स्तर पर चर्चा के बाद फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी, जहां से अंतिम स्वीकृति के बाद अब बजट आवंटन और निर्माण की समय-सीमा तय हुई है। रेल मंत्रालय की ओर से इस रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट वर्ष 2022 में तैयार की गई थी।
उस समय परियोजना की अनुमानित लागत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी थी। बाद में संशोधनों के चलते इसकी लागत बढ़कर 1.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण सुरंगों की संख्या, लंबाई में इजाफा है। डीपीआर के अनुसार इस परियोजना का निर्माण कार्य लेह की ओर से शुरू किया जाएगा। चीन सीमा से सटे इलाकों में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है। रक्षा मंत्रालय के समर्थन से तैयार इस रेललाइन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति मजबूत करना है।
उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पूरा करने के बाद अब केंद्र सरकार का पूरा ध्यान बिलासपुर-मनाली-लेह रेल परियोजना पर केंद्रित है। बिलासपुर से शुरू होकर मंडी, मनाली, केलांग और दारचा होते हुए लेह तक जाने वाली यह रेललाइन कुल 489 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज लाइन होगी। इसे दुनिया की सबसे ऊंची और तकनीकी रूप से सबसे कठिन रेलवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। डीपीआर के अनुसार मार्ग का 52 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सुरंगों और ऊंचे पुलों से गुजरेगा। संवाद
2200 हेक्टेयर भूमि का किया जाएगा अधिग्रहण
इस परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में कुल 2200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 26 प्रतिशत यानी 572 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र की होगी। भूमि अधिग्रहण पर अनुमानित खर्च 15,500 करोड़ रुपये होगा। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वन भूमि के बदले प्रतिपूरक वनीकरण की भी योजना तैयार की गई है। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्य सुरंगों के साथ एस्केप टनल बनाई जाएंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
2200 हेक्टेयर भूमि का किया जाएगा अधिग्रहण
इस परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में कुल 2200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 26 प्रतिशत यानी 572 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र की होगी। भूमि अधिग्रहण पर अनुमानित खर्च 15,500 करोड़ रुपये होगा। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वन भूमि के बदले प्रतिपूरक वनीकरण की भी योजना तैयार की गई है। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्य सुरंगों के साथ एस्केप टनल बनाई जाएंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
