बजट सत्र: हिमाचल में बनीं दवाओं के सैंपल फेल होने पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, सदन में गूंजा अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग की मांगों पर लाए कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायकों ने दवाओं के सैंपल फेल होने का मामला उठाते हुए सरकार को घेरा।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र में स्वास्थ्य विभाग की मांगों पर लाए कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायकों ने दवाओं के नमूने फेल होने का मामला उठाते हुए सरकार को घेरा। कांगड़ा के भाजपा विधायक पवन काजल ने सदन में अमर उजाला में 24 फरवरी 2026 को ‘हिमाचल में बनीं 71 दवाओं समेत देश भर में 215 के सैंपल हुए फेल’ शीर्षक से प्रकाशित खबर को पढ़ा।
काजल ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि दवाओं के सैंपल फेल होने पर उचित कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
सुलह के भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने भी कहा कि जिन कंपनियाें के दवा सैंपल फेल हो गए, उन पर क्या कार्रवाई हो रही है। वह यह नहीं कहते कि इसकी जांच के लिए जो लोग लगे हैं, वे सभी खराब हैं। उनकी रिशफलिंग करें। देश की 40 प्रतिशत दवाएं हिमाचल में बनती हैं। 1,400 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इस पर क्या कार्रवाई की गई है। जेनरिक दवाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति क्यों तैयार नहीं की जा रही हैं। बीबीएन में तैयार होने वाली दवाएं पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री कहते हैं कि सैंपलिंग के लिए लैब स्थापित करेंगे। कंडाघाट की लैब की हालत तो सुधारो।
दवा ही मिलावट वाली होगी तो आम आदमी का इलाज कैसे होगा। काजल ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन करवाने जाएं तो दो महीने की वेटिंग होती है। टांडा कॉलेज में मरीज फर्श पर लेटने को मजबूर हो जाते हैं। वार्ड ब्वाय को वेतन नहीं मिल रहा। पार्किंग की कोई सुविधा नहीं। टांडा मेडिकल कॉलेज से हजारों की संख्या में मरीज ठीक होकर गए हैं। काजल ने कहा कि विधायक निधि में सीधी कटौती उचित नहीं है। वह इस निधि से भी कई उपकरणों को खरीदने का विचार कर रहे थे।

पुरुषों के गर्भाशय की सर्जरी करने वाला डॉक्टर कौन, कार्रवाई करें : परमार
परमार ने कहा कि पुरुषों के गर्भाशय की सर्जरी करने वाला डॉक्टर कौन है, उसका नाम बताएं। उस पर कार्रवाई करें। भ्रष्टाचार करने वालों के नाम सामने आने चाहिए और कार्रवाई होनी चाहिए। वह कौन डॉक्टर है, जिसने फर्जी बिल पुरुषों के गर्भाशय के नाम पर बनाए। अगर यह मामला मैन मेड है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिसने यह सब जानकारी सरकार को दी है। उन्होंने कहा कि हिमकेयर मामले की सिटिंग जज से जांच करवाएं। पहले 1100 करोड़ का घोटाला होने की बात की, उसके बाद 100 करोड़ रुपये के घोटाले की। यह आयुष्मान और हिमकेयर योजना को बंद करने की सोची-समझी रणनीति है।
सरकार की ऊंची उड़ान बिना पंखों की, धोती है तो लंगाेटी नहीं: विपिन परमार
विपिन परमार ने कहा कि पर्याप्त बजट न होने से सरकार की ऊंची उड़ान बिना पंखों की है। धोती है तो लंगाेटी नहीं है। परमार ने कहा कि एक मामला सामने आया है कि एक डाॅक्टर ने लैब तकनीशियन और ऑपरेशन थियेटर को बाग-बगीचे में काम करने लगाया है। क्या जनता के पैसे से ऐसा किया जा सकता है। सीटी स्कैन की मशीन थुरल और भवारना में बेकार पड़ी हुई है। न रेडियोलॉजिस्ट हैं और न ही रेडियोग्राफर। रोबोटिक मशीन के लिए 28 करोड़ रुपये खर्च करना कितना जायज है। सिंगल टेंडर एक ही कंपनी को क्यों दिया गया।
गरीब मरीज के लिए एडजस्टमेंट की तो यह भ्रष्टाचार नहीं : डॉ. जनक
भरमौर में भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि पिछले दिन मर्दों की बच्चेदानी के आॅपरेशन करने की बात शर्मनाक है। उन्होंने डॉक्टर होने के नाते जब जानकारी जुटाई तो चार मामलों का पता चला। हिमकेयर में विभिन्न बीमारियों के पैकेज बनाए गए। कौन मरीज किस मर्ज के साथ आएगा, इसका पता नहीं चलता। एक मरीज को कैंसर था। उसकी मदद नहीं हो पा रही थी। डॉक्टरों ने उसे एक पैकेज में फिट करते हुए इलाज करवाया। क्या यह भ्रष्टाचार है। अगर किसी डॉक्टर ने एक गरीब व्यक्ति की मदद करने के लिए कोई एडजस्टमेंट कर दी तो वह भ्रष्टाचार नहीं है। अगर उन्होंने कोई भ्रष्टाचार किया है तो सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच करवाएं। प्रदेश में प्रतिवर्ष 10 से 15 लोग स्क्रब टायफस से मर जाते हैं। पिछले बजट में राज्यस्तरीय स्क्रब टायफस यूनिट को खोलने की बात की गई थी, मगर वह कहां खुली है। जयराम सरकार के कार्यकाल में प्रीमियम के आधार पर हिमकेयर योजना को शुरू किया गया।
साढ़े तीन साल में एक बार भी पांवटा अस्पताल नहीं गए स्वास्थ्य मंत्री
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में बोलते हुए पांवटा के भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने कहा कि सरकार पिछली सरकार के समय 100 करोड़ रुपये के घपले की बात कर रही है। ऐसा है तो जांच करें। साढ़े तीन साल तो कहने-कहने में ही निकल गए। हिमकेयर बंद करने का क्या फल मिलेगा। यह हिमाचल प्रदेश के लोग बताएंगे। अस्पतालों को सरकार डॉक्टर नहीं दे रही। तकनीशियन नहीं हैं। मशीनें धूल फांक रही हैं। सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। स्वास्थ्य मंत्री पांवटा का दौरा तो कर लें। साढ़े तीन साल में एक बार भी वह पांवटा नहीं आए। पांवटा अस्पताल की स्थिति तो देख लें। स्वास्थ्य मंत्री एक बार पांवटा तो आएं।
हर मेडिकल कॉलेज में शुरू नहीं हुए पैट स्कैन : विनोद
नाचन के भाजपा विधायक विनोद कुमार ने कहा कि हर मेडिकल कॉलेज में पैट स्कैन की सुविधा शुरू करने की बात की गई थी, पर कछ नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज नेरचौक में लैब तकनीशियन की कमी है। मरीजों के लिए वहां चौबीस घंटे लैब की सुविधा होनी चाहिए। स्टाफ के लिए जो क्वार्टर बने, वे गिरने के कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में रिक्तियों को भरा जाए।
मुंह खोला तो रंग मुंह में गिरा : डॉ. जनक
डॉ. जनक राज ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के यह हाल हैं कि वह डेंटल क्लीनिक में गए। मुंह खोला तो ऊपर से रंग मुंह पर गिर गया। उन्होंने कहा कि विधानसभा के क्लीनिक के यह हाल हैं, बाकी छोड़िए। नेताओं में ह्यूब्रिस सिंड्रोम है, जिससे लगता है कि जो कर रहे हैं, वही ठीक है।