{"_id":"69ac10740a45a28f0f0cfd3f","slug":"womens-committee-demands-government-continue-bus-travel-concessions-shimla-news-c-19-sml1002-687002-2026-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: महिला समिति की हुंकार, बसों में \nसफर पर छूट जारी रखे सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: महिला समिति की हुंकार, बसों में सफर पर छूट जारी रखे सरकार
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला दिवस पर जनवादी महिला समिति ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन
किराये में 50 फीसदी छूट समाप्त करने की साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में महिलाओं को दी जा रही बस किराये की छूट को सिर्फ हिम बस कार्ड बनाने पर जारी रखने की योजना का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने विरोध किया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समिति की महिला प्रतिनिधियों ने शनिवार को परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एमडी से मुलाकात कर मांगपत्र सौंपा। समिति का कहना है कि हिम बस कार्ड को बनाने की अनिवार्य शर्त को लागू कर महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का काम किया है। हर महिला रोज निगम की बसों में सफर नहीं करती उस पर यदि करती भी हैं, तो निगम जिस तरह से लाभ और कमाई वाले रूटों को निजी बस रूट में बदल रही है, उससे हिम बस कार्ड का महिलाओं को कोई लाभ नहीं होगा।
प्रदर्शन में शामिल समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान और जिला सचिव सोनिया सब्रवाल ने कहा कि जिस परिवार में तीन से चार महिलाएं हैं, उन्हें लोक मित्र केंद्रों में कार्ड बनवाने की फीस के साथ साल के प्रति महिला 236 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। लोक मित्र केंद्रों में मनमर्जी के रेट लिए जा रहे हैं। यदि कार्ड बनाने का आवेदन रिजेक्ट होता है, तो दोबारा लोक मित्र केंद्र की फीस चुकानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का निजीकरण कर रही है। घाटे का रोना रोकर सारा आर्थिक बोझ निगम की बसों में सफर करने वाले आम लोगों पर डाला जा रहा है। फालमा ने कहा कि एक ओर निगम के लाभ वाले रूट निजी बसों को दिए जा रहे है, उस हिम बस कार्ड बनाने में भी फीस वसूली जा रही है। बंद किए रूटों को सरकार तुरंत बहाल करे।
सोनिया सब्रवाल ने कहा कि शहर में सरकारी बसों की संख्या कम है, इससे हिम बसों का कोई लाभ नहीं हो रहा। माताओं को अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए समय पर सरकारी बसें नहीं मिलतीं उन्हें मजबूरन निजी बसों में सफर करना पड़ता है। हिम बस कार्ड पर ही महिलाओं से 50% छूट की यह योजना सीधे तौर पर महिलाओं को दी जा रही छूट को समाप्त करने की साजिश है। ग्रामीण रूटों के बद किए जाने पर इन हिम बस कार्ड का कोई लाभ नहीं होगा। महिला समिति की शहरी कोषाध्यक्ष रमा रावत ने कहा प्रबंधन निदेशक के समक्ष मांग उठाई कि ग्रामीण रूटों पर अक्सर खराब खटारा बसें भेजी जाती हैं, जो कहीं भी खड़ी हो जाती हैं, इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें सुधार किया जाए। पंजाब महिलाओं को आधार कार्ड पर मुफ्त सफर की सुविधा दे रहा है, वहीं हिमाचल 50 फीसदी छूट भी समाप्त कर रहा है।
परिवहन सुविधा नहीं दे पा रहा निगम : सेक्टा
एसएफआई के राज्य अध्यक्ष सन्नी सेक्टा ने कहा कि परिवहन निगम ग्रामीण, दूर दराज क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेज छात्र-छात्राओं को भी बसों की सुविधा नहीं दे पा हरा है। एचपीयू के लिए कोई सरकारी बस नहीं चलती। इसलिए एचपीयू के विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड का कोई लाभ नहीं है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षण संस्थानों और बस अड्डों पर बस पास बनवाने को अतिरिक्त काउंटर खोले।
Trending Videos
किराये में 50 फीसदी छूट समाप्त करने की साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में महिलाओं को दी जा रही बस किराये की छूट को सिर्फ हिम बस कार्ड बनाने पर जारी रखने की योजना का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने विरोध किया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समिति की महिला प्रतिनिधियों ने शनिवार को परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एमडी से मुलाकात कर मांगपत्र सौंपा। समिति का कहना है कि हिम बस कार्ड को बनाने की अनिवार्य शर्त को लागू कर महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का काम किया है। हर महिला रोज निगम की बसों में सफर नहीं करती उस पर यदि करती भी हैं, तो निगम जिस तरह से लाभ और कमाई वाले रूटों को निजी बस रूट में बदल रही है, उससे हिम बस कार्ड का महिलाओं को कोई लाभ नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदर्शन में शामिल समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान और जिला सचिव सोनिया सब्रवाल ने कहा कि जिस परिवार में तीन से चार महिलाएं हैं, उन्हें लोक मित्र केंद्रों में कार्ड बनवाने की फीस के साथ साल के प्रति महिला 236 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। लोक मित्र केंद्रों में मनमर्जी के रेट लिए जा रहे हैं। यदि कार्ड बनाने का आवेदन रिजेक्ट होता है, तो दोबारा लोक मित्र केंद्र की फीस चुकानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का निजीकरण कर रही है। घाटे का रोना रोकर सारा आर्थिक बोझ निगम की बसों में सफर करने वाले आम लोगों पर डाला जा रहा है। फालमा ने कहा कि एक ओर निगम के लाभ वाले रूट निजी बसों को दिए जा रहे है, उस हिम बस कार्ड बनाने में भी फीस वसूली जा रही है। बंद किए रूटों को सरकार तुरंत बहाल करे।
सोनिया सब्रवाल ने कहा कि शहर में सरकारी बसों की संख्या कम है, इससे हिम बसों का कोई लाभ नहीं हो रहा। माताओं को अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए समय पर सरकारी बसें नहीं मिलतीं उन्हें मजबूरन निजी बसों में सफर करना पड़ता है। हिम बस कार्ड पर ही महिलाओं से 50% छूट की यह योजना सीधे तौर पर महिलाओं को दी जा रही छूट को समाप्त करने की साजिश है। ग्रामीण रूटों के बद किए जाने पर इन हिम बस कार्ड का कोई लाभ नहीं होगा। महिला समिति की शहरी कोषाध्यक्ष रमा रावत ने कहा प्रबंधन निदेशक के समक्ष मांग उठाई कि ग्रामीण रूटों पर अक्सर खराब खटारा बसें भेजी जाती हैं, जो कहीं भी खड़ी हो जाती हैं, इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें सुधार किया जाए। पंजाब महिलाओं को आधार कार्ड पर मुफ्त सफर की सुविधा दे रहा है, वहीं हिमाचल 50 फीसदी छूट भी समाप्त कर रहा है।
परिवहन सुविधा नहीं दे पा रहा निगम : सेक्टा
एसएफआई के राज्य अध्यक्ष सन्नी सेक्टा ने कहा कि परिवहन निगम ग्रामीण, दूर दराज क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेज छात्र-छात्राओं को भी बसों की सुविधा नहीं दे पा हरा है। एचपीयू के लिए कोई सरकारी बस नहीं चलती। इसलिए एचपीयू के विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड का कोई लाभ नहीं है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षण संस्थानों और बस अड्डों पर बस पास बनवाने को अतिरिक्त काउंटर खोले।