नवरात्र में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए हम उपवास, पूजा, अनुष्ठान आदि करते हैं, जिससे जीवन में भय, विघ्न और शत्रुओं का नाश होकर सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि हवन, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं, जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं।
Chaitra Navratri 2019 : शक्ति की साक्षात स्वरूप हैं कन्याएं, इस पूजन से प्रसन्न होंगी देवी मां
शक्ति का साक्षात स्वरुप हैं कन्याएं
कन्या पूजन के लिए जिन नौ कन्याओं को बुलाया जाता है, उन्हें मां दुर्गा के नौ रूप मानकर ही पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार कन्या के जन्म का एक वर्ष बीतने के पश्चात् कन्या को कुंवारी की संज्ञा दी गई है। अतः दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कलिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा तथा दस वर्ष की कन्या सुभद्रा के सामान मानी जाती हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात शक्ति का स्वरुप मानी गई हैं।
कन्या पूजन का फल
दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि दुर्गा पूजन से पहले भी कन्या का पूजन करें। इसके बाद ही मां दुर्गा का पूजन आरम्भ करें। श्रद्धा भाव से की गई एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग, तीन कन्या की पूजा से चारों पुरुषार्थ और राज्य सम्मान, चार और पांच कन्या की पूजा से बुद्धि-विद्या, छह की पूजा से कार्यसिद्धि, सात की पूजा से परमपद, आठ की पूजा से अष्टलक्ष्मी और नौ कन्याओं की पूजा से सभी प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
कन्याओं का पूजन करते समय सर्वप्रथम शुद्ध जल से उनके चरण धोने चाहिए। तत्पश्चात उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं। खीर, पूरी, चने, हलवा आदि सात्विक भोजन का माता को भोग लगाकर कन्याओं को भोजन कराएं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं गुजरात राज्यों में तो कहीं-कहीं नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोज कराने की परम्परा है।
देवी संग इस स्वरूप में पूजे जाते हैं भैरव
कन्याओं के के साथ बालक को भैरव बाबा का स्वरुप मानकर पूजा जाता है। कन्याओं को सुमधुर भोजन कराने के बाद उन्हें टीका लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। प्रदक्षिणा कर उनके चरण स्पर्श करते हुए यथाशक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें। इस तरह नवरात्र पर्व पर कन्या का पूजन करके भक्त मां की कृपा पा सकते हैं।