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Lohri Folk Song : 'सुन्दर मुंदरिए तेरा कौन विचारा…' इस लोक गीत के बिना अधूरा है लोहड़ी का पर्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 13 Jan 2026 07:55 AM IST
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सार
Lohri 2026 Song Sunder Mundriye Song Lyrics: आज लोहड़ी है और इस दिन पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी की धूम होती है। इस दिन सुंदर मुंदरिए तेरा कौन विचारा, दुल्ला भट्टीवाला.... लोकगीत गाने की परंपरा है। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी और गीत गाए लोहड़ी का पर्व पूरा नहीं माना जाता है।
लोहड़ी की लख लख बधाइयां 2026
- फोटो : Amar ujala
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विस्तार
Lohri Sunder Mundriye Song Lyrics : आज लोहड़ी का त्योहार है। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है। लोहड़ी का त्योहार एकता, भाईचारे, आपसी रिश्ते और सामाजिक सामजंस्य का प्रतीक होता है। यह त्योहार विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्य हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में बड़े ही धूम -धाम के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार यह पर्व रबी की फसल की कटाई के शुरुआत का प्रतीक होती है। लोहड़ी की शाम को अग्नि जलाकर उसके चारो तरफ परिक्रमा करते हुए इसमें रेवड़ी, मूंगफली, गुड़ और तिल को डाल जाता है। इसके अलावा लोहड़ी का त्योहार पंजाब के दुल्ला भट्टी के साहस, पराक्रम और दयालुता को याद करते हुए सुंदर मुंदरिए तेरा कौन विचारा..... गीत को गाने की भी परंपरा होती है। आइए जानते हैं ये लोकगीत।
लोहड़ी सुन्दर मुंदरिए गीत लिरिक्स (Lohri Sunder Mundriye Song Lyrics)
सुन्दर मुंदरिए
तेरा कौन विचारा
दुल्ला भट्टीवाला
दुल्ले दी धी व्याही
सेर शक्कर पायी
कुड़ी दा लाल पताका
कुड़ी दा सालू पाटा
सालू कौन समेटे
मामे चूरी कुट्टी
जिमींदारां लुट्टी
जमींदार सुधाए
गिन गिन पोले लाए
इक पोला घट गया
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया
इक पोला होर आया
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया
सिपाही फेर के ले गया
सिपाही नूं मारी इट्ट
भावें रो ते भावें पिट्ट
साहनूं दे लोहड़ी
तेरी जीवे जोड़ी
साहनूं दे दाणे तेरे जीण न्याणे
कौन थे दुल्ला भट्टी
लोहड़ी के मौके पर हल साल सुंदर मुंदरिए गीत को गाने के पीछे के कहानी है। दरअसल मुगल काल में एक पंजाबी लोक नायक दुल्ला भट्टी थे जो गरीबों की हर तरह से मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। दुल्ला भट्टी मुगलकाल में जमींदारों और मुगलों से गरीब लड़कियों को दासी बनाने से बचाते थे और उनकी शादी करवाते थे। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी के साहस और परोपकार को याद करते हुए यह लोकगीत गाया जाता है।
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लोहड़ी सुन्दर मुंदरिए गीत लिरिक्स (Lohri Sunder Mundriye Song Lyrics)
सुन्दर मुंदरिए
तेरा कौन विचारा
दुल्ला भट्टीवाला
दुल्ले दी धी व्याही
सेर शक्कर पायी
कुड़ी दा लाल पताका
कुड़ी दा सालू पाटा
सालू कौन समेटे
मामे चूरी कुट्टी
जिमींदारां लुट्टी
जमींदार सुधाए
गिन गिन पोले लाए
इक पोला घट गया
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया
इक पोला होर आया
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया
सिपाही फेर के ले गया
सिपाही नूं मारी इट्ट
भावें रो ते भावें पिट्ट
साहनूं दे लोहड़ी
तेरी जीवे जोड़ी
साहनूं दे दाणे तेरे जीण न्याणे
कौन थे दुल्ला भट्टी
लोहड़ी के मौके पर हल साल सुंदर मुंदरिए गीत को गाने के पीछे के कहानी है। दरअसल मुगल काल में एक पंजाबी लोक नायक दुल्ला भट्टी थे जो गरीबों की हर तरह से मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। दुल्ला भट्टी मुगलकाल में जमींदारों और मुगलों से गरीब लड़कियों को दासी बनाने से बचाते थे और उनकी शादी करवाते थे। लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी के साहस और परोपकार को याद करते हुए यह लोकगीत गाया जाता है।
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