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Makar Sankranti 2026: 19 साल बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी, जानिए स्नान का पुण्यकाल का मुहूर्त

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 13 Jan 2026 12:45 PM IST
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सार

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस पर्व पर स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस बार मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का भी संयोग बना हुआ है। 

Makar Sankranti 2026 Shahi Snan Shubh Muhurat Vidhi Mantra and Importance in Hindi
मकर संक्रांति का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Makar Sankranti 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह केवल एक राशि परिवर्तन नहीं, बल्कि सूर्य की दिशा और चेतना के परिवर्तन का प्रतीक है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे शास्त्रों में देवताओं का दिन कहा गया है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश जीवन में प्रकाश, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का संकेत माना जाता है। इस बार मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है ऐसे में एकादशी पर चावल का प्रयोग नहीं किया जाता तो मकर संक्रांति पर चावल से बनी सामग्री का प्रयोग नहीं होगा। षटतिला एकादशी 14 जनवरी की सुबह 3:18 बजे शुरू होकर शाम 5:53 बजे तक रहेगी। लोग अगले दिन खिचड़ी बना सकते हैं। ऐसा संयोग 19 साल बाद बन रहा है कि मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी है।
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आध्यात्मिक दृष्टि से सूर्य का महत्व
  • वेदों में सूर्य को आत्मा का कारक और साक्षात् ब्रह्म का प्रतीक माना गया है। 
  • ऋग्वेद में सूर्य को ‘सविता’ कहा गया है, जो संपूर्ण सृष्टि को ऊर्जा प्रदान करता है। 
  • सूर्य का उत्तरायण होना यह दर्शाता है कि अब प्रकृति बाह्य और आंतरिक दोनों रूपों में जागरण की ओर अग्रसर होती है। 
  • आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार उत्तरायण काल में किया गया जप, तप, स्नान और दान अनेक गुना फलदायी होता है। 
  • यही कारण है कि मकर संक्रांति को आत्मशुद्धि और साधना का श्रेष्ठ पर्व माना गया है।

मकर राशि और उसका प्रतीकात्मक अर्थ
  • मकर राशि का स्वामी शनि ग्रह है, जो कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतिनिधि है। 
  • जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब वह व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति जागरूक होने का संदेश देता है। 
  • यह समय आत्मसंयम, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास का होता है। 
  • आध्यात्मिक दृष्टि से यह काल अहंकार त्यागकर कर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व और प्रभाव
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है।
  • सूर्य का मकर राशि में गोचर प्रशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है।
  • यह गोचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो सेवा, शासन, प्रबंधन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्य करते हैं।
  • सूर्य और शनि का यह संबंध व्यक्ति को कठोर परिश्रम के बाद स्थायी सफलता का संकेत देता है।

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सूर्य उपासना का विशेष समय
  • मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना गया है।
  • इस दिन सूर्य उपासना करने से रोग, दरिद्रता और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है।
  • सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित कर ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने से आत्मबल और आरोग्य में वृद्धि होती है।
मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त 2026
महापुण्य काल

दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:20 बजे तक
इस समय किए गए स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

ब्रह्म मुहूर्त स्नान
सुबह 4:51 बजे से 5:44 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

मकर संक्रांति पर शाही स्नान और पुण्यकाल का समय
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन पुण्य काल में स्नान, ध्यान और दान का विशेष महत्व होता है। पंचांग गणना के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर सूर्य मकर राशि में गोचर कर जाएंगे। ऐसे में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाना सबसे अच्छा रहेगा। 14 जनवरी को पुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस दिन प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में पहला शाही स्नान होगा।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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