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Lohri Festival 2026: लोहड़ी पर लोग क्यों गाते हैं दुल्ला भट्टी से जुड़े गीत, जानें दुल्ला भट्टी की पूरी कहानी

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 13 Jan 2026 07:11 AM IST
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सार

लोहड़ी से जुडी कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। इन लोककथाओं का ज़िक्र लोहड़ी के लोकगीतों में किया जाता है। उन्हीं लोक गीतों में एक नाम दुल्ला भट्टी का भी आता है।

Lohri 2026 Know Dulla Bhatti Lohri Story Significance and Other Important Details in Hindi
लोहड़ी की लख लख बधाइयां 2026 - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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Dulla Bhatti Lohri Story : आज मंगलवार, 13 जनवरी को लोहड़ी का त्योहार है। यह पर्व मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी का त्योहार हर वर्ष मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाई जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से किसानों का त्योहर होता है जिसमें  रबी की फसलें तैयार होती है। इसके अलावा यह पर्व एकता और सामाजिक मेल भाव को बढ़ाने के लिए होता है। लोहड़ी पर शाम के समय परिवार के सदस्यों, दोस्तों और आस-पड़ोस के लोगों के साथ एक जगह पर एकत्रित होकर आग जलाते हैं। परंपरा के मुताबिक आग के पास एकत्रित होकर लोग दुल्ला भट्टी के गीत गाते हैं। ये गीत है - 'सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो। दुल्ला पठी वाला हो, दुल्ले ती विआई हो... ऐसे में कई लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल पैदा होता है कि आखिर दुल्ला भट्टी कौन हैं? जिन्हें लोहड़ी पर गीत द्वारा याद किया जाता है। आइए, जानते हैं इनकी कहानी।
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लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी
एक समय की बात है कि पंजाब में मुगल काल के दौरान वहां की लड़कियों को मुगल शासक और जमींदार उठा ले जाते है। इसी मुगल काल में एक दुल्ला भट्टी नाम का एक डाकू रहता था जो अमीरों का धन लूटकर गरीबों के बीच बांट देता था। साथ ही गरीब लड़कियों का वर की तलाश करके उनका विवाह भी करता है। पंजाब में दो लड़कियां थी जिनका नाम सुंदरी और मुंदरी था जिसे वहां के जमींदारों ने उन्हे उठा लिया था और अपने पास लेकर जाकर गुलाम बना लिया था। तब दुल्ला भट्टी ने इन दोनों ही लड़कियों को मुगल शासकों से छुड़वाया था। दुल्ला भट्टी ने इन दोनों लड़कियों के लिए वर की तलाश करके उनकी शादी करने की योजना बनाई। एक दिन जंगल में आग जलाकर सुंदरी और मुंदरी की शादी ही हिंदू लड़कों से करवाई। जिसमें दुल्ला भट्टी ने कन्या दान किया और दोनों को गृहस्थी का सामान दिया।

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दुल्ला भट्टी की वीरता और दयालुता को लोहड़ी के दिन करते हैं याद
दुल्ला भट्टी की इस वीरता की कहानी पंजाब में प्रचलित हो गई और धीरे-धीरे लोग मकर संक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी की आग पास बैठकर उसकी कहानियां सुनाते। साथ-साथ ही साथ दुल्ला भट्टी के लोकगीत 'सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो। दुल्ला पठी वाला हो, दुल्ले ती विआई हो... गीत गाते हैं। तभी से लोहड़ी के दिन दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाकर एक दूसरे के बीच लोहड़ी की खुशियों का बांटते थे। 

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