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सावन में 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण करने से ज्यादा मिलती है सफलता

Fri, 26 Jul 2019 08:48 AM IST
विनोद शुक्ला सुरेश श्रीमाली, ज्योतिषाचार्य
सुरेश श्रीमाली, ज्योतिषाचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 26 Jul 2019 08:48 AM IST
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sawan 2019 chant these mantra during whole sawan month

अंगूठे से अग्नि, तर्जनी से वायु, मध्यमा से आकाश, अनामिका से पृथ्वी और कनिष्का से जल तत्व का संचार सदैव रहता है। पंचाक्षर में पांच अक्षर भी इन पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। न अग्नि, मः वायु, शि आकाश, वा पृथ्वी और य जल तत्व के प्रतिनिधि हैं। इसलिए आप नमः शिवाय का जाप करते समय सबसे पहले ‘‘न’’ का मन ही मन उच्चारण करें, उस समय अंगूठे पर तर्जनी अंगुलि का प्रेशर डालें, फिर ‘‘मः’’ का उच्चारण करते समय तर्जनी अंगुलि पर अंगूठे का प्रेशर डालें, ‘‘शि’’ के उच्चारण के दौरान अंगूठे का प्रेशर मध्यमा अंगुलि पर, ‘‘वा’’ के उच्चारण के समय अंगूठे से अनामिका पर प्रेशर बनाएं और ‘‘य’’ के उच्चारण के दौरान अंगूठे से कनिष्का अंगुलि पर प्रेशर डालें। 

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फिर ‘‘ॐ’’ का उच्चारण करते हुए हाथ को इस प्रकार पूरा खोल लें। निरंतर ऐसा करते रहने से आपके शरीर में पांच तत्वों के बीच सामन्जस्य बना रहेगा। शरीर का जो भी तत्व असंतुलित है, वह इस प्रकार के प्रेशर से शरीर की शक्ति को पुनः जागृत कर देगा। जब पांचों तत्व शरीर में संतुलित होंगे तो काया निरोगी रहेगी। 
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मानसिक और शारीरिक कोई भी बीमारी तभी होती है जब शरीर में पांच में से किसी तत्व का बैलेंस खराब हो जाता है। हमारे शरीर में आकाश तत्व मस्तिष्क में, अग्नि तत्व कंधे में, वायु तत्व नाभी में, पृथ्वी तत्व घुटनों में और जल तत्व पांवों के नीचले भाग में स्थित हैं। नमःशिवाय के उच्चारण के साथ अंगुलियों पर प्रेशर होने से ये पांचों तत्व सदैव संतुलित रहेंगे। इससे आपकी काया तो निरोगी रहेगी ही साथ ही आपमें पॉजिटिव एनर्जी बनी रहेगी। 

इस कारण आपकी मनोकामनाएं भी स्वतः पूरी होती रहेंगी। आपको सफलता की दिशा मिल जाएगी। आप अपने क्षेत्र में सफलता का परचम फहराएंगे। जरूरी नहीं है कि यह अभ्यास आप पूजा कक्ष में या मंदिर में बैठकर करें। यह अभ्यास आप ऑफिस में खाली समय में, कहीं आते-जाते समय कार या ट्रेन में बैठे हैं तो भी कर सकते हैं। जब समय खाली मिले तब करें। नमःशिवाय का उच्चारण मन ही मन करते जाएं और अंगुलियों पर प्रेशर बनाते रहे। यदि पूरे सावन यह अभ्यास करेंगे तो यह आपकी आदत बन जाएगी। तो इंतजार किस का है, ‘‘शुभस्य शीघ्रम’’ इस सावन माह में इसका प्रयोग प्रारंभ करें और देखें चमत्कार। 

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