फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Yog-Dhyan ›   tips mantra jap vidhi

तब मंत्रों का जप आपको तबाह भी कर सकता है

Sat, 30 Aug 2014 08:37 AM IST
Updated Sat, 30 Aug 2014 08:37 AM IST
विज्ञापन
tips mantra jap vidhi

ईश्वर की पूजा आराधना और जब ध्यान करना हो तो राम, शिव, राधेकृष्ण, भगवते वासदेवाय या नम: शिवाय जैसे नाम अथवा सहज मंत्र ही काफी हैं। किसी और मंत्र, बीज मंत्र या वैदिक मंत्र की महिमा सुन पढ़ कर मनमाने ढंग से जप करने लगना ठीक नहीं है।

विज्ञापन


उनका या तो कोई असर नहीं होता अथवा कई बार उलटा असर भी हो जाता है। मंत्र-तंत्र अनुसंधान केंद्र के निदेशक पं-गोविद शास्त्री का मानना है कि किसी मंत्र का जप, साधन या अनुष्ठान अपने आप करना ही नहीं चाहिए।
विज्ञापन


वैदिक और तांत्रिक मंत्रों का तो कतई नहीं। शास्त्रीजी ने पैंतीस वर्ष से अधिक समय तक इस काम को करने आद और इससे प्राप्त अनुभवों के आधार पर अपने मत को सिद्ध किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पारिवारिक व्यक्तियों के लिए यह मंत्र जपना ठीक नहीं

tips mantra jap vidhi

उनके अनुसार वैदिक ध्वनियों की संख्या 64 है इन ध्वनियों में स्वर व्यंजन और बलाघातों एवं बदलती रहने वाली ध्वनियां और उनके संकेत को बताने वाले स्वर व्यंजन शामिल हैं।

ऐसे स्वर व्यंजनों की संख्या 64 है। अब इनमें से 51 स्वर व्यंजन ही पहचाने जाते हैं। 1965 के बाद इनमें तेजी से कमी आई है। और वे 45 या 47 ही रह गए हैं। बिना योग्य गुरु के बताए किए जाने वाले मंत्रों के लिए सख्ती से मनाही के साथ एक तथ्य का उदाहरण दिया जाता है। उनका कहना है कि प्रणव या ओम का जप तो गृहस्थ साधको को बिलकुल नहीं करना चाहिए।

क्लीव, उभय और अद्वैत बीजमंत्र के रूप में विख्यात इस मंत्र के बारे में अनुभव है कि यह परमात्म चेतना से इतनी तेजी से संबंद्ध करता है कि व्यक्ति दुनियादार बिलकुल नहीं रह जाता।

बीज मंत्रों का जप बिलकुल नहीं

tips mantra jap vidhi

यह अद्वैत मंत्र है इसलिए साधक को भी अकेला कर देता है और संसारी रहने के लिए जिस कौशल और व्यवहार की जरूरत होती है, उन्हें भी अपने प्रभाव में लीन कर लेता या निगल जाता हैं।

अध्ययन अनुसंधान के आधार पर शास्त्रीजी ने उदाहरणों सहित बताया है कि मनुष्य के स्वर तंत्र ऐसे नहीं रह गए कि वे 64 या 51 वर्णों से बने मंत्रों का सही सही उच्चारण कर सकें।

मानस जप में भले ही स्वरतंत्रों की स्फुट उपयोग न होता हो लेकिन उनकी मूक भूमिका तो रहती ही हैं। इसलिए योग्य गुरु के बताए बिना किसी मंत्र का जप नहीं करना चाहिए। बीज मंत्रों का तो कतई नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed