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Amar Ujala Samwad: व्हीलचेयर से विश्व चैंपियन तक, संघर्ष-जुनून और जीत की मिसाल हैं संग्राम; जानिए उनकी कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Mon, 18 May 2026 07:43 AM IST
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सार
हरियाणा के छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले संग्राम सिंह की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। अमर उजाला के 'संवाद' कार्यक्रम में जब खेल जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी, तब संग्राम सिंह का नाम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
संग्राम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय प्रोफेशनल रेसलिंग और अब मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके संग्राम सिंह 'अमर उजाला संवाद' में शिरकत करेंगे। अमर उजाला समूह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का आयोजन करने जा रहा है। दो दिवसीय इस विशेष आयोजन में 20 से अधिक सत्रों के दौरान 35 से ज्यादा अतिथि प्रदेश के विकास, मनोरंजन, अध्यात्म, खेल, राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई अहम विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। यह आयोजन 18 और 19 मई को राजधानी स्थित द सेंट्रम होटल में सुबह नौ बजे से शुरू होगा।
'अमर उजाला संवाद' के मंच पर संग्राम सिंह भी नजर आएंगे। इस खास बातचीत के दौरान उनके जीवन और करियर से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से सुनने को मिलेंगे। व्हीलचेयर पर जिंदगी शुरू करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल रेसलर और एमएमए फाइटर बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल है। आइए जानते हैं संग्राम सिंह के संघर्ष और सफलता से भरे करियर के बारे में...
'अमर उजाला संवाद' के मंच पर संग्राम सिंह भी नजर आएंगे। इस खास बातचीत के दौरान उनके जीवन और करियर से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से सुनने को मिलेंगे। व्हीलचेयर पर जिंदगी शुरू करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल रेसलर और एमएमए फाइटर बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल है। आइए जानते हैं संग्राम सिंह के संघर्ष और सफलता से भरे करियर के बारे में...
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बचपन में व्हीलचेयर पर रहे, फिर बने विश्वस्तरीय पहलवान
21 जुलाई 1985 को हरियाणा के रोहतक जिले के मदीना गांव में जन्मे संग्राम सिंह का शुरुआती जीवन बेहद कठिन रहा। बचपन में उन्हें रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी हो गई थी, जिसके कारण जीवन के शुरुआती आठ साल उन्होंने व्हीलचेयर पर बिताए। डॉक्टरों ने सामान्य जीवन की उम्मीद तक छोड़ दी थी, लेकिन संग्राम ने हार नहीं मानी। उनके पिता उमेद सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं, जबकि मां रामोदेवी गृहिणी हैं। परिवार के सहयोग और अपने अदम्य साहस के दम पर संग्राम ने बीमारी को मात दी और खेलों की दुनिया में कदम रखा।
दिल्ली पुलिस से शुरू हुआ सफर
संग्राम सिंह ने 1999 में दिल्ली पुलिस के साथ एक खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 2005 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल रेसलिंग की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
दक्षिण अफ्रीका में बना 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर'
साल 2012 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित मुकाबले के बाद वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफेशनल्स (डब्ल्यूडब्ल्यूपी) ने संग्राम सिंह को 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर' के खिताब से सम्मानित किया। उनकी फिटनेस, स्टैमिना और रेसलिंग स्टाइल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद जुलाई 2015 में पोर्ट एलिजाबेथ में हुए 'लास्ट मैन स्टैंडिंग फाइट' में उन्होंने जो ई. लेजेंड को हराकर डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप अपने नाम की। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में बुलाकर उन्हें बधाई दी थी। संग्राम ने 27 मार्च 2016 को दक्षिण अफ्रीका के ही पोर्ट एलिजाबेथ में दक्षिण अफ्रीकी रेसलर अनांजी को हराकर दूसरी बार डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप जीती और खिताब भारत के नाम बरकरार रखा।
21 जुलाई 1985 को हरियाणा के रोहतक जिले के मदीना गांव में जन्मे संग्राम सिंह का शुरुआती जीवन बेहद कठिन रहा। बचपन में उन्हें रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी हो गई थी, जिसके कारण जीवन के शुरुआती आठ साल उन्होंने व्हीलचेयर पर बिताए। डॉक्टरों ने सामान्य जीवन की उम्मीद तक छोड़ दी थी, लेकिन संग्राम ने हार नहीं मानी। उनके पिता उमेद सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं, जबकि मां रामोदेवी गृहिणी हैं। परिवार के सहयोग और अपने अदम्य साहस के दम पर संग्राम ने बीमारी को मात दी और खेलों की दुनिया में कदम रखा।
दिल्ली पुलिस से शुरू हुआ सफर
संग्राम सिंह ने 1999 में दिल्ली पुलिस के साथ एक खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 2005 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल रेसलिंग की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
दक्षिण अफ्रीका में बना 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर'
साल 2012 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित मुकाबले के बाद वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफेशनल्स (डब्ल्यूडब्ल्यूपी) ने संग्राम सिंह को 'वर्ल्ड्स बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर' के खिताब से सम्मानित किया। उनकी फिटनेस, स्टैमिना और रेसलिंग स्टाइल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद जुलाई 2015 में पोर्ट एलिजाबेथ में हुए 'लास्ट मैन स्टैंडिंग फाइट' में उन्होंने जो ई. लेजेंड को हराकर डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप अपने नाम की। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में बुलाकर उन्हें बधाई दी थी। संग्राम ने 27 मार्च 2016 को दक्षिण अफ्रीका के ही पोर्ट एलिजाबेथ में दक्षिण अफ्रीकी रेसलर अनांजी को हराकर दूसरी बार डब्ल्यूडब्ल्यूपी कॉमनवेल्थ हेवीवेट चैंपियनशिप जीती और खिताब भारत के नाम बरकरार रखा।
छह साल बाद दमदार वापसी
करीब छह साल के अंतराल के बाद संग्राम सिंह ने 2024 में दुबई प्रो इंटरनेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में वापसी की। यहां उन्होंने पाकिस्तान के मोहम्मद सईद को हराकर शानदार जीत दर्ज की।
40 की उम्र में एमएमए में एंट्री, रचा इतिहास
संग्राम सिंह ने अक्तूबर 2024 में जॉर्जिया के त्बिलिसी में गामा इंटरनेशनल फाइटिंग चैंपियनशिप के जरिए एमएमए में पदार्पण किया। उन्होंने पाकिस्तान के अली रजा नासिर को सिर्फ 90 सेकंड में हराकर सनसनी फैला दी। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भारतीय खेल इतिहास का अहम पड़ाव बताया गया, क्योंकि संग्राम सफलतापूर्वक एमएमए में जीत दर्ज करने वाले पहले भारतीय पुरुष रेसलर बने।
40 वर्ष की उम्र में एमएमए करियर शुरू करना अपने आप में असाधारण माना गया। इसके बाद नवंबर 2025 में एम्स्टर्डम, नीदरलैंड्स में आयोजित लेवल्स फाइट लीग में उन्होंने ट्यूनीशिया के हकीम ट्राबेल्सी को हराया। इस जीत के साथ वह इस लीग में उतरने और जीत दर्ज करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। अप्रैल 2026 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुए मुकाबले में संग्राम सिंह ने फ्रांस के फ्लोरियन कूडियर को 1 मिनट 45 सेकंड में हराया। यह उनकी लगातार तीसरी एमएमए जीत रही। इस जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि संग्राम योग और प्राणायाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रहे हैं।
करीब छह साल के अंतराल के बाद संग्राम सिंह ने 2024 में दुबई प्रो इंटरनेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में वापसी की। यहां उन्होंने पाकिस्तान के मोहम्मद सईद को हराकर शानदार जीत दर्ज की।
40 की उम्र में एमएमए में एंट्री, रचा इतिहास
संग्राम सिंह ने अक्तूबर 2024 में जॉर्जिया के त्बिलिसी में गामा इंटरनेशनल फाइटिंग चैंपियनशिप के जरिए एमएमए में पदार्पण किया। उन्होंने पाकिस्तान के अली रजा नासिर को सिर्फ 90 सेकंड में हराकर सनसनी फैला दी। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे भारतीय खेल इतिहास का अहम पड़ाव बताया गया, क्योंकि संग्राम सफलतापूर्वक एमएमए में जीत दर्ज करने वाले पहले भारतीय पुरुष रेसलर बने।
40 वर्ष की उम्र में एमएमए करियर शुरू करना अपने आप में असाधारण माना गया। इसके बाद नवंबर 2025 में एम्स्टर्डम, नीदरलैंड्स में आयोजित लेवल्स फाइट लीग में उन्होंने ट्यूनीशिया के हकीम ट्राबेल्सी को हराया। इस जीत के साथ वह इस लीग में उतरने और जीत दर्ज करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। अप्रैल 2026 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुए मुकाबले में संग्राम सिंह ने फ्रांस के फ्लोरियन कूडियर को 1 मिनट 45 सेकंड में हराया। यह उनकी लगातार तीसरी एमएमए जीत रही। इस जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि संग्राम योग और प्राणायाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रहे हैं।
खेल के साथ समाज सेवा में भी सक्रिय
संग्राम सिंह सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक वक्ता और समाजसेवी भी हैं। वह स्कूलों, कॉलेजों और कॉरपोरेट कार्यक्रमों में युवाओं को प्रेरित करते रहते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पहलवानों को भी उन्होंने मोटिवेशनल स्पीच दी थी। उन्होंने हरियाणा में मतदान जागरूकता अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई। दिसंबर 2015 में उन्होंने मुंबई में 'चैंपियंस प्रो कुश्ती लीग' की घोषणा की थी। फरवरी 2016 में चंडीगढ़ में खेले गए उनके पहले अंतरराष्ट्रीय मैच की आय कैंसर मरीजों के लिए समर्पित की गई थी।
संग्राम सिंह ने हरियाणा के 16 लड़कियों और सात लड़कों की शिक्षा का जिम्मा भी उठाया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के सतारा में एक स्कूल को भी गोद लिया है। वर्ष 2017 में उनकी संस्था 'संग्राम सिंह फाउंडेशन' ने नई दिल्ली में देश के उन पहलवानों को सम्मानित किया, जिन्होंने वर्षों तक भारत के लिए पदक जीते लेकिन चर्चा से दूर रहे।
मनोरंजन जगत में भी बनाई पहचान
संग्राम सिंह ने खेल के अलावा मनोरंजन जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वर्ष 2018 में निर्देशक महेश भट्ट ने उनके साथ पहला म्यूजिक वीडियो प्रस्तुत किया। वह अभिनेत्री रवीना टंडन के शो 'सिम्पली बातें' में भी नजर आए, जहां उन्होंने अपनी फिटनेस और संघर्ष की कहानी साझा की। इसके अलावा ऋतिक रोशन और डिस्कवरी इंडिया के शो 'एचआरएक्स हीरोज' में उनकी जिंदगी की कहानी दिखाई गई, जिसमें व्हीलचेयर से अंतरराष्ट्रीय पहलवान बनने तक का सफर दिखाया गया। संग्राम सिंह फैशन जगत में भी सक्रिय रहे हैं और फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया के मंच पर कई डिजाइनरों के लिए रैंप वॉक कर चुके हैं।
संग्राम सिंह सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक वक्ता और समाजसेवी भी हैं। वह स्कूलों, कॉलेजों और कॉरपोरेट कार्यक्रमों में युवाओं को प्रेरित करते रहते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पहलवानों को भी उन्होंने मोटिवेशनल स्पीच दी थी। उन्होंने हरियाणा में मतदान जागरूकता अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई। दिसंबर 2015 में उन्होंने मुंबई में 'चैंपियंस प्रो कुश्ती लीग' की घोषणा की थी। फरवरी 2016 में चंडीगढ़ में खेले गए उनके पहले अंतरराष्ट्रीय मैच की आय कैंसर मरीजों के लिए समर्पित की गई थी।
संग्राम सिंह ने हरियाणा के 16 लड़कियों और सात लड़कों की शिक्षा का जिम्मा भी उठाया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के सतारा में एक स्कूल को भी गोद लिया है। वर्ष 2017 में उनकी संस्था 'संग्राम सिंह फाउंडेशन' ने नई दिल्ली में देश के उन पहलवानों को सम्मानित किया, जिन्होंने वर्षों तक भारत के लिए पदक जीते लेकिन चर्चा से दूर रहे।
मनोरंजन जगत में भी बनाई पहचान
संग्राम सिंह ने खेल के अलावा मनोरंजन जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वर्ष 2018 में निर्देशक महेश भट्ट ने उनके साथ पहला म्यूजिक वीडियो प्रस्तुत किया। वह अभिनेत्री रवीना टंडन के शो 'सिम्पली बातें' में भी नजर आए, जहां उन्होंने अपनी फिटनेस और संघर्ष की कहानी साझा की। इसके अलावा ऋतिक रोशन और डिस्कवरी इंडिया के शो 'एचआरएक्स हीरोज' में उनकी जिंदगी की कहानी दिखाई गई, जिसमें व्हीलचेयर से अंतरराष्ट्रीय पहलवान बनने तक का सफर दिखाया गया। संग्राम सिंह फैशन जगत में भी सक्रिय रहे हैं और फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया के मंच पर कई डिजाइनरों के लिए रैंप वॉक कर चुके हैं।