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Amar Ujala Samwad: संघर्ष के दंगल से सफलता की ऊंचाई तक पहुंचे विनोद कुमार, ध्यानचंद अवॉर्ड विजेता कोच की कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sun, 17 May 2026 03:32 PM IST
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सार
'अमर उजाला संवाद' में विनोद कुमार भारतीय कुश्ती के वर्तमान हालात, खिलाड़ियों की चुनौतियों, फिटनेस, ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। खेल प्रेमियों के लिए उनका सत्र खास आकर्षण का केंद्र रहने वाला है।
विनोद कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला समूह की ओर से आयोजित किए जा रहे 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' कार्यक्रम में खेल जगत की कई दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी। इसी क्रम में भारतीय कुश्ती के अनुभवी कोच, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार भी 'अमर उजाला संवाद' के मंच पर नजर आएंगे। दो दिवसीय इस विशेष आयोजन में 20 से अधिक सत्र आयोजित होंगे, जिनमें 35 से ज्यादा अतिथि प्रदेश के विकास, मनोरंजन, अध्यात्म, खेल, राजनीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। यह आयोजन 18 और 19 मई को द सेंट्रम होटल में सुबह 9 बजे से शुरू होगा। इस खास सत्र में विनोद कुमार भारतीय कुश्ती के बदलते दौर, खिलाड़ियों की तैयारी, अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के अनुभव और अपने लंबे खेल जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक किस्से साझा करेंगे।
भारतीय कुश्ती के अनुभवी मार्गदर्शक
विनोद कुमार भारतीय कुश्ती जगत का एक बड़ा और सम्मानित नाम हैं। उन्होंने न सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में देश का नाम रोशन किया, बल्कि कोच के तौर पर भी भारतीय पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं। नवंबर 2010 से अप्रैल 2015 तक उन्होंने भारतीय टीम का नेतृत्व किया और इस दौरान कई पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
विनोद कुमार भारतीय कुश्ती जगत का एक बड़ा और सम्मानित नाम हैं। उन्होंने न सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में देश का नाम रोशन किया, बल्कि कोच के तौर पर भी भारतीय पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं। नवंबर 2010 से अप्रैल 2015 तक उन्होंने भारतीय टीम का नेतृत्व किया और इस दौरान कई पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
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ओलंपियन से लेकर विश्व चैंपियन तक का सफर
विनोद कुमार का खेल करियर भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 1988 सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इससे पहले वर्ष 1981 में अमेरिका में आयोजित प्रतियोगिता में विश्व चैंपियन बनकर उन्होंने भारतीय कुश्ती को नई पहचान दिलाई। इसके अलावा 1985 में स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में भी उन्होंने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। एक खिलाड़ी के रूप में उनकी उपलब्धियां आज भी युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं।
कोच के रूप में गढ़े कई सितारे
भारतीय टीम के मुख्य कोच रहते हुए विनोद कुमार ने कई युवा पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया। उनके मार्गदर्शन में भारतीय खिलाड़ियों ने कैडेट और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कर्नाटक स्पोर्ट्स अथॉरिटी में भी प्रशिक्षक के रूप में काम किया और मेलबर्न नेशनल रेसलिंग अकादमी से भी जुड़े रहे। युवा खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर उनका विशेष फोकस रहा है।
ध्यानचंद पुरस्कार से हुए सम्मानित
भारतीय खेलों में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2012 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान खेलों में आजीवन योगदान देने वाले खिलाड़ियों और कोचों को दिया जाता है। वर्ष 2015 में उनका नाम उस समय भी चर्चा में आया, जब उन्होंने द्रोणाचार्य पुरस्कार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
कुश्ती पर खुलकर रखेंगे अपनी बात
'अमर उजाला संवाद' में विनोद कुमार भारतीय कुश्ती के वर्तमान हालात, खिलाड़ियों की चुनौतियों, फिटनेस, ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। खेल प्रेमियों के लिए उनका सत्र खास आकर्षण का केंद्र रहने वाला है।
विनोद कुमार का खेल करियर भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 1988 सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इससे पहले वर्ष 1981 में अमेरिका में आयोजित प्रतियोगिता में विश्व चैंपियन बनकर उन्होंने भारतीय कुश्ती को नई पहचान दिलाई। इसके अलावा 1985 में स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में भी उन्होंने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। एक खिलाड़ी के रूप में उनकी उपलब्धियां आज भी युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं।
कोच के रूप में गढ़े कई सितारे
भारतीय टीम के मुख्य कोच रहते हुए विनोद कुमार ने कई युवा पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया। उनके मार्गदर्शन में भारतीय खिलाड़ियों ने कैडेट और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कर्नाटक स्पोर्ट्स अथॉरिटी में भी प्रशिक्षक के रूप में काम किया और मेलबर्न नेशनल रेसलिंग अकादमी से भी जुड़े रहे। युवा खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर उनका विशेष फोकस रहा है।
ध्यानचंद पुरस्कार से हुए सम्मानित
भारतीय खेलों में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2012 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान खेलों में आजीवन योगदान देने वाले खिलाड़ियों और कोचों को दिया जाता है। वर्ष 2015 में उनका नाम उस समय भी चर्चा में आया, जब उन्होंने द्रोणाचार्य पुरस्कार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
कुश्ती पर खुलकर रखेंगे अपनी बात
'अमर उजाला संवाद' में विनोद कुमार भारतीय कुश्ती के वर्तमान हालात, खिलाड़ियों की चुनौतियों, फिटनेस, ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। खेल प्रेमियों के लिए उनका सत्र खास आकर्षण का केंद्र रहने वाला है।