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Hindi News ›   Sports ›   Commonwealth Games 2026: Indian Boxer Jaismine Lamboria Won Gold at CWG Know struggle and comeback story

CWG 2026: गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थीं मुक्केबाज जैस्मिन, वापसी कर ग्लास्गो में जीता स्वर्ण पदक

Sat, 01 Aug 2026 07:54 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Sat, 01 Aug 2026 07:54 PM IST
सार

भारतीय महिला मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। जैस्मिन के लिए ग्लास्गो में पोडियम पर शीर्ष तक पहुंचना आसान नहीं था। जैस्मिन इन खेलों से पहले बीमार थीं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

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Commonwealth Games 2026: Indian Boxer Jaismine Lamboria Won Gold at CWG Know struggle and comeback story
जैस्मिन लंबोरिया - फोटो : BAI Media

विस्तार

ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली विश्व चैंपियन जैस्मिन लंबोरिया के लिए यह सफलता आसान नहीं थी क्योंकि ग्लास्गो में रिंग में उतरने से कुछ सप्ताह पहले तक वह गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थीं और उनके खेलों में भाग लेने पर भी संशय बना हुआ था। भिवानी की 24 वर्षीय मुक्केबाज ने शनिवार को शानदार वापसी करते हुए उत्तरी आयरलैंड की गत चैंपियन माइकेला वॉल्श को हराकर महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया।
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बर्मिंघम में जीता था कांस्य
जैस्मिन इसके साथ ही चार वर्ष पहले बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में जीते कांस्य पदक के प्रदर्शन को स्वर्ण में बदल दिया। जैस्मिन रिंग में उतरने के बाद दर्शकों को एक मजबूत दावेदार के रूप में नजर आईं, लेकिन इसके पीछे बीते कुछ महीनों का कठिन संघर्ष छिपा था। उनकी मुश्किलें मार्च में एशियाई चैंपियनशिप के दौरान शुरू हुईं, जब तेज बुखार के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता से हटने से इनकार कर दिया। लगातार तीन कठिन मुकाबले जीतकर वह फाइनल में पहुंचीं, जहां रजत पदक जीतने के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सीधे क्वालिफाई किया। 
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मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा था असर
एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में उनके सिर पर जोरदार चोट लगी, जिससे उन्हें कनकशन हो गया। डॉक्टरों ने उनका तत्काल स्कैन किया लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। भारत लौटने के बाद फिर से बीमार पड़ने से उनकी परेशानियां खत्म नहीं हुईं। बीमारी के कारण वह जून में चेक गणराज्य में आयोजित भारत के एक्सपोजर कैंप (विदेश में आयोजित अभ्यास शिविर) में हिस्सा नहीं ले सकीं, जिससे राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। 57 किग्रा वर्ग एशियाई खेलों के कार्यक्रम में शामिल नहीं है, इसलिए यही प्रतियोगिता उनके लिए वर्ष की सबसे बड़ी चुनौती थी। लंबे समय तक खेल से दूर रहने का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा।
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तैयारियों के लिए मिला एक महीने से भी कम समय
जैस्मिन एक जुलाई से ही दोबारा नियमित प्रशिक्षण शुरू कर सकीं। ऐसे में उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए एक महीने से भी कम समय मिला। महीनों की बीमारी, अधूरी तैयारियों और तमाम चुनौतियों के बीच ग्लास्गो में जीता गया यह स्वर्ण पदक जैस्मिन के लिए किसी भी अन्य खिताब से कहीं अधिक मायने रखता है।
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