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क्या VAR ने जर्मनी से छीन ली जीत: पराग्वे के खिलाफ विवादित फैसले पर क्यों मचा बवाल? फुटबॉल के दिग्गज क्या बोले
Tue, 30 Jun 2026 12:50 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ह्यू्स्टन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ह्यू्स्टन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:50 PM IST
सार
जर्मनी-पराग्वे विश्व कप मुकाबले में एक्स्ट्रा टाइम में जोनाथन ताह का गोल VAR ने गोलकीपर पर फाउल मानकर रद्द कर दिया। इसके बाद जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हार गया। युर्गेन क्लॉप, थॉमस मुलर और एलन शियरर ने फैसले की आलोचना की, जबकि नियमों के अनुसार रेफरी के निर्णय को तकनीकी रूप से सही माना गया।
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वी.ए.आर विवाद
- फोटो : Twitter
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया, लेकिन मुकाबले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पराग्वे की जीत से ज्यादा VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) के उस फैसले की हुई, जिसने एक्स्ट्रा टाइम में जर्मनी का संभावित विजयी गोल रद्द कर दिया। जर्मन खिलाड़ियों से लेकर पूर्व दिग्गजों और फुटबॉल विशेषज्ञों तक ने इस फैसले पर सवाल उठाए। आखिर VAR ने किस आधार पर गोल रद्द किया और इसे लेकर इतना विवाद क्यों हुआ? आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
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क्या हुआ था मैच में?
- बोस्टन स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में पराग्वे ने 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो के गोल से बढ़त बनाई।
- दूसरे हाफ में काई हैवर्ट्ज ने शानदार हेडर के जरिए जर्मनी को 1-1 की बराबरी दिला दी।
- 90 मिनट तक कोई और गोल नहीं हुआ और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया।
- यहीं वह पल आया जिसने पूरे मैच की कहानी बदल दी।
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वी.ए.आर ने पलटा मैच
- फोटो : Twitter
जोनाथन ताह ने किया गोल, फिर अचानक बदल गया फैसला
- अतिरिक्त समय में जर्मनी को कॉर्नर मिला। गेंद बॉक्स में आई और डिफेंडर जोनाथन ताह ने शानदार हेडर लगाकर गेंद गोलपोस्ट में पहुंचा दी।
- जर्मन खिलाड़ी और फैंस जीत का जश्न मनाने लगे। लेकिन तभी वी.ए.आर ने रेफरी जलाल जायेद को स्क्रीन पर जाकर घटना की समीक्षा करने का संकेत दिया।
- रीप्ले देखने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया।
On Premier League this would be allowed btw pic.twitter.com/PujwtKVVIn
— Fut Sheriff (@FutSheriff) June 29, 2026
वी.ए.आर ने गोल क्यों रद्द किया?
वी.ए.आर के मुताबिक कॉर्नर से पहले जर्मनी के डिफेंडर वाल्डेमार एंटोन ने पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल को अवैध रूप से ब्लॉक किया था। रेफरी ने माना कि इसी फाउल के कारण गोलकीपर गेंद तक नहीं पहुंच पाए और इसलिए जोनाथन ताह का गोल मान्य नहीं हो सकता। फुटबॉल के नियमों के मुताबिक यदि अटैक करने वाली टीम का खिलाड़ी गोलकीपर को अवैध तरीके से रोकता है और उसका सीधा असर खेल पर पड़ता है, तो गोल रद्द किया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर वी.ए.आर ने हस्तक्षेप किया।
वी.ए.आर के मुताबिक कॉर्नर से पहले जर्मनी के डिफेंडर वाल्डेमार एंटोन ने पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल को अवैध रूप से ब्लॉक किया था। रेफरी ने माना कि इसी फाउल के कारण गोलकीपर गेंद तक नहीं पहुंच पाए और इसलिए जोनाथन ताह का गोल मान्य नहीं हो सकता। फुटबॉल के नियमों के मुताबिक यदि अटैक करने वाली टीम का खिलाड़ी गोलकीपर को अवैध तरीके से रोकता है और उसका सीधा असर खेल पर पड़ता है, तो गोल रद्द किया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर वी.ए.आर ने हस्तक्षेप किया।
क्यों मचा इतना बड़ा विवाद?
विवाद इसलिए हुआ क्योंकि कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि संपर्क बेहद मामूली था। पेनल्टी बॉक्स में कॉर्नर के दौरान खिलाड़ियों के बीच हल्का धक्का-मुक्की होना सामान्य बात मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठे कि क्या इतने हल्के संपर्क के लिए विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में गोल रद्द किया जाना चाहिए था।
विवाद इसलिए हुआ क्योंकि कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों का मानना है कि संपर्क बेहद मामूली था। पेनल्टी बॉक्स में कॉर्नर के दौरान खिलाड़ियों के बीच हल्का धक्का-मुक्की होना सामान्य बात मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठे कि क्या इतने हल्के संपर्क के लिए विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में गोल रद्द किया जाना चाहिए था।
germany goal was disallowed for this 😭😭 pic.twitter.com/oyJ1swovmn
— Taxx (@taxxfcb) June 29, 2026
एलन शियरर ने फैसले को बताया गलत
- इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलन शियरर ने बीबीसी पर कमेंट्री करते हुए कहा कि यह फाउल नहीं था। उनके मुताबिक गोलकीपर बेहद आसानी से गिर गए।
- शियरर ने कहा कि छह गज के बॉक्स में 13 खिलाड़ी मौजूद थे और इतने हल्के संपर्क को फाउल नहीं कहा जा सकता।
- उनके अनुसार गोलकीपर ने इस संपर्क का फायदा उठाया और रेफरी वी.ए.आर के दबाव में आ गए।
पूर्व रेफरी ने क्या कहा?
- विश्व कप फाइनल में सहायक रेफरी रह चुके डैरेन कैन ने भी माना कि संपर्क बहुत हल्का था।
- हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक फुटबॉल में कई बार रेफरी गोलकीपर की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए ऐसे फैसले दिए जा सकते हैं।
- यानी नियमों के हिसाब से फैसला पूरी तरह असंभव नहीं था, लेकिन इसकी व्याख्या पर बहस जरूर हो सकती है।
क्लॉप ने आर्सेनल का उदाहरण देकर उठाए सवाल
- पूर्व लिवरपूल मैनेजर युर्गेन क्लॉप ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह के फैसले पूरे सीजन दिए जाते, तो आर्सेनल कभी प्रीमियर लीग चैंपियन नहीं बन पाता।
- क्लॉप ने कहा कि आर्सेनल ने अपने कई गोल सेट-पीस से किए थे और यदि हर बार गोलकीपर के आसपास मामूली संपर्क को फाउल माना जाता, तो उन गोलों में से बड़ी संख्या रद्द हो जाती।
- उनके मुताबिक जर्मनी ने गेंद को नेट में पहुंचाकर मैच जीत लिया था, लेकिन वी.ए.आर ने वह पल छीन लिया।
थॉमस मुलर ने कहा- हमारे साथ लूट हुई
- जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी थॉमस मुलर ने भी फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अब समझ नहीं आता वी.ए.आर आखिर देख क्या रहा है।
- मुलर के मुताबिक जोनाथन ताह ने गेंद पर पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हमला किया और शानदार गोल किया था।
- उन्होंने कहा कि जर्मन टीम खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है और यह फैसला फुटबॉल की निरंतरता पर सवाल खड़े करता है।
- मुलर ने यह भी कहा कि खिलाड़ी पूरी जिंदगी विश्व कप में ऐसा पल पाने के लिए मेहनत करता है, लेकिन स्क्रीन के पीछे बैठा कोई व्यक्ति कुछ सेकंड में वह पल छीन लेता है।
फिर पेनल्टी शूटआउट में बिखर गया जर्मनी
गोल रद्द होने के बाद मुकाबला 1-1 से पेनल्टी शूटआउट में पहुंचा। इतिहास में पेनल्टी शूटआउट में मजबूत रिकॉर्ड रखने वाली जर्मन टीम इस बार दबाव नहीं झेल सकी। काई हैवर्ट्ज, निक वोल्टेमाडे और जोनाथन ताह अपनी-अपनी पेनल्टी चूक गए। दूसरी ओर पराग्वे ने भी दो पेनल्टी गंवाईं, लेकिन जोसे कनाले ने निर्णायक किक को गोल में बदलकर टीम को 4-3 से जीत दिला दी।
गोल रद्द होने के बाद मुकाबला 1-1 से पेनल्टी शूटआउट में पहुंचा। इतिहास में पेनल्टी शूटआउट में मजबूत रिकॉर्ड रखने वाली जर्मन टीम इस बार दबाव नहीं झेल सकी। काई हैवर्ट्ज, निक वोल्टेमाडे और जोनाथन ताह अपनी-अपनी पेनल्टी चूक गए। दूसरी ओर पराग्वे ने भी दो पेनल्टी गंवाईं, लेकिन जोसे कनाले ने निर्णायक किक को गोल में बदलकर टीम को 4-3 से जीत दिला दी।
क्या फैसला सही था?
नियमों की किताब के अनुसार यदि गोलकीपर पर फाउल होता है तो VAR गोल रद्द कर सकता है। इसलिए तकनीकी रूप से रेफरी का फैसला नियमों के दायरे में माना जा सकता है। हालांकि असली विवाद इस बात को लेकर है कि क्या वास्तव में इतना संपर्क फाउल कहलाने लायक था। यही कारण है कि फुटबॉल जगत दो हिस्सों में बंट गया है। एक पक्ष इसे नियमों के अनुरूप फैसला मान रहा है, जबकि दूसरा मानता है कि वी.ए.आर ने मैच का परिणाम बदल दिया।
नियमों की किताब के अनुसार यदि गोलकीपर पर फाउल होता है तो VAR गोल रद्द कर सकता है। इसलिए तकनीकी रूप से रेफरी का फैसला नियमों के दायरे में माना जा सकता है। हालांकि असली विवाद इस बात को लेकर है कि क्या वास्तव में इतना संपर्क फाउल कहलाने लायक था। यही कारण है कि फुटबॉल जगत दो हिस्सों में बंट गया है। एक पक्ष इसे नियमों के अनुरूप फैसला मान रहा है, जबकि दूसरा मानता है कि वी.ए.आर ने मैच का परिणाम बदल दिया।