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Durand Cup: शिलांग पहुंची डूरंड कप की ट्रॉफियां, मेघालय से शुरू हुआ 135वें संस्करण का ट्रॉफी रोड शो
Sat, 11 Jul 2026 08:15 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
एन. अर्जुन, शिलांग
एन. अर्जुन, शिलांग
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 11 Jul 2026 08:15 PM IST
सार
डूरंड कप 2026 की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस टूर्नामेंट की ट्रॉफियां शिलांग पहुंच गई हैं। मेघालय के खेल मंत्री वैलाडमिकी शायला ने शनिवार को शिलांग में प्रतिष्ठित डूरंड कप ट्रॉफियों के प्रदर्शन और ट्रॉफी रोड शो को हरी झंडी दिखाई।
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डूरंड कप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेघालय के खेल मंत्री वैलाडमिकी शायला ने शनिवार को शिलांग में प्रतिष्ठित डूरंड कप ट्रॉफियों के प्रदर्शन और ट्रॉफी रोड शो को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर सेना और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डूरंड कप, रोलिंग शिमला ट्रॉफी और राष्ट्रपति कप को लेकर 11 से 14 जुलाई तक शिलांग, जोवाई और तुरा में विशेष रोड शो आयोजित किया जाएगा।
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25 जुलाई से 23 अगस्त तक होगा टूर्नामेंट
शिलांग में यह रोड शो उमशिर्पी ब्रिज, शिलांग पीक और लैतुमखरा जैसे प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगा। इसका उद्देश्य युवाओं को फुटबॉल और खेलों के प्रति प्रेरित करना है। डूरंड कप ट्रॉफी एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट का प्रतीक है, जबकि रोलिंग शिमला ट्रॉफी 1904 में शिमला के निवासियों द्वारा खेल के प्रति अपने प्रेम को सम्मान देने के लिए प्रदान की गई थी। भारतीय ऑयल डूरंड कप 2026 का आयोजन 25 जुलाई से 23 अगस्त तक पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर और झारखंड के पांच राज्यों में किया जाएगा। इस बार गुवाहाटी और रांची पहली बार डूरंड कप के मेजबान शहरों की सूची में शामिल हुए हैं, जबकि कोलकाता, इंफाल और शिलांग पहले से ही टूर्नामेंट के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
शिलांग में यह रोड शो उमशिर्पी ब्रिज, शिलांग पीक और लैतुमखरा जैसे प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगा। इसका उद्देश्य युवाओं को फुटबॉल और खेलों के प्रति प्रेरित करना है। डूरंड कप ट्रॉफी एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट का प्रतीक है, जबकि रोलिंग शिमला ट्रॉफी 1904 में शिमला के निवासियों द्वारा खेल के प्रति अपने प्रेम को सम्मान देने के लिए प्रदान की गई थी। भारतीय ऑयल डूरंड कप 2026 का आयोजन 25 जुलाई से 23 अगस्त तक पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर और झारखंड के पांच राज्यों में किया जाएगा। इस बार गुवाहाटी और रांची पहली बार डूरंड कप के मेजबान शहरों की सूची में शामिल हुए हैं, जबकि कोलकाता, इंफाल और शिलांग पहले से ही टूर्नामेंट के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
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टूर्नामेंट के मुकाबले छह स्टेडियमों में खेले जाएंगे। इनमें कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन और किशोर भारती क्रीड़ांगन, इंफाल का खुमान लम्पाक स्टेडियम, रांची का मोराबादी स्टेडियम, शिलांग का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और गुवाहाटी का इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम शामिल हैं। शिलांग चरण की शुरुआत 31 जुलाई को उद्घाटन समारोह और पहले मुकाबले के साथ होगी, जबकि 20 अगस्त को यहां सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। शिलांग में होने वाले पूल-ई मुकाबलों में शिलांग लाजोंग एफसी, नोंगकेसेह एफसी एंड सीसी, लांगस्निंग एफसी और मुंबई एफसी हिस्सा लेंगी।
क्यों खास है डूरंड कप?
1888 में शुरू हुआ डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में शामिल है। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में इसकी विशेष पहचान रही है और इसे देश में पेशेवर फुटबॉल की परंपरा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
1888 में शुरू हुआ डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में शामिल है। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में इसकी विशेष पहचान रही है और इसे देश में पेशेवर फुटबॉल की परंपरा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।