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'मुझे टीम नहीं, जवाब चाहिए': एशियन गेम्स से बाहर होने पर मनिका बत्रा ने उठाए सवाल, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 24 Jun 2026 02:11 PM IST
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सार
एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टेबल टेनिस टीम में जगह नहीं मिलने के बाद स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह टीम में शामिल किए जाने की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि चयन के पीछे की वजह जानना चाहती हैं। मनिका ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि यदि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह कानूनी विकल्प अपनाने पर विचार करेंगी।
मनिका बत्रा
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय टेबल टेनिस की स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा एशियन गेम्स 2026 के लिए घोषित भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद लगातार चर्चा में हैं। चयन को लेकर उठे विवाद के बीच मनिका ने एक बार फिर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी विशेष रियायत या टीम में जबरन जगह की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि केवल यह जानना चाहती हैं कि आखिर उन्हें चयन के योग्य क्यों नहीं माना गया।
मनिका ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और फैसलों में कथित मनमानी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा है कि यदि उन्हें इस फैसले के पीछे की वजह का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो वह कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगी।
'मुझे टीम नहीं, जवाब चाहिए'
मनिका ने अपने बयान में कहा, 'पिछले दो दशकों से मुझे सर्वोच्च स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। अपने पूरे करियर में मैंने जीत, हार, चयन और चयन न होने, सभी परिस्थितियों को स्वीकार किया है। यह खेल का हिस्सा है। लेकिन जिस बात को स्वीकार करना मुश्किल है, वह है पारदर्शिता की कमी और मनमानी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैं चयन की मांग नहीं कर रही हूं और न ही किसी से फैसला बदलने को कह रही हूं। मैं सिर्फ जवाब मांग रही हूं। मुझे यह नहीं बताया गया कि मेरा चयन क्यों नहीं किया गया। यदि मुझे इस फैसले के आधार के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो मेरे पास कानूनी विकल्प अपनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।'
'मुझे टीम नहीं, जवाब चाहिए'
मनिका ने अपने बयान में कहा, 'पिछले दो दशकों से मुझे सर्वोच्च स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। अपने पूरे करियर में मैंने जीत, हार, चयन और चयन न होने, सभी परिस्थितियों को स्वीकार किया है। यह खेल का हिस्सा है। लेकिन जिस बात को स्वीकार करना मुश्किल है, वह है पारदर्शिता की कमी और मनमानी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैं चयन की मांग नहीं कर रही हूं और न ही किसी से फैसला बदलने को कह रही हूं। मैं सिर्फ जवाब मांग रही हूं। मुझे यह नहीं बताया गया कि मेरा चयन क्यों नहीं किया गया। यदि मुझे इस फैसले के आधार के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो मेरे पास कानूनी विकल्प अपनाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।'
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रैंकिंग और फॉर्म को लेकर उठाए सवाल
विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर काबिज मनिका ने पूछा कि आखिर किस आधार पर खिलाड़ियों का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने कहा कि टेबल टेनिस की रैंकिंग हर सप्ताह बदलती रहती है, ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चयन किसी एक सप्ताह, दो महीने, छह महीने या पूरे वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर किया गया।
मनिका का मानना है कि केवल रैंकिंग ही नहीं, बल्कि हालिया प्रदर्शन और मौजूदा फॉर्म को भी चयन का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस सीजन में उन्होंने कई मजबूत एशियाई और चीनी खिलाड़ियों को हराया है, जिसके बावजूद उन्हें टीम से बाहर रखा गया।
विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर काबिज मनिका ने पूछा कि आखिर किस आधार पर खिलाड़ियों का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने कहा कि टेबल टेनिस की रैंकिंग हर सप्ताह बदलती रहती है, ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चयन किसी एक सप्ताह, दो महीने, छह महीने या पूरे वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर किया गया।
मनिका का मानना है कि केवल रैंकिंग ही नहीं, बल्कि हालिया प्रदर्शन और मौजूदा फॉर्म को भी चयन का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस सीजन में उन्होंने कई मजबूत एशियाई और चीनी खिलाड़ियों को हराया है, जिसके बावजूद उन्हें टीम से बाहर रखा गया।
वोटिंग आधारित चयन पर भी जताई चिंता
मनिका ने उन रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए, जिनमें दावा किया गया था कि अंतिम चयन वोटिंग के जरिए किया गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि किसने और किन कारणों से फैसला लिया।
उन्होंने कहा, 'अगर मेरे खिलाफ वोटिंग हुई है तो उसके पीछे क्या कारण थे? क्या फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया था या व्यक्तिगत राय के आधार पर? इन सवालों के जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए।'
मनिका ने उन रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए, जिनमें दावा किया गया था कि अंतिम चयन वोटिंग के जरिए किया गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि किसने और किन कारणों से फैसला लिया।
उन्होंने कहा, 'अगर मेरे खिलाफ वोटिंग हुई है तो उसके पीछे क्या कारण थे? क्या फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया था या व्यक्तिगत राय के आधार पर? इन सवालों के जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए।'
पदक विजेताओं को भी मिलना चाहिए सम्मान
मनिका ने हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत के लिए ऐतिहासिक महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे खिलाड़ियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि चयन संबंधी फैसले किन आधारों पर लिए गए।
सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरी व्यवस्था के लिए उठाई आवाज
मनिका ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ अपने चयन को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि वह भारतीय खेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रही हैं ताकि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी को ऐसे सवालों से न गुजरना पड़े।
करीब 20 वर्षों से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं मनिका बत्रा का मानना है कि खिलाड़ियों को फैसले स्वीकार करने में कोई परेशानी नहीं होती, बशर्ते उन्हें फैसलों के पीछे की वजह स्पष्ट रूप से बताई जाए। अब सभी की नजरें चयनकर्ताओं और खेल प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
मनिका ने हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत के लिए ऐतिहासिक महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे खिलाड़ियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि चयन संबंधी फैसले किन आधारों पर लिए गए।
सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरी व्यवस्था के लिए उठाई आवाज
मनिका ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ अपने चयन को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि वह भारतीय खेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रही हैं ताकि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी को ऐसे सवालों से न गुजरना पड़े।
करीब 20 वर्षों से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं मनिका बत्रा का मानना है कि खिलाड़ियों को फैसले स्वीकार करने में कोई परेशानी नहीं होती, बशर्ते उन्हें फैसलों के पीछे की वजह स्पष्ट रूप से बताई जाए। अब सभी की नजरें चयनकर्ताओं और खेल प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।