Neeraj Chopra CWG 2026 Live: नीरज का पहला प्रयास 76.28 मीटर का रहा, अरशद नदीम ने 78.63 मीटर दूर फेंका भाला
Commonwealth Games javelin Throw Live: नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में आज नीरज चोपड़ा अपने अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। वह भालाफेंक के क्वालिफिकेशन मुकाबले में उतर रहे हैं। उनके अलावा दो और भारतीय इस इवेंट में हैं. इनमें रोहित यादव और यशवीर शामिल हैं।
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क्या है फाइनल के लिए क्वालिफाई करने की प्रतिक्रिया
नीरज के अलावा क्वालिफिकेशन मुकाबले में भारत के रोहित यादव और यशवीर भी उतरे हैं। क्वालिफिकेशन राउंड से 12 बेस्ट थ्रो वाले खिलाड़ी फाइनल्स में जाएंगे। फाइनल्स के लिए क्वालिफिकेशन मार्क 84 मीटर का है। इसको पार कर लेने पर ऑटमैटिक क्वालिफिकेशन है। अगर सभी 84 मीटर पार नहीं कर पाते हैं तो 12 बेस्ट थ्रो वाले खिलाड़ी फाइनल में पहुंचेंगे। फाइनल कल खेला जाएगा। ऐसे में जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा। क्वालिफिकेशन में तीन अटैम्प्टस मिलेंगे।
किसने कितना थ्रो किया?
- दक्षिण अफ्रीका के डू स्मिट ने पहले अटैम्प्ट में 80.64 मीटर का थ्रो किया।
- पाकिस्तान के अरशद नदीम ने पहले अटैम्प्ट में 78.63 मीटर का थ्रो किया।
- त्रिनिदाद एंड टोबैगो के केशोर्न वालकॉट ने पहले अटैम्प्ट में 78.26 मीटर का थ्रो किया।
- केन्या के जूलियस येगो ने पहले अटैम्प्ट में 72.24 मीटर का थ्रो किया।
- श्रीलंका के रुमेश थरंगा ने पहले अटैम्प्ट में 82.24 मीटर का थ्रो किया।
- भारत के यशवीर सिंह ने पहले अटैम्प्ट में 73.89 मीटर का थ्रो किया।
- भारत के रोहित यादव ने पहले अटैम्प्ट में 77.04 मीटर का थ्रो किया।
- ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने पहले अटैम्प्ट में 76.09 मीटर का थ्रो किया।
- नीरज चोपड़ा के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स हमेशा खास रहे हैं। 2018 के गोल्ड कोस्ट खेलों में उन्होंने 86.47 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष भाला फेंक का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।
- उस जीत के बाद नीरज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चार महीने बाद एशियाई खेलों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड (88.06 मीटर) के साथ स्वर्ण जीता। फिर टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण, विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक का रजत पदक जीतकर वह भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारे बन गए।
- बता दें कि 2018 के बाद यह नीरज का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है। वह चोट के कारण 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब जब वह आठ साल बाद इसमें वापसी कर रहे हैं तो स्वर्ण के अपनी यादों को ताजा करने का वक्त होगा।
चोट ने बदला नजरिया, अब डर नहीं आत्मविश्वास है
- पिछला एक साल नीरज के लिए आसान नहीं रहा। पीठ की लगातार परेशानी के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप उनके करियर की सबसे निराशाजनक प्रतियोगिताओं में से एक रही।
- इसके बाद उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए अपने खेल की बुनियाद पर दोबारा काम किया। रन-अप, थ्रो का एंगल और तकनीक को निखारने पर पूरा फोकस किया। सबसे बड़ा बदलाव मानसिक रूप से आया। अब वह चोट के डर के साथ नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरते हैं।
- बीबीसी के पॉडकास्ट 'मोर दैन द स्कोर' में नीरज ने बताया कि दोहा डायमंड लीग में खेलने का फैसला उन्होंने महज सात दिन पहले लिया था। उनका लक्ष्य सिर्फ ग्लास्गो के लिए क्वालिफाई करना था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब वह हर अभ्यास सत्र में खुद को पूरी तरह नहीं झोंकते, बल्कि जरूरत के मुताबिक ही शरीर पर दबाव डालते हैं।
ग्लास्गो में गुरुवार का मुकाबला ज्यादातर खिलाड़ियों के लिए फाइनल में जगह बनाने की चुनौती है, लेकिन नीरज चोपड़ा के लिए यह उससे कहीं बढ़कर है। यह किसी मजबूरी में की जा रही वापसी नहीं, बल्कि चोट, आलोचना और असफलताओं से सीख लेकर खुद को नए सिरे से गढ़ने वाले एक चैंपियन की कहानी का अगला अध्याय है। अगर उनका भाला फिर उसी अंदाज में उड़ता है, तो यह सिर्फ एक और जीत नहीं, बल्कि यह संदेश भी होगा कि भारत का गोल्डन बॉय फिर अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में लौट आया है।