Hong Kong: हांगकांग जा रहे हैं? फोन-लैपटॉप साथ है तो रहें सावधान, बिना वारंट पासवर्ड मांग सकती है पुलिस
Hong Kong Password Law: क्या आप हांगकांग की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं? अगर हां तो सफर पर निकलने से पहले आपको वहां के नए टेक और प्राइवेसी नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। हांगकांग के नए 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' के तहत अब पुलिस बिना किसी कोर्ट ऑर्डर के आपके स्मार्टफोन और लैपटॉप का पासवर्ड मांग सकती है। जानकारी न देने या डिवाइस का एक्सेस देने से मना करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। जानिए यात्रियों की डिजिटल प्राइवेसी से जुड़ा यह नया और सख्त नियम क्या है।
विस्तार
अगर आप हांगकांग जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सफर पर निकलने से पहले आपको वहां के एक नए और जरूरी नियम के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। हांगकांग के अधिकारियों को अब कुछ खास परिस्थितियों में आपके स्मार्टफोन, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का पासवर्ड मांगने का अधिकार मिल गया है। यह नया बदलाव हांगकांग के 'नेशनल सिक्योरिटी कानून' (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत किया गया है, जो 2020 से लागू है और जिसमें समय-समय पर कई बदलाव किए गए हैं।
क्या कहता है यह नया नियम?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हांगकांग पुलिस को अब ऐसी शक्ति मिल गई है कि वे जांच के घेरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का पूरा एक्सेस मांग सकते हैं। इसके तहत अब आपके लिए डिवाइस का पासवर्ड शेयर करना, पैटर्न खोलना या फोन और लैपटॉप का लॉक अनलॉक करने में पुलिस की मदद करना अनिवार्य होगा। इस नियम की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब अधिकारियों को ऐसा करने के लिए किसी भी कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं होगी। यानी अगर किसी व्यक्ति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तोड़ने का जरा भी शक होता है, तो पुलिस मौके पर ही उसके डिवाइस और डेटा तक पहुंच की मांग कर सकती है।
पासवर्ड देने से मना किया तो क्या होगा?
नियमों में यह साफ कर दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति पुलिस के इन निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। साधारण तौर पर पासवर्ड न बताने या सहयोग न करने पर एक साल तक की जेल और करीब 12.1 लाख रुपये (1 लाख हांगकांग डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन, अगर कोई व्यक्ति जांच के दौरान गलत पासवर्ड देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता है तो सजा और भी सख्त हो जाती है। ऐसे मामलों में जुर्माना बढ़कर करीब 60.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है और अपराधी को 3 साल तक की जेल हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि ये कड़े प्रावधान जांच के दायरे में आने वाले हर व्यक्ति पर लागू होते हैं, जिसका सीधा मतलब है कि हांगकांग जाने वाले पर्यटक और विदेशी यात्री भी इसकी जद में आ सकते हैं।
सिर्फ पासवर्ड नहीं, डिवाइस जब्त भी हो सकता है
हांगकांग के अधिकारियों की ताकत अब केवल पासवर्ड मांगने तक ही सीमित नहीं रह गई है। नए नियमों के तहत कस्टम अधिकारियों को भी अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं, जिसका मतलब है कि वे आपके किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को तुरंत जब्त कर सकते हैं। यह कार्रवाई तब की जा सकती है जब अधिकारियों को जरा भी संदेह हो कि आपके डिवाइस का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाली गतिविधियों में किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपकी औपचारिक गिरफ्तारी होना भी जरूरी नहीं है। यानी पुलिस या प्रशासन बिना किसी कानूनी हिरासत के भी आपके डिवाइस को अपने कब्जे में ले सकते हैं।
प्राइवेसी को लेकर उठ रहे हैं सवाल
इस नए नियम ने कानूनी जानकारों और प्राइवेसी राइट्स एक्टिविस्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि बिना कोर्ट की इजाजत के किसी का पर्सनल फोन या लैपटॉप खंगालना लोगों की डिजिटल प्राइवेसी के खिलाफ है। हालांकि, हांगकांग के अधिकारियों ने सफाई दी है कि ये नियम केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों के लिए हैं और इनका मकसद आम यात्रियों या व्यापारियों को परेशान करना नहीं है।
यात्रियों के लिए क्या है सलाह?
अगर आप हांगकांग घूमने या किसी काम से जा रहे हैं, तो इस नए कानून को हल्के में न लें। अगर आपके लैपटॉप या मोबाइल फोन में कोई संवेदनशील जानकारी या डेटा है तो यात्रा से पहले सावधानी बरतना आपके लिए बेहतर होगा।
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