Apps: अब इन्वेस्टमेंट के नाम पर नहीं होगा फ्रॉड, गूगल प्ले स्टोर पर असली एप्स को मिलेगा SEBI 'वेरिफाइड बैज'
Google Play Verified Badge India: ऑनलाइन निवेश में धोखाधड़ी रोकने के लिए गूगल और सेबी ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद असली ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट एप्स पर एक खास 'वेरिफाइड बैज' दिखाई देगा। आइए समझते हैं कि यह बैज किसे मिलेगा, फ्रॉड रोकने के लिए क्या नए नियम बने हैं और इससे आम निवेशकों का पैसा कैसे सुरक्षित रहेगा।
विस्तार
अगर आप भी शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए मोबाइल एप्स का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए एक बहुत अच्छी और राहत देने वाली खबर है। ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए गूगल ने भारत में एक बड़ा कदम उठाया है। अब गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग एप्स पर एक खास 'वेरिफाइड बैज' दिखाई देगा। सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) और गूगल ने मिलकर यह नई पहल शुरू की है ताकि आम निवेशकों को फर्जी एप्स और ऑनलाइन स्कैम से बचाया जा सके। इस फैसले से यूजर्स के लिए असली और फर्जी एप्स के बीच फर्क करना काफी आसान हो जाएगा। इस लेख में हम आपको इस अपडेट से जुड़ी सभी अहम बातें बताने वाले हैं:
1. यह कदम क्यों उठाया गया?
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पिछले कुछ समय में भारत में ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया पर कई फर्जी एप्स और बिना लाइसेंस वाले फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स लोगों को ज्यादा रिटर्न का लालच देकर उनके पैसे फंसा लेते हैं। इसी समस्या को देखते हुए सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे का कहना है कि इस नए बैज के आने से जालसाजों के लिए असली इन्वेस्टमेंट एप्स की नकल करना और आम लोगों को धोखा देना अब बहुत मुश्किल हो जाएगा।
2. यह बैज क्यों है जरूरी?
आजकल कई ऐसे फर्जी ट्रेडिंग एप्स आ गए हैं जो बिल्कुल असली एप्स जैसे दिखते हैं। ये धोखेबाज एप्स भोले-भाले निवेशकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनका पैसा शेयर बाजार में लग रहा है, लेकिन असल में वे ठगी का शिकार हो रहे होते हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बताया कि इस वेरिफाइड बैज का मुख्य उद्देश्य यूजर्स को असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पहचानने में मदद करना और उन्हें स्कैम से बचाना है।
1. किसे मिलेगा यह 'वेरिफाइड बैज'?
आपको बता दें कि यह वेरिफाइड बैज प्ले स्टोर पर मौजूद हर किसी इन्वेस्टमेंट एप को नहीं दिया जाएगा। भारत के मार्केट रेगुलेटर सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने यह साफ किया है कि यह खास पहचान सिर्फ उन्हीं ब्रोकर्स और कंपनियों के एप्स को मिलेगी, जो सेबी के पास आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड हैं। इस नियम पर काम शुरू भी हो चुका है और गूगल प्ले के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य स्वामी के मुताबिक, भारत में अब तक लगभग 600 वित्तीय सेवाओं वाले एप्स को यह वेरिफाइड लेबल दिया जा चुका है। आने वाले समय में, यह सुविधा शेयर बाजार से जुड़े अन्य मान्यता प्राप्त एप्स के लिए भी शुरू की जाएगी।
4. सेबी का नया मंत्र: 'पहले पहचान करें, फिर निवेश करें!'
निवेशकों को सुरक्षित रखने के लिए सेबी चेयरमैन ने 'CVV' का एक नया फॉर्मूला दिया है। आपको निवेश करने से पहले इन तीन बातों का ध्यान रखना है:
C - Check (चेक करें): सेबी के सारथी एप में मौजूद 'सेबी चेक' फीचर का इस्तेमाल करके बैंक अकाउंट्स की अच्छे से जांच करें।
V - Validate (वैलिडेट करें): उन यूपीआई आईडी हैंडल्स को वैलिडेट करें जिनमें 'वैलिड' शब्द जुड़ा हो। इसे भी आप 'सेबी चेक' के जरिए जांच सकते हैं।
V - Verify (वेरीफाई करें): एप डाउनलोड करने से पहले गूगल प्ले स्टोर पर उस ट्रेडिंग एप का 'वेरिफाइड' बैज जरूर चेक करें।
5. इस कदम पर गूगल और एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
इस नए कदम को लेकर गूगल ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। गूगल प्ले के एमडी (MD) आदित्य स्वामी ने इसे एक बेहतरीन पहल बताते हुए कहा कि निवेशकों की सुरक्षा के साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए, सरकारी संस्था सेबी और निजी कंपनी गूगल के बीच यह अपनी तरह की पहली और अनोखी साझेदारी है।
6. फ्रॉड रोकने के लिए सेबी की अन्य तैयारियां
ऑनलाइन फ्रॉड को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ प्ले स्टोर पर बैज देना ही काफी नहीं है, इसलिए सेबी ने डिजिटल फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए कुछ और कड़े कदम भी उठाए हैं। सेबी ने गूगल और मेटा के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है। इससे बिना रजिस्ट्रेशन वाली वित्तीय कंपनियां या लोग अब अपने कंटेंट का विज्ञापन नहीं चला सकेंगे। इसके अलावा, इन्फ्लुएंसर्स पर भी शिकंजा कसा गया है। रजिस्टर्ड कंपनियों को बिना लाइसेंस वाले इन्फ्लुएंसर्स के साथ काम करने से रोक दिया गया है और जो लोग सोशल मीडिया पर बिना इजाजत निवेश की सलाह दे रहे थे, उन पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। वहीं, सेबी के डायरेक्टर जीवन सोनपरोटे ने यह भी बताया कि वित्तीय धोखाधड़ी से और मजबूती से निपटने के लिए सेबी एक महीने के अंदर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के साथ एक खास समझौता भी करने जा रहा है।
7. एक्सपर्ट्स की राय: क्या यह बैज काफी है?
इस पहल पर साइबर सुरक्षा एकसपर्ट्स मानते हैं कि 'वेरिफाइड' बैज देना एक सही दिशा में उठाया गया कदम तो है, लेकिन यह निवेशकों के सामने मौजूद खतरों का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही हल करता है। उनके अनुसार, आज असली खतरा सिर्फ फर्जी एप्स नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स द्वारा किए जा रहे भ्रामक दावे हैं। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि आजकल एआई के जरिए नकली और भ्रामक कंटेंट बनाना बेहद आसान हो गया है, जिससे निवेशकों को गुमराह किया जा सकता है। इसलिए, सिर्फ एप्स को वेरिफाई करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि हमें लगातार सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी करने की भी जरूरत है ताकि निवेशकों का भरोसा सुरक्षित रहे।
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