सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Technology ›   Gadgets ›   The Era of Removable Batteries is Back! You Can Soon Replace Your Smartphone Battery.

Removable Battery: इस देश में लौट रहा है स्मार्टफोन्स का पुराना दौर, लोग खुद निकाल सकेंगे स्मार्टफोन की बैटरी!

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 20 Apr 2026 07:13 PM IST
विज्ञापन
सार

EU Smartphone Rules: यूरोपियन यूनियन (ईयू) के एक नए नियम के कारण स्मार्टफोन की दुनिया पूरी तरह बदलने वाली है। 2027 तक सभी कंपनियों को अनिवार्य रूप से ऐसे गैजेट्स बनाने होंगे जिनकी बैटरी यूजर्स खुद आसानी से बदल सकें। आइए जानते हैं ये नया नियम क्या है, इससे ई-कचरे में कैसे कमी आएगी, एपल-सैमसंग जैसी कंपनियों की मुश्किलें क्यों बढ़ेंगी और सबसे जरूरी बात कि यह बदलाव आपकी जेब के हजारों रुपये कैसे बचाने वाला है...

The Era of Removable Batteries is Back! You Can Soon Replace Your Smartphone Battery.
रिमूवेबल बैटरी - फोटो : एआई
विज्ञापन

विस्तार

क्या आपको वो पुराना दौर याद है जब फोन हैंग होने पर या बैटरी खराब होने पर हम खुद ही फोन का बैक कवर खोलकर बैटरी बदल लिया करते थे? स्मार्टफोन की दुनिया में वह पुराना दौर अब फिर से लौटने वाला है। यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने स्मार्टफोन्स बनाने के तरीकों को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इसका सबसे बड़ा मकसद यह तय करना है कि आपका स्मार्टफोन ज्यादा समय तक चले और उसे आसानी से रिपेयर किया जा सके। 

Trending Videos


जून 2025 से फरवरी 2027 के बीच लागू होने वाले इन नियमों के बाद स्मार्टफोन इंडस्ट्री में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है। अब कंपनियों को ऐसे फोन बनाने होंगे जिनकी बैटरी जल्दी खराब न हो, जिनके पार्ट्स वर्षों तक मिलते रहें और जिन्हें बिना किसी खास मशीन के आसानी से खोला और सुधारा जा सके। 2027 तक हालात ऐसे होंगे कि यूजर्स घर बैठे खुद ही अपने फोन की बैटरी बदल सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या कहते हैं ईयू के नए नियम?

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के नए नियमों के अनुसार, अब स्मार्टफोन्स की बैटरी ऐसी होनी चाहिए जिसे कोई भी यूजर बिना किसी विशेष तकनीकी जानकारी या जटिल औजारों के खुद आसानी से निकाल और बदल सके। आज के सील-पैक डिजाइन्स को देखते हुए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है। इसे लागू करने के लिए कंपनियों को 18 फरवरी 2027 तक का समय दिया गया है। इन नियमों के तहत न केवल बैटरी को साधारण औजारों से बदलने की सुविधा देनी होगी, बल्कि फोन के लॉन्च के कई वर्षों बाद तक उसकी रिप्लेसमेंट बैटरी भी बाजार में उपलब्ध करानी होगी। 


साथ ही, कंपनियों को बैटरी बदलने और उसे सुरक्षित तरीके से डिस्पोज करने के स्पष्ट निर्देश देने होंगे और पारदर्शिता के लिए 'डिजिटल बैटरी पासपोर्ट' जैसे लेबल भी लगाने होंगे। यह नियम केवल स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है, बल्कि टैबलेट और अन्य पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर भी समान रूप से लागू होगा।

पहला चरण शुरू, फरवरी 2027 से आएगा बड़ा बदलाव

इन नियमों का पहला चरण जून 2025 से शुरू हो चुका है। अब ईयू में बिकने वाले फोन्स को मजबूती के कड़े मानकों पर खरा उतरना होगा। ब्रांड्स को वर्षों तक स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराने होंगे और वे किसी भी थर्ड-पार्टी या लोकल रिपेयर सर्विस को काम करने से रोक नहीं सकते।

सबसे बड़ा बदलाव फरवरी 2027 से आएगा। इसके बाद से, स्मार्टफोन्स का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि यूजर्स बिना सर्विस सेंटर के चक्कर काटे, साधारण टूल्स की मदद से खुद ही फोन की बैटरी बदल सकें। अक्सर लोग नया फोन तब खरीदते हैं जब उनकी पुरानी बैटरी बैकअप देना बंद कर देती है, जबकि फोन बिल्कुल सही काम कर रहा होता है। इन नियमों का सीधा सा मतलब है, आपके मौजूदा स्मार्टफोन की उम्र बढ़ाना।

आखिर क्यों लाया जा रहा है यह नियम?

यूरोपियन यूनियन के जरिए इस नियम को लाने का सबसे बड़ा और बुनियादी मकसद ई-कचरे (ई-वेस्ट) के बढ़ते अंबार को रोकना और डिवाइस की उम्र बढ़ाना है। अक्सर देखा गया है कि लोग अपना कीमती स्मार्टफोन सिर्फ इसलिए फेंक देते हैं क्योंकि उसकी बैटरी खराब हो जाती है, जबकि फोन का बाकी हिस्सा और हार्डवेयर बिल्कुल ठीक काम कर रहा होता है।

बैटरी बदलने की इस आसान सुविधा के जरिए ईयू पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना चाहता है और रीसायकलिंग की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है। इससे न केवल इलेक्ट्रॉनिक कचरे में कमी आएगी, बल्कि पुराने फोन लंबे समय तक इस्तेमाल हो सकेंगे जिससे एक 'सर्कुलर इकोनॉमी' विकसित होगी। इसके अलावा, इस नियम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले कीमती मटीरियल्स, जैसे कि लिथियम और कोबाल्ट, को रिकवर करना और दोबारा इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा।

जरूरी शर्तें जो मोबाइल कंपनियों को माननी होंगी

मोबाइल कंपनियों को अब कई अहम और कड़े नियमों का पालन करना होगा, जो फोन के बनने से लेकर उसकी रिपेयरिंग तक के पूरे तरीके को बदल देंगे। इस नए नियम के तहत सबसे बड़ा बदलाव फोन के डिजाइन में देखने को मिलेगा। इसे अब इस तरह बनाया जाएगा कि उसे आसानी से खोला और सर्विस किया जा सके। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आम यूजर्स आसानी से मिलने वाले साधारण टूल्स की मदद से खुद ही अपने फोन की बैटरी बदल सकें। इसके अलावा बैटरी की क्वालिटी भी बेहतर करनी होगी, ताकि 800 बार फुल चार्ज (चार्ज साइकल) होने के बाद भी उसकी क्षमता कम से कम 80% बनी रहे।

हार्डवेयर के साथ-साथ आफ्टर-सेल्स सर्विस के नियमों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ग्राहकों को लंबे समय तक सुविधा देने के मकसद से, फोन लॉन्च होने के 10 साल बाद तक उसके स्पेयर पार्ट्स बाजार में उपलब्ध रखने होंगे और ऑर्डर देने पर इनकी डिलीवरी 5 से 10 कामकाजी दिनों के भीतर करनी होगी। कंपनियों को फोन रिपेयर करने का पूरा मैनुअल भी पब्लिक के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा, लोकल मैकेनिक या थर्ड-पार्टी रिपेयरिंग को लेकर कंपनियों की तरफ से कोई पाबंदी नहीं होगी। 

इससे ग्राहकों को अपना फोन सस्ते में ठीक कराने की पूरी आजादी मिलेगी। इन सबके अलावा, ग्राहकों की सहूलियत के लिए फोन के डिब्बे पर कुछ खास लेबल्स भी लगे होंगे। इनमें बैटरी लाइफ, फोन की मजबूती और उसका रिपेयरिबिलिटी स्कोर (यानी फोन को रिपेयर करना कितना आसान है) जैसी जरूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि ग्राहक पूरी तरह से सोच-समझकर अपना नया फोन खरीद सकें।

ब्रांड्स और ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा?

इन नए नियमों का स्मार्टफोन कंपनियों और ग्राहकों, दोनों पर गहरा असर पड़ने वाला है। एपल, सैमसंग, वनप्लस और शाओमी जैसे बड़े ब्रांड्स पर अब भारी दबाव है, क्योंकि उन्हें अपने फोन को असेंबल करने के तरीके पूरी तरह से बदलने होंगे। अब तक ढेर सारे गोंद से चिपकाए जाने वाले फोन्स की जगह कंपनियों को मॉड्युलर डिजाइन (जिसमें पुर्जे आसानी से बदले जा सकें) पर फोकस करना होगा। ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले समय में ये कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स की 'लंबी उम्र' और 'आसान रिपेयरिंग' को ही अपनी मार्केटिंग और विज्ञापनों का मुख्य हिस्सा बना लें। 

वहीं, आम ग्राहकों के लिए यह नियम एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। अब अगर 2-3 साल इस्तेमाल के बाद आपके फोन की बैटरी खराब हो जाती है तो आप उसे आसानी से और सस्ते में बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका वही फोन 5 से 6 साल तक बिना किसी परेशानी के आराम से चल जाएगा। इससे न सिर्फ आपके काफी पैसे बचेंगे, बल्कि हर कुछ वर्षों में नया फोन खरीदने का झंझट भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

यूजर्स को क्या फायदा होगा?

यह बदलाव ग्राहकों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब आपको अपनी फोन की बैटरी बदलवाने के लिए महंगे सर्विस सेंटर्स के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही भारी-भरकम बिल चुकाना होगा।

क्या होंगे नुकसान?

इस बदलाव के कारण आने वाले समय में स्मार्टफोन्स थोड़े मोटे हो सकते हैं। साथ ही, फोन को वॉटर-रेसिस्टेंट बनाने के तरीकों में भी बदलाव करना पड़ेगा, क्योंकि आसानी से खुलने वाले फोन को पूरी तरह से सील करना मुश्किल होता है।

क्या यह नियम सिर्फ यूरोप के लिए है?

भले ही यह नियम यूरोपियन यूनियन (ईयू) का है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया के मोबाइल मार्केट पर पड़ेगा। कोई भी ग्लोबल कंपनी (जैसे एपल या सैमसंग) यूरोप के लिए अलग और बाकी दुनिया के लिए अलग डिजाइन के फोन नहीं बनाना चाहेगी क्योंकि इससे उनका खर्चा और काम, दोनों बढ़ जाते हैं। इसलिए, यूरोप के नियम अक्सर पूरी दुनिया का स्टैंडर्ड बन जाते हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण USB-C पोर्ट है। जब ईयू ने टाइप-C केबल को अनिवार्य किया तो एपल को मजबूर होकर दुनियाभर में iPhone 15 सीरीज को टाइप-C पोर्ट के साथ ही लॉन्च करना पड़ा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed