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हर रंग कुछ कहता है: क्या आप जानते हैं USB पोर्ट के अलग-अलग रंगों का मतलब? और USB-C में ये क्यों नहीं होते?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 08 Jun 2026 11:40 PM IST
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सार

USB Port Colours Meaning: आज लगभग हर लैपटॉप, पीसी, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और गेमिंग डिवाइस में USB पोर्ट मौजूद हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कई कंप्यूटरों और लैपटॉप्स में USB-A पोर्ट अलग-अलग रंगों के क्यों होते हैं, जबकि USB-C पोर्ट लगभग हमेशा एक जैसे दिखाई देते हैं?

Why Are USB Ports Different Colours?
USB पोर्ट्स के रंग अलग-अलग क्यों होते हैं? - फोटो : एआई
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विस्तार

हमें चाहे स्मार्टफोन चार्ज करना हो, पेन ड्राइव लगानी हो, माउस जोड़ना हो या फिर लैपटॉप को मॉनिटर से कनेक्ट करना हो, हर जगह USB पोर्ट की जरूरत पड़ती है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि पुराने लैपटॉप या कंप्यूटर में USB पोर्ट अलग-अलग रंगों के होते हैं। जबकि आजकल के नए USB-C पोर्ट हमेशा एक जैसे ही दिखाई देते हैं? आइए समझते हैं कि इन रंगों का क्या मतलब है और USB-C के आने के बाद यह कलर-कोडिंग क्यों खत्म हो गई।

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Why Are USB Ports Different Colours?
USB-A पोर्ट्स में रंगों का क्या मतलब होता है? - फोटो : एआई

USB-A पोर्ट्स में रंगों का क्या मतलब होता है?

शुरुआती दौर में बाहर से देखने पर सभी USB पोर्ट एक जैसे लगते थे। यूजर्स को यह पता ही नहीं चलता था कि कौन-सा पोर्ट तेज डेटा ट्रांसफर करेगा और कौन-सा धीमा। इस उलझन को दूर करने के लिए कंपनियों ने पोर्ट के अंदर अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल करना शुरू किया:
सफेद: यह सबसे पुराने USB 1.x का निशान है। इसकी स्पीड बहुत कम (1.5 Mbps से 12 Mbps) होती थी। आज के समय में यह लगभग खत्म हो चुका है।
काला: यह USB 2.0 पोर्ट है, जो 480 Mbps तक की स्पीड देता है। यह आज भी कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर और नॉर्मल चार्जिंग के लिए टीवी या बजट लैपटॉप में खूब इस्तेमाल होता है।
नीला: यह USB 3.0 का संकेत है। इसने USB की दुनिया में क्रांति ला दी क्योंकि इसकी स्पीड 5 Gbps तक पहुंच गई। 
हरा-नीला: यह रंग आमतौर पर USB 3.1 या 3.2 जेन 2 (10 Gbps स्पीड) को दर्शाता है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियां इसका मतलब थोड़ा बदल सकती हैं।
लाल: यह हाई-परफॉर्मेंस पोर्ट है (10 से 20 Gbps स्पीड)। इसे अक्सर ऑलवेज-ऑन पोर्ट भी कहा जाता है। यानी अगर आपका लैपटॉप बंद भी है, तब भी आप इस पोर्ट से अपना फोन चार्ज कर सकते हैं।
पीला और नारंगी: ये पोर्ट भी लाल पोर्ट की तरह पावर-शेयरिंग का काम करते हैं। लैपटॉप के स्लीप मोड में होने पर भी ये चार्जिंग जारी रखते हैं।

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Why Are USB Ports Different Colours?
USB-C में अलग-अलग रंग क्यों नहीं होते? - फोटो : एआई

USB-C में अलग-अलग रंग क्यों नहीं होते?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर। जब रंगों से इतनी आसानी होती थी, तो नए USB-C पोर्ट में रंग क्यों नहीं होते? इसका सीधा सा जवाब है- USB-C सिर्फ एक डेटा ट्रांसफर या चार्जिंग केबल नहीं है, यह एक ऑल-राउंडर है। एक अकेला USB-C पोर्ट बहुत सारे काम कर सकता है, जैसे:

  • फोन और लैपटॉप की सुपरफास्ट चार्जिंग
  • हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर
  • 4K और 8K वीडियो आउटपुट (टीवी/मॉनिटर के लिए)
  • ऑडियो आउटपुट
  • Thunderbolt और DisplayPort का सपोर्ट

समस्या यह है कि हर USB-C पोर्ट ये सभी काम नहीं करता। दो USB-C पोर्ट दिखने में बिल्कुल एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन हो सकता है एक सिर्फ 480 Mbps की स्पीड से डेटा भेजे, जबकि दूसरा 40 Gbps की स्पीड, 240W की चार्जिंग और 8K वीडियो सपोर्ट करता हो। इतनी सारी अलग-अलग क्षमताओं को सिर्फ एक रंग से बता पाना नामुमकिन है।

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USB-C की सबसे बड़ी खूबी - फोटो : एआई

USB-C की सबसे बड़ी खूबी

USB-C में एक खास तकनीक होती है जिसे अल्टरनेट मोड कहते हैं। इसका मतलब है कि एक ही पोर्ट अपनी भूमिका बदल सकता है। वह कभी HDMI बन सकता है, कभी डिस्प्ले पोर्ट, तो कभी ऑडियो जैक। इसलिए रंगों वाला पुराना फॉर्मूला यहां फेल हो जाता है।

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तो फिर USB-C पोर्ट की ताकत कैसे पहचानें? - फोटो : एआई

तो फिर USB-C पोर्ट की ताकत कैसे पहचानें?

चूंकि USB-C में रंग नहीं होते, इसलिए कंपनियों ने इसकी क्षमता बताने के लिए लोगो और निशानों का सहारा लिया है:

  • SS (सुपरस्पीड): अगर पोर्ट के पास SS लिखा है, तो वह हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर सपोर्ट करता है।
  • बिजली का निशान (थंडरबोल्ट): इसका मतलब है कि यह पोर्ट हाई-स्पीड थंडरबोल्ट तकनीक से लैस है।
  • बैटरी या प्लग का निशान: यह हाई-पावर चार्जिंग का संकेत है।
  • D का निशान (डिस्प्ले पोर्ट): यह बताता है कि आप इस पोर्ट से अपना मॉनिटर या स्क्रीन कनेक्ट कर सकते हैं।
  • ध्यान दें: एपल जैसी कुछ कंपनियां अपने लैपटॉप पर कोई लोगो नहीं लगाती हैं। ऐसे में आपको पोर्ट की असली क्षमता जानने के लिए लैपटॉप का मैनुअल या कंपनी की वेबसाइट ही चेक करनी पड़ती है।
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