Google HQ: गूगल के लंदन हेडक्वार्टर का नया नाम होगा 'प्लेटफार्म 37', जानें इस नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी
Google Platform 37 London HQ: गूगल ने लंदन में अपने नए मुख्यालय का नाम प्लेटफॉर्म 37 रखा है। इस बिल्डिंग का नाम 2016 में एआई सिस्टम 'अल्फागो' की ऐतिहासिक चाल 'मूव 37' को एक ट्रिब्यूट देने के लिए रखा गया है। इस अत्याधुनिक इमारत में गूगल डीपमाइंड की टीमें भविष्य की तकनीक पर काम करेंगी।
विस्तार
टेक दिग्गज गूगल ने लंदन में अपने नए मुख्यालय का नाम बदलकर 'प्लेटफार्म 37' रखने का एलान किया है। ये सिर्फ एक बिल्डिंग का नाम नहीं है बल्कि इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इतिहास की एक बेहद अहम घटना छिपी है। इसके साथ ही, कंपनी आम लोगों को एआई से जोड़ने के लिए 'द एआई एक्सचेंज' नाम का एक नया स्पेस भी शुरू करने जा रही है। आइए इस पूरी खबर को समझते हैं:
आखिर क्यों रखा गया 'प्लेटफार्म 37' नाम?
गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस के अनुसार, इस अनोखे नाम के पीछे दो बेहद दिलचस्प कारण जुड़े हैं। पहला कारण सीधे तौर पर इसकी लोकेशन से जुड़ा है। दरअसल, ये शानदार बिल्डिंग लंदन के ऐतिहासिक रेलवे हब 'किंग्स क्रॉस स्टेशन' के पास स्थित है और इसी रेलवे कनेक्शन को दर्शाने के लिए इसके नाम में प्लेटफॉर्म शब्द जोड़ा गया है। वहीं, दूसरा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इतिहास के एक बड़े टर्निंग पॉइंट से प्रेरित है। साल 2016 में जब गूगल के एआई सिस्टम 'अल्फागो' का मुकाबला दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गो खिलाड़ी ली सेडोल से हुआ था। तब एआई ने गेम में 'मूव 37' नाम की एक ऐसी चाल चली थी, जिसे शुरुआत में इंसानी विशेषज्ञों ने एक गलती मान लिया था। लेकिन जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ा, वही चाल मैच का टर्निंग पॉइंट बन गई और अंततः एआई ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। आधुनिक तकनीक की उसी मील का पत्थर मानी जाने वाली चाल को सम्मान देने के लिए ही इस नई बिल्डिंग के नाम में 37 जोड़ा गया है।
कैसा है इस शानदार बिल्डिंग का डिजाइन?
इस फ्यूचरिस्टिक बिल्डिंग को दुनिया के मशहूर आर्किटेक्ट थॉमस हीदरविक और बियार्के इंगेल ने मिलकर डिजाइन किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका खास 'हंग आर्किटेक्चरल स्ट्रक्चर' है। यानी आसान भाषा में कहें तो इसके अंदर का वर्कस्पेस पूरी तरह से खंभों से मुक्त रखा गया है। इस ओपन डिजाइन से टीमों को एक साथ मिलकर काम करने के लिए ज्यादा खुली और सुविधाजनक जगह मिलेगी। इसके साथ ही ये पूरी तरह से एक इको-फ्रेंडली निर्माण है जिसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले मटेरियल से तैयार किया गया है और इसमें बिजली की खपत कम करने वाले खास सिस्टम भी लगाए गए हैं। बिल्डिंग को प्रकृति से जोड़ने के लिए इसकी छत पर एक बेहद सुंदर रूफटॉप गार्डन भी बनाया गया है। इसे लंदन की स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर तैयार किया गया है ताकि शहर के बीचों-बीच हरियाली और जैव विविधता को बढ़ावा दिया जा सके।
आम लोगों के लिए क्या है खास?
गूगल इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर 'द एआई एक्सचेंज' नाम का एक पब्लिक स्पेस भी बना रहा है। इसे इसी साल के अंत तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। लोगों को एआई के प्रति जागरूक करने के मुख्य उद्देश्य से बनाए जा रहे इस स्पेस में कई खास चीजें देखने को मिलेंगी। यहां आने वाले लोगों को मुफ्त एजुकेशनल प्रोग्राम्स के जरिए एआई के बारे में विस्तार से सीखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, आम जनता यहां इंटरएक्टिव प्रदर्शनियों का हिस्सा बन सकेगी और एआई तकनीक के साथ-साथ समाज पर पड़ने वाले इसके प्रभाव से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी शानदार अनुभव ले सकेगी।
कब शिफ्ट होंगी टीमें?
कंपनी के अनुसार, गूगल डीपमाइंड और दूसरी टीमें इस साल गर्मियों से इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट होना शुरू कर देंगी। गूगल का मानना है कि यह जगह सिर्फ एक ऑफिस नहीं, बल्कि विज्ञान का वो केंद्र बनेगी जहां भविष्य की सबसे बड़ी एआई खोजें होंगी।
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