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WhatsApp: यूजरनेम फीचर से बढ़ेगी धोखाधड़ी? सरकार के रडार पर आया व्हाट्सएप, प्राइवेसी और सुरक्षा की हो रही जांच
Wed, 01 Jul 2026 04:22 PM IST
Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 01 Jul 2026 04:22 PM IST
सार
WhatsApp Username Feature: व्हाट्सएप ने हाल ही में यूजरनेम फीचर लॉन्च करने की घोषणा की है। इसी बीच सरकार इस फीचर से जुड़ी सुरक्षा और फर्जी पहचान की आशंकाओं की समीक्षा कर रही है। यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाएगा या नए साइबर खतरे साथ लाएगा? आइए जानते हैं इस लेख में...
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व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
जहां एक ओर व्हाट्सएप अपने यूजरनेम फीचर के जरिए बड़े प्राइवेसी अपडेट्स का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस फीचर के लॉन्च होने से पहले ही केंद्र सरकार इसकी सुरक्षा और प्राइवेसी पहलुओं की समीक्षा करने की तैयारी में है। सरकार यह जांचना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार तो नहीं बन जाएगा।
सरकार की रडार में क्यों आया यह फीचर?
सरकारी सूत्रों और साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स के अनुसार इस नए फीचर की तुलना टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एप्स से की है, जहां पहले से ही मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम से बात करने की सुविधा मिलती है। सरकार को आशंका है कि भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना बेहद आसान हो जाएगा।
यह नया फीचर भारत के मौजूदा टेलीकॉम कानूनों से भी सीधे टकरा रहा है, जो इस प्रकार हैं..
प्लेटफॉर्म की जवाबदेही होगी तय
ऑनलाइन फ्रॉड बढ़ने के बीच बढ़ी चिंता
राष्ट्रीय सुरक्षा और यूजर सेफ्टी पर रहेगा फोकस
अंकुर वारिकू ने भी जताई चिंता
इस पूरे विवाद में उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर व्हाट्सएप ने इस फीचर के साथ एक मजबूत और प्रभावी एंटी-अब्यूज सिस्टम यानी दुरुपयोग रोकने की प्रणाली तैयार नहीं किया, तो भारत जैसे देश में किसी भी नामी-गिरामी शख्सियत या प्रतिष्ठित कंपनी से मिलते-जुलते फर्जी यूज़रनेम बनाकर बड़े पैमाने पर स्कैम और धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है।
व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर क्या है ?
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर कैसे काम करेगा?
इस फीचर को लेकर व्हाट्सएप का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए किसी नए व्यक्ति, ग्रुप या बिजनेस से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी।
कैसे रोलआउट होगा?
कंपनी का कहना है कि इस फीचर को एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे करके रोलआउट किया जाएगा। इसके लिए यूजर्स को एप का लेटेस्ट वर्जन अपडेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि फीचर उपलब्ध होते ही इसका इस्तेमाल किया जा सके।
क्या पहचान चोरी का खतरा बढ़ सकता है?
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सरकार की रडार में क्यों आया यह फीचर?
सरकारी सूत्रों और साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स के अनुसार इस नए फीचर की तुलना टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एप्स से की है, जहां पहले से ही मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम से बात करने की सुविधा मिलती है। सरकार को आशंका है कि भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना बेहद आसान हो जाएगा।
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यह नया फीचर भारत के मौजूदा टेलीकॉम कानूनों से भी सीधे टकरा रहा है, जो इस प्रकार हैं..
- सत्यापित मोबाइल नंबर जरूरी: भारत के मौजूदा नियमों के तहत व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट का एक वेरिफाइड मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है।
- टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024: डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) इन नियमों के तहत सिम-बाइंडिंग (Sim-Binding) जैसे बेहद सख्त प्रावधान लागू करता है। ऐसे में बिना नंबर के यूजरनेम आधारित चैटिंग इन सुरक्षा चक्रों को कमजोर कर सकती है।
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प्लेटफॉर्म की जवाबदेही होगी तय
- केंद्र सरकार अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सूत्रों के अुनसार वह इस प्रस्तावित फीचर को लेकर व्हाट्सएप को जल्द ही एक आधिकारिक नोटिस भेजने जा रही है।
- सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर किसी नए फीचर की वजह से देश में साइबर अपराध या धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही खुद मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को उठानी होगी।
- सरकार की नाराजगी इस बात को लेकर है कि व्हाट्सएप को हर हाल में यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बहरूपिया बनने या भ्रामक जानकारियां फैलाने के लिए न हो।
ऑनलाइन फ्रॉड बढ़ने के बीच बढ़ी चिंता
- भारत में पिछले कुछ समय से ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
- ऐसे में सरकार यह देखना चाहती है कि व्हाट्सएप का नया यूजरनेम सिस्टम कहीं अपराधियों के लिए नई पहचान बनाकर लोगों को धोखा देने का जरिया तो नहीं बन जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और यूजर सेफ्टी पर रहेगा फोकस
- सूत्रों के अनुसार, सरकार का स्पष्ट रुख है कि किसी भी डिजिटल फीचर की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- अगर समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि फीचर में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं, तो मेटा को आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
अंकुर वारिकू ने भी जताई चिंता
इस पूरे विवाद में उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर व्हाट्सएप ने इस फीचर के साथ एक मजबूत और प्रभावी एंटी-अब्यूज सिस्टम यानी दुरुपयोग रोकने की प्रणाली तैयार नहीं किया, तो भारत जैसे देश में किसी भी नामी-गिरामी शख्सियत या प्रतिष्ठित कंपनी से मिलते-जुलते फर्जी यूज़रनेम बनाकर बड़े पैमाने पर स्कैम और धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है।
व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर क्या है ?
- कंपनी ने हाल ही में घोषणा की है कि व्हाट्सएप पर जल्द ही नंबर शेयर करने का झंझट खत्म हो जाएगा। इंस्टाग्राम और टेलीग्राम की तरह यूजर्स अब यूजरनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे।
- कंपनी ने इस फीचर के लिए शुरुआती Username Reservation भी शुरू कर दिया है और इसे आधिकारिक तौर पर इस साल के अंत तक सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर कैसे काम करेगा?
इस फीचर को लेकर व्हाट्सएप का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए किसी नए व्यक्ति, ग्रुप या बिजनेस से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी।
- कंपनी के अनुसार इसमें यूजरनेम अधिकतम 35 कैरेक्टर तक का हो सकेगा।
- कुछ हाई-प्रोफाइल और सेलिब्रिटी यूजरनेम सुरक्षित रखे जाएंगे।
- यूजर्स मोबाइल एप की अकाउंट या प्राेफाइल सेटिंग्स से अपना Username रिजर्व कर सकेंगे।
- शुरुआती चरण में यह सुविधा व्हाट्सएप वेब और डेस्कटॉप पर उपलब्ध नहीं होगी।
- यह पूरी तरह वैकल्पिक फीचर होगा, जिसे यूजर कभी भी बदल या हटा सकेंगे।
- क्रिएटर्स, बिजनेस और ऑर्गेनाइजेशन इंस्टाग्राम या फेसबुक वाले अपने मौजूदा यूजरनेम भी क्लेम कर सकेंगे।
कैसे रोलआउट होगा?
कंपनी का कहना है कि इस फीचर को एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे करके रोलआउट किया जाएगा। इसके लिए यूजर्स को एप का लेटेस्ट वर्जन अपडेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि फीचर उपलब्ध होते ही इसका इस्तेमाल किया जा सके।
क्या पहचान चोरी का खतरा बढ़ सकता है?
- हालांकि कंपनी का कहना है कि इस फीचर से मोबाइल नंबर को छिपाकर प्राइवेसी बढ़ेगी, लेकिन कुछ साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे फर्जी प्रोफाइल बनाकर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करने की कोशिशें बढ़ सकती हैं। जैसे की टेलीग्राम जैसे एप्स को देखने काे मिला है।
- इसी चिंता को देखते हुए व्हाट्सएप ने दावा किया है कि उसके सिस्टम में कई सुरक्षा परतें मौजूद होंगी। इसके अलावा कंपनी यूजरनमे की नाम का एक छोटा नंबर कोड भी देने की योजना बना रही है, जिससे असली और नकली अकाउंट के बीच अंतर करना आसान होगा।