Snapchat Update: आपके बच्चे किससे करते हैं सबसे ज्यादा बात, स्नैपचैट का नया फैमिली सेंटर अब खोलेगा राज
स्नैपचैट अपनी प्राइवेसी के लिए युवाओं में मशहूर है, लेकिन अब नहीं होगी। क्योंकि स्नैपचैट ने अपने यूजर्स के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है। इस अपडेट के तहत Family Center में कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं, जिससे अब पैरेंट्स अपने बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। ये अपडेट भारत समेत दुनिया भर में रोलआउट किया गया है।
विस्तार
स्नैपचैट ने फैमिली सेंटर में बड़े बदलाव किए हैं। नए अपडेट के बाद पैरेंट्स देख सकेंगे कि उनके बच्चे एप पर किन लोगों से सबसे ज्यादा बातचीत कर रहे हैं और किससे लाइव लोकेशन शेयर कर रहे हैं। हालांकि, चैट का कंटेंट पूरी तरह प्राइवेट रहेगा। ये फीचर बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी और पैरेंट्स-टीन्स के बीच बेहतर बातचीत को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है।
मैसेज रहेंगे प्राइवेट पर संगति पर रहेगी नजर
कंपनी ने साफ किया है कि इन नए फीचर्स में बच्चों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है।अक्सर बच्चों को डर होता है कि पैरेंट्स उनके मैसेज पढ़ लेंगे, लेकिन स्नैपचैट ने इसका बीच का रास्ता निकाला है। अब पैरेंट्स ये तो देख सकेंगे कि उनके बच्चे पिछले 7 दिनों में किन यूजर्स के साथ सबसे ज्यादा बातचीत कर रहे हैं और किसके साथ सोशल इंटरैक्शन ज्यादा है, लेकिन वो क्या बात कर रहे हैं (मैसेज कंटेंट) ये अभी भी प्राइवेट रहेगा। कंपनी का मानना है कि इससे बच्चों की प्राइवेसी भी बची रहेगी और पैरेंट्स को किसी संदिग्ध एक्टिविटी का पता भी चल सकेगा।
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स्नैप मैप में बढ़ी ट्रांसपैरेंसी
नए अपडेट के तहत स्नैप मैप को पहले से ज्यादा सुरक्षित और ट्रांसपैरेंट बना दिया है। अब पैरेंट्स देख सकेंगे कि उनके बच्चे अपनी लाइव लोकेशन किन दोस्तों के साथ शेयर कर रहे हैं। हालांकि, पैरेंट्स खुद बच्चे की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक नहीं कर पाएंगे, लेकिन किसी भी खतरे या रिस्क की स्थिति में स्नैपचैट खुद तुरंत पैरेंट्स को अलर्ट भेज देगा।
क्यों जरूरी था ये अपडेट?
स्नैपचैट टीन्स के बीच काफी पॉपुलर है, खासतौर पर इसकी मजबूत प्राइवेसी सेटिंग्स की वजह से, लेकिन यही प्राइवेसी पहले पैरेंट्स के लिए चिंता का कारण थी। नए अपडेट के जरिए स्नैपचैट ने बच्चों की आजादी और पैरेंट्स की चिंता दोनों के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश की है। स्नैपचैट का कहना है कि इस अपडेट का मकसद बच्चों पर जासूसी करना बिल्कुल नहीं है। ये पैरेंट्स और बच्चों के बीच विश्चास बढ़ाने के लिए जारी किया गया है। भारत समेत दुनियाभर में इसे रोलआउट कर दिया गया है। ऑनलाइन ग्रूमिंग और साइबर बुलिंग के बढ़ते मामलों को देखते हुए ये कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है।