WhatsApp: नेताओं-सेलिब्रिटीज के नाम पर हो सकती है धोखाधड़ी? पहले ही बुक हो गए यूजरनेम; मेटा ने दिया ये जवाब
WhatsApp Username Feature: व्हाट्सएप का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च हाेने से पहले ही विवादों में घिर गया है। केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा और साइबर फ्रॉड को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद अब मेटा ने इस फीचर को लेकर विस्तार से सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि मशहूर हस्तियों या सरकारी संस्थाओं के नाम कोई भी व्यक्ति रिजर्व नहीं कर सकता और यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई स्तर की सुरक्षा पहले से तैयार की गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेटा ने क्या सफाई दी ?
व्हाट्सएप ने अपने FAQ में स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर चल रहे वे दावे गलत हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि कोई भी मशहूर या चर्चित यूजरनेम पहले से रिजर्व कर सकता है। कंपनी के अनुसार, केवल संबंधित सेलिब्रिटी, सरकारी संस्था, मेटा वेरिफाइड अकाउंट या असली अकाउंट मालिक ही ऐसे यूजरनेम पर दावा कर पाएंगे। मेटा के जवाब नीचे पढ़े...
सवाल: क्या यूजरनेम रखना जरूरी होगा?
जवाब: नहीं, यूजरनेम पूरी तरह वैकल्पिक होगा। अगर यूजर चाहें तो इसे इस्तेमाल करें, नहीं तो बिना यूज़रनेम के भी WhatsApp चला सकेंगे।
सवाल: अगर मनचाहा यूजरनेम उपलब्ध नहीं मिला तो क्या होगा?
जवाब: इसके कई कारण हो सकते हैं।
- वह यूजरनेम पहले से किसी इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट से जुड़ा हो, ऐसे में वह उसके असली मालिक के लिए रिजर्व रहेगा।
- मशहूर हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और मेटा वैरिफाइड अकाउंट्स के नाम तथा उनसे मिलते-जुलते कई यूजरनेम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं। इन पर केवल असली मालिक ही दावा कर सकते हैं। अगर कोई सामान्य यूजरनेम पहले ही लिया जा चुका है, तो यूजरनेम जनरेटर वैकल्पिक सुझाव देगा।
सवाल: अगर कोई मेरे जैसा यूजरनेम बनाकर मेरी पहचान की नकल करे या स्कैम करे तो क्या होगा?
जवाब: फिलहाल यूजरनेम के जरिए मैसेजिंग शुरू नहीं हुई है। जब यह फीचर लॉन्च होगा और कोई नया व्यक्ति यूजरनेम के जरिए संपर्क करेगा, तो व्हाट्सएप उसके देश की जानकारी दिखाएगा और पहली बार संपर्क होने पर चेतावनी भी देगा। इसके अलावा मशहूर लोगों के नाम और उनसे मिलते-जुलते यूज़रनेम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं। कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट सिस्टम के जरिए स्कैमर्स पर भी नजर रखेगी।
सवाल: अगर किसी को मेरा यूजरनेम पता चल जाए या वह उसका अनुमान लगा ले, तो क्या वह मुझे मैसेज कर सकता है?
जवाब: नहीं, जैसे व्हाट्सएप पर मोबाइल नंबर सर्च नहीं किया जा सकता, वैसे ही यूजरनेम भी सर्च नहीं किए जा सकेंगे। सुरक्षा बढ़ाने के लिए यूजर यूजरनेम की भी जोड़ सकते हैं, जिससे किसी को संपर्क करने के लिए यूजरनेम के साथ वह की भी चाहिए होगी। अनजान लोगों के मैसेज पर पहले की तरह चेतावनी, ब्लॉक और रिपोर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी।
सवाल: यूजरनेम की क्या है?
जवाब: यह एक अतिरिक्त सुरक्षा परत है। इसे चालू करने पर किसी भी नए व्यक्ति को आपसे संपर्क करने के लिए आपका यूजरनेम और यूजरनेम की दोनों पता होने चाहिए। जरूरत पड़ने पर यूजर किसी भी समय अपनी की बदल भी सकते हैं।
सवाल: क्या इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट लिंक करना जरूरी होगा?
जवाब: अगर कोई यूजर वही यूजरनेम चाहता है जो उसके इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट पर है, तो उसे दोनों अकाउंट लिंक करने होंगे। इससे फर्जी पहचान रोकने में मदद मिलेगी। इसके बाद यूजर चाहें तो अकाउंट अनलिंक कर सकते हैं या व्हाट्सएप के लिए अलग यूजरनेम चुन सकते हैं।
सवाल: क्या बाद में यूजरनेम बदला जा सकेगा?
जवाब: हां, अगर नया यूजरनेम उपलब्ध होगा तो यूजर उसे कभी भी बदल सकेंगे।
Meta ने अफवाहों पर क्या कहा?
- कंपनी ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया पर मशहूर या चर्चित यूजरनेम रिजर्व करने के दावे गलत हैं। केवल संबंधित सार्वजनिक हस्ती या असली अकाउंट मालिक ही ऐसे यूजरनेम पर दावा कर सकते हैं।
- मेटा ने यह भी बताया कि इस साल के आखिर में फीचर लॉन्च होने से पहले ही रिजर्वेशन इसलिए शुरू किया गया है ताकि यूजर्स अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकें। कंपनी का कहना है कि वह इस दौरान लगातार यूजर्स का फीडबैक ले रही है, ताकि आधिकारिक रोलआउट के समय फीचर बेहतर और सुरक्षित अनुभव दे सके।
सरकार ने चिंता क्यों जताई ?
- केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा को नोटिस भेजा है। सरकार का मानना है कि अगर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए, तो यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फर्जी पहचान बनाकर ठगी जैसे मामलों को बढ़ावा दे सकता है।
- सरकार ने मेटा से जवाब मांगा था कि इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ने की स्थिति में कंपनी की जिम्मेदारी कैसे तय होगी। साथ ही, बातचीत पूरी होने तक भारत में इस फीचर को लॉन्च नहीं करने के लिए भी कहा गया है।
किन वजहों से बढ़ी बहस?
- हाल ही में कई चर्चित लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि उनके नाम या उनसे मिलते-जुलते कई यूजरन तो पहले से ही रिजर्व हो चुके हैं।
- दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और MobiKwik के सीईओ विपिन प्रीत सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए थे। इसके बाद इस फीचर को लेकर बहस और तेज हो गई।
With WhatsApp rolling out usernames, I tried to reserve mine today.
I completely understand that ‘Manish Sisodia’ is not a unique name, so it’s quite possible that many versions of my name have already been taken.
But what surprised me is that almost every variation using my… https://t.co/KXxXYOs2VP
With WhatsApp rolling out usernames, I tried to reserve mine today.
— Manish Sisodia (@msisodia) July 1, 2026
I completely understand that ‘Manish Sisodia’ is not a unique name, so it’s quite possible that many versions of my name have already been taken.
But what surprised me is that almost every variation using my… https://t.co/KXxXYOs2VP
यूजर्स की सुरक्षा के लिए क्या होंगे इंतजाम?
- मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर में कई सुरक्षा परतें होंगी। किसी यूजर से संपर्क करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा। कंपनी बार-बार यूजरनेम का अनुमान लगाने की कोशिशों को ब्लॉक करेगी और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने वाले सिस्टम भी सक्रिय रहेंगे।
- इसके अलावा, जब कोई अनजान व्यक्ति पहली बार यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजेगा, तब व्हाट्सएप यह जानकारी भी दिखाएगा कि वह नया अकाउंट है या नहीं, क्या वह आपके कॉन्टैक्ट में है, क्या कोई कॉमन ग्रुप है और वह किस देश से मैसेज भेज रहा है। इससे यूजर तय कर सकेगा कि जवाब देना है या नहीं।
क्या अभी फीचर शुरू हो गया है?
नहीं, व्हाट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम फीचर अभी उपलब्ध नहीं है। कंपनी इसे इस साल के आखिर तक चरणबद्ध तरीके से रोलआउट करेगी। व्हाट्सएप का कहना है कि फीचर इस्तेमाल करने के बावजूद अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत बनी रहेगी।
IFF ने सरकार के नोटिस पर क्या कहा?
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने सरकार के नोटिस पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि किसी नए डिजिटल फीचर को लॉन्च होने से पहले रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए। आईएफएफ के मुताबिक, मौजूदा कानून सरकार को किसी फीचर को पहले से मंजूरी देने या उसे रोकने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं देते।