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Railone App: बिना अलर्ट के एक्सपायर हो रहे पासवर्ड, एप के किस खामी से बढ़ी यात्रियों की परेशानी?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Sun, 22 Feb 2026 05:21 PM IST
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सार
RailOne App password issue: क्या आप भी ट्रेन टिकट के लिए रेलवन एप का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां तो सावधान हो जाइए, क्योंकि अगर आपने समय रहते अपना पासवर्ड चेक नहीं किया, तो बुकिंग के वक्त आप मुश्किल में फंस सकते हैं। क्योंकि हाल में ऐसा ही अनुभव सामने आया, जहां पासवर्ड एक्सपायर होने की पूर्व सूचना न मिलने से टिकट बुकिंग प्रक्रिया बाधित हो गई। जानिए पूरा मामला विस्तार से...
रेलवन एप
- फोटो : RailOne App
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विस्तार
रेल टिकट बुकिंग के लिए विकसित रेलवन एप को इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC), के विकल्प के रूप में पेश किया गया था। इस एप पर रिजर्व्ड और अनरिजर्व्ड दोनों कैटेगरी की टिकट बुक की जा सकती हैं। हालांकि फीचर्स की लंबी सूची के बावजूद एक अहम कमी सामने आई। जैसे पासवर्ड एक्सपायरी का पहले से कोई नोटिफिकेशन या ईमेल अलर्ट नहीं मिलने की।
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नोटिफिकेशन सिस्टम में बड़ी चूक
आमतौर पर बैंकिंग और फाइनेंशियल एप्स पासवर्ड एक्सपायर होने से 7-10 दिन पहले अलर्ट भेजना शुरू कर देते हैं। लेकिन रेलवन एप में यह सुविधा नदारद है। यूजर को सीधे लॉग-इन के समय पता चलता है कि उसका पासवर्ड अब काम नहीं करेगा। टिकट बुकिंग जैसे टाइम-सेंसिटिव काम के लिए यह एक बड़ा रिस्क हो सकता है।
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mPIN बनाम पासवर्ड
रेलवन एप डेली लॉग-इन के लिए 6 अंकों का mPIN इस्तेमाल करता है। महीनों तक एमपिन इस्तेमाल करने की वजह से यूजर अपना मुख्य अल्फान्यूमेरिक पासवर्ड भूल जाते हैं। जब एप अचानक मुख्य पासवर्ड मांगता है, तो फॉरगॉट पासवर्ड ही एकमात्र रास्ता बचता है, जो खुद में एक जटिल प्रक्रिया बन चुकी है।
ओटीपी डिले और सर्वर ग्लिच
पासवर्ड रीसेट करते समय मोबाइल और ईमेल पर ओटीपी आने में 15 से 20 मिनट तक का समय लग रहा है। तकनीकी जानकारों का मानना है कि एप के ऑथेंटिकेशन सर्वर और यूजर इंटरफेस के बीच तालमेल की कमी की वजह से एप हैंग या नॉन-रेस्पॉन्सिव हो जाता है।
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तत्काल टिकट और त्योहारों में बढ़ सकती है मुसीबत
होली का त्योहार नजदीक आ रहा है। सोचिए, अगर आप इन मौकों पर तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं, फिर एप पासवर्ड रीसेट करने को कहे, तो 20 मिनट का डिले आपकी सीट किसी और को दिला सकता है। यूपी-बिहार जैसे रूटों पर जहां सेकंडों में सीटें फुल होती हैं, वहां यह ग्लिच यात्रियों के लिए ट्रेन छूटने जैसा है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रेलवन एप को बायोमेट्रिक लॉग-इन (फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) या पासवर्ड एक्सपायरी से पहले पुश नोटिफिकेशन की सुविधा जोड़नी चाहिए। साथ ही, ओटीपी डिलीवरी सिस्टम को और तेज करने की जरूरत है ताकि यूजर का कीमती समय बर्बाद न हो।