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X: एक्स 'मेड विध एआई' लेबल के जरिए करेगा कंटेट का वर्गीकरण, भारत के नए 2026 एआई नियमों के बाद बढ़ी सख्ती

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Wed, 25 Feb 2026 12:16 PM IST
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सार

Made with AI Label on X: एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स कथित तौर पर 'मेड विध एआई' लेबल पर काम कर रहा है। इससे यूजर्स अपनी पोस्ट में एआई के उपयोग की जानकारी दे सकेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत के 2026 आईटी नियम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनरेटेड कंटेंट की स्पष्ट पहचान और टैगिंग अनिवार्य कर रहे हैं।

X May Introduce ‘Made with AI’ Label Amid India’s 2026 IT Rules
एक्स (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : x
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विस्तार

एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' कथित तौर पर एक नया 'मेड विध एआई' लेबल विकसित कर रहा है। इस फीचर के जरिए यूजर्स यह बता सकेंगे कि उनकी पोस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स से बनाई गई है या एडिट की गई है। इस फीचर को सबसे पहले एप रिसर्चर Nima Owji ने स्पॉट किया और प्लेटफॉर्म पर इसके डेवलपमेंट से जुड़ी जानकारी साझा की। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब भारत समेत कई देशों में एआई-जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक को लेकर नियम सख्त किए जा रहे हैं।

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'मेड विध एआई' लेबल कैसे काम कर सकता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्ट पब्लिश करते समय एक टॉगल विकल्प दिख सकता है। यूजर ये चुन सकेंगे कि:

  • टेक्स्ट एआई से जनरेट हुआ है
  • इमेज, वीडियो या ऑडियो एआई से बनाया गया है
  • या कंटेंट को एआई टूल्स से एडिट किया गया है

अगर यह विकल्प ऑन किया जाता है तो पोस्ट पर साफ तौर पर मेड विध एआई टैग दिखाई देगा। हालांकि एक्स ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह लेबल अनिवार्य होगा या वैकल्पिक और कंपनी इस बात की पुष्टि कैसे करेगी कि यूजर सही जानकारी दे रहे हैं।

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भारत के 2026 आईटी नियम क्या कहते हैं?

भारत सरकार ने हाल ही में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 लागू किए हैं। इन नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को एआई से बने कंटेंट (सिंथेटिकली जेनेरेटेड इंफॉर्मेशन) की पहचान और टैगिंग करनी होगी।

नए नियमों की मुख्य बातें:

  • कानूनी एआई-जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट और स्थायी लेबल लगाना अनिवार्य
  • यह लेबल कंटेंट के मेटाडेटा में स्थायी रूप से शामिल होना चाहिए
  • कोर्ट या सरकार के आदेश मिलने पर अवैध डीपफेक और हानिकारक सिंथेटिक कंटेंट को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा
  • नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खोनी पड़ सकती है

सेफ हार्बर खत्म होने की स्थिति में कंपनी को यूजर के जरिए पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

इंडस्ट्री में बढ़ता एआई डिस्क्लोजर ट्रेंड

एआई कंटेंट को लेकर सख्ती सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। मेटा पहले ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एआई डिस्क्लोजर लेबल लागू कर चुका है। यूट्यूब और टिक-टॉक ने भी सिंथेटिक मीडिया को लेकर नियम बनाए हैं। एक्स ने ट्विटर के समय C2PA कंटेंट प्रॉवेनेंस स्टैंडर्ड अपनाया था लेकिन बाद में उससे दूरी बना ली। अब भारत के नए नियमों के बाद कंपनी अपना अलग एआई लेबलिंग सिस्टम तैयार करती दिख रही है।

आगे क्या होगा?

अभी तक एक्स ने मेड विद एआई लेबल कब शुरू होगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। लेकिन अगर यह फीचर लागू होता है तो यह भारत के 2026 आईटी नियमों के तहत एआई से बने कंटेंट को साफ-साफ पहचानने की दिशा में बड़ा कदम होगा। आजकल एआई टूल्स और डीपफेक तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह लेबल लोगों को समझने में मदद करेगा कि जो पोस्ट वे देख रहे हैं वो किसी इंसान ने बनाई है या एआई की मदद से तैयार की गई है।

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