यूपी: भारतीय बासमती का सफर हुआ महंगा, फिर भी ईरानी मुरीद; कंटेनर का समुद्री भाड़ा 500 से 5000 डॉलर पहुंचा
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईरान तक भारतीय बासमती चावल पहुंचाने का समुद्री भाड़ा 500 से बढ़कर 5000 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया है। इसके बावजूद ईरान में भारतीय बासमती की मांग लगातार बनी हुई है।
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर पड़ा है। ईरान तक बासमती पहुंचाने की लागत कई गुना बढ़ गई है। युद्ध से पहले 25 टन चावल वाले एक कंटेनर का समुद्री भाड़ा करीब 500 डॉलर था, जो अब बढ़कर 5000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है। इसके बावजूद ईरान में भारतीय बासमती की मांग लगातार बनी हुई है।
भाड़े में करीब दस गुना बढ़ोतरी
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के निदेशक रितेश शर्मा के अनुसार युद्ध के दौरान बासमती के निर्यात में काफी दिक्कतें आ रही हैं। समुद्री भाड़ा बढ़ने से निर्यातकों की परेशानी और बढ़ी है। 25 टन चावल वाले कंटेनर का समुद्री भाड़ा युद्ध से पहले करीब 500 डॉलर था, जो अब 5000 डॉलर तक पहुंच गया है।
यह भी पढ़ें: सीलिंग का खौफ: सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक आयोग गठित, मेडा की भूमिका-उल्देपुर समेत अन्य कॉलोनियों की होगी जांच
ईरान में भारतीय बासमती की मजबूत मांग
रितेश शर्मा के अनुसार बढ़ी हुई लागत के बावजूद ईरान में भारतीय बासमती की मांग लगातार बनी हुई है। ईरान के लोग भारतीय बासमती को काफी पसंद करते हैं। ईरान भारतीय बासमती के प्रमुख आयातक देशों में शामिल है। भारत से करीब 152 देशों में बासमती का निर्यात किया जाता है।
किसानों को भी मिल रहा निर्यात बढ़ने का लाभ
भारतीय बासमती की गुणवत्ता और उत्पादन में साल दर साल वृद्धि हो रही है। उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में बासमती का उत्पादन किया जाता है। निर्यात बढ़ने से किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा है। प्रमुख आयातक देशों में ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, यमन गणराज्य, कुवैत, अमेरिका, ब्रिटेन, ओमान और कतर शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: सीलिंग का खौफ: सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक आयोग गठित, मेडा की भूमिका-उल्देपुर समेत अन्य कॉलोनियों की होगी जांच
2025-26 में 65.22 लाख टन बासमती का निर्यात
देशवार निर्यात आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में कुल 65.22 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ। इसमें सऊदी अरब को 10.56 लाख टन और ईरान को 10.01 लाख टन बासमती भेजी गई। इराक को 7.64 लाख टन और संयुक्त अरब अमीरात को 5.36 लाख टन बासमती का निर्यात किया गया।
वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जून तक कुल 15.34 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ। इसमें जॉर्डन को 2.22 लाख टन और सऊदी अरब को 2.51 लाख टन बासमती भेजी गई। आंकड़ों के अनुसार भारतीय बासमती की वैश्विक बाजार में मजबूत मांग बनी हुई है।
पूसा बासमती 1121 सबसे लोकप्रिय
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक रितेश शर्मा के अनुसार कई बासमती प्रजातियों की मांग बढ़ी है। इनमें पूसा बासमती 1121 सबसे लोकप्रिय प्रजाति है। इसके अलावा बासमती 1509, बासमती 1718 और बासमती 1692 की भी मांग है। बासमती पीबीवन और बासमती 1401 का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। ये प्रजातियां अपनी सुगंध और स्वाद के लिए जानी जाती हैं।