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Hindi News ›   Technology ›   Tech Diary ›   5 Bluetooth Security Risks You Need to Know to Protect Your Devices

Bluetooth Risks: ब्लूटूथ के ये पांच नुकसान शायद ही जानते होंगे आप, एक गलती पड़ेगी महंगी

Thu, 06 Jun 2024 04:42 PM IST
प्रदीप पाण्डेय टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Thu, 06 Jun 2024 04:42 PM IST
सार

कई बार हम फाइल ट्रांसफर करने के लिए भी ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हैं। ब्लूटूथ कम्युनिकेशन का एक माध्यम है और इसी माध्यम का इस्तेमाल हैकर्स भी आपको हैक करने के लिए करते हैं। आज की इस रिपोर्ट में हम आपको ब्लूटूथ के पांच खतरे के बारे में बताएंगे।

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5 Bluetooth Security Risks You Need to Know to Protect Your Devices
Mobile User - फोटो : Istock

विस्तार

ब्लूटूथ के नाम से आप परिचित तो होंगे ही। आमतौर पर सभी नेटवर्क वाली डिवाइस में ब्लूटूथ होता है। मोबाइल से लेकर स्पीकर और टैबलेट से लेकर कंप्यूटर तक में ब्लूटूथ होता है। आमतौर पर हम ब्लूटूथ का इस्तेमाल एक डिवाइस को दूसरी से कनेक्ट करने के लिए करते हैं। इसके अलावा कई बार हम फाइल ट्रांसफर करने के लिए भी ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हैं। ब्लूटूथ कम्युनिकेशन का एक माध्यम है और इसी माध्यम का इस्तेमाल हैकर्स भी आपको हैक करने के लिए करते हैं। आज की इस रिपोर्ट में हम आपको ब्लूटूथ के पांच खतरे के बारे में बताएंगे।

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Bluejacking
ब्लूजैकिंग साइबर अटैक का एक तरीका है। इसमें अनजान लोग अनजान लोगों को ब्लूटूथ के जरिए फाइल या मैसेज भेजते हैं और उसके बाद डिवाइस को अपने हैक करते हैं। इस अटैक में आपके फोन में मौजूद जरूरी जानकारी हैकर तक पहुंचती है।

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BlueSnarfing
इस शब्द का इस्तेमाल भी ब्लूटूथ हैकिंग में किया जाता है। इसकी मदद से ब्लूटूथ सपोर्ट वाली डिवाइस से मैसेज, कॉन्टेक्ट, मल्टीमीडिया फाइल और अन्य फाइल हैकर तक पहुंचती है।

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Bluebugging
Bluebugging हैकिंग का एक बहुत ही पुराना और कारगर तरीका है। इसकी मदद से हैकर आपकी डिवाइस पर पूरा कंट्रोल कर सकते हैं। कंट्रोल के बाद वे आपकी डिवाइस का इस्तेमाल कॉलिंग, मैसेजिंग और डाटा एक्सेस के लिए कर सकते हैं।

Denial of Service (DoS)
ब्लूटूथ डिवाइस पर सबसे ज्यादा अटैक इसकी मदद से ही किया जाता है। एक ही समय में थोक में किसी डिवाइस पर कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजे जाते हैं। इससे सिस्टम क्रैश हो जाता है और इसी बीच हैकर्स एक्सेस ले लेते हैं।

Eavesdropping

ब्लूटूथ सिग्नल की एक तय रेंज होती है जो कि करीब 10 मीटर की है, लेकिन हैकर्स एक अन्य डिवाइस की मदद से रेंज को बढ़ाते हैं और यूजर की डिवाइस का डाटा निकालते हैं। 
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