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इंटरनेट पर ‘एआई कचरे’ का अंबार: फर्जी गाने-वीडियो से परेशान टेक कंपनियां, गले की फांस बने AI टूल
Wed, 19 Aug 2026 08:45 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 19 Aug 2026 08:45 AM IST
सार
AI Slop: इंटरनेट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बना कंटेंट अब एक गंभीर समस्या बन गया है। बेतुके गानों और वीडियो के कारण असली और नकली की पहचान मुश्किल हो गई है। यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस एआई कचरे से निपटने के लिए लाखों अकाउंट्स और कंटेंट हटा रही हैं।
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एआई जनरेटेड कंटेंट से बड़ रहा इंटरनेट पर बोझ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज के समय में अगर आप इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बने कंटेंट का अंबार लग जाता है। कभी जिन टेक कंपनियों ने बड़े गर्व के साथ फोटो, वीडियो और म्यूजिक बनाने वाले एआई टूल्स बाजार में उतारे थे, आज वही कंपनियां इस तकनीक के बेतहाशा और गलत इस्तेमाल से परेशान हैं। कोई एआई से अजीबोगरीब गाने बनवा रहा है तो, कोई अपने कुकिंग के शौक को भी बिना मेहनत के एआई के जरिए पूरा कर रहा है। स्थिति इतनी जटिल हो गई है कि आम यूजर्स के लिए यह पहचानना लगभग नामुमकिन हो गया है कि कौन सी जानकारी असली है और किसे एआई से बनाया गया है।
एआई कचरे से चैटबॉट्स और एआई वीडियो जनरेटर टूल बनाने वाली कंपनियां भी परेशान हैं। लोगों के बेतुके रिक्वेस्ट से उनके सरवर्स पर भी दबाव बढ़ रहा है, जिससे आम यूजर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अब क्वालिटी कंटेंट अपनी जगह खोता जा रहा है। लोग एआई जनरेटेड कंटेंट को अपलोड कर सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और कमेंट करने की मांग करते हैं जिससे ऐसे कंटेंट की पहुंच और भी बढ़ जाती है।
टेक कंपनियों के लिए गले की फांस बना अपना ही टूल
म्यूजिक स्ट्रीमिंग एप्स से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक, हर जगह एआई जनरेटेड गानों और वीडियोज की बाढ़ सी आ गई है। लोगों ने शौक और कमाई के लिए इन टूल्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है। बिना किसी कलात्मक मेहनत के तैयार किए गए इन गानों और कुकिंग वीडियोज ने इंटरनेट के सर्वर पर अनावश्यक बोझ बढ़ा दिया है। दिग्गज टेक कंपनियां अब खुद स्वीकार कर रही हैं कि एआई का यह अनियंत्रित उपयोग एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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आंकड़ों में समझें कैसे बढ़ा एआई कचरा
प्लेटफॉर्म्स को एआई कचरे से दूर रखने के लिए कंपनियों को अब बड़े पैमाने पर कंटेंट को हटाना पड़ रहा है। इसके कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
यूजर्स भी कर सकते हैं एआई कंटेंट की रिपोर्ट
असली क्रिएटर्स के लिए भी बढ़ी चिंता
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एआई कचरे से चैटबॉट्स और एआई वीडियो जनरेटर टूल बनाने वाली कंपनियां भी परेशान हैं। लोगों के बेतुके रिक्वेस्ट से उनके सरवर्स पर भी दबाव बढ़ रहा है, जिससे आम यूजर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अब क्वालिटी कंटेंट अपनी जगह खोता जा रहा है। लोग एआई जनरेटेड कंटेंट को अपलोड कर सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और कमेंट करने की मांग करते हैं जिससे ऐसे कंटेंट की पहुंच और भी बढ़ जाती है।
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टेक कंपनियों के लिए गले की फांस बना अपना ही टूल
म्यूजिक स्ट्रीमिंग एप्स से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक, हर जगह एआई जनरेटेड गानों और वीडियोज की बाढ़ सी आ गई है। लोगों ने शौक और कमाई के लिए इन टूल्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है। बिना किसी कलात्मक मेहनत के तैयार किए गए इन गानों और कुकिंग वीडियोज ने इंटरनेट के सर्वर पर अनावश्यक बोझ बढ़ा दिया है। दिग्गज टेक कंपनियां अब खुद स्वीकार कर रही हैं कि एआई का यह अनियंत्रित उपयोग एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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आंकड़ों में समझें कैसे बढ़ा एआई कचरा
प्लेटफॉर्म्स को एआई कचरे से दूर रखने के लिए कंपनियों को अब बड़े पैमाने पर कंटेंट को हटाना पड़ रहा है। इसके कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- स्पॉटिफाई (Spotify): इस लोकप्रिय म्यूजिक प्लेटफॉर्म ने पिछले केवल एक साल के भीतर लगभग 7.5 करोड़ बल्क अपलोड और एआई जनरेटेड गानों को अपने सर्वर से हटाया है।
- यूट्यूब (YouTube): पिछले छह महीनों में यूट्यूब ने करीब 1.30 लाख ऐसे अनावश्यक चैनलों को डिलीट किया है जो एआई कंटेंट से सिर्फ स्पैम फैला रहे थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब पर देखे जाने वाले शॉर्ट वीडियोज में 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ एआई कचरे का है।
यूजर्स भी कर सकते हैं एआई कंटेंट की रिपोर्ट
- इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब यूजर्स को ऐसे कंटेंट हटाने का अधिकार दे रहे हैं। टिकटॉक और पिंटरेस्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स ने यूजर्स को एआई कंटेंट को नियंत्रित करने और उसे रिपोर्ट करने का खास फीचर दिया है।
- अगर कोई कंटेंट एआई से बनाया गया लगता है, तो यूजर एक क्लिक कर उसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा, सबस्टैक ने एक खास डिटेक्शन टूल पेश किया है जो नकली और मशीन जनरेटेड सामग्री की पहचान करता है। फिलहाल, टेक कंपनियों का मुख्य फोकस उस लो-क्वालिटी 'यूज एंड थ्रो' कंटेंट को हटाना है, जिसका कोई वास्तविक महत्व नहीं है।
असली क्रिएटर्स के लिए भी बढ़ी चिंता
- एआई कचरे का बढ़ना अब केवल कंटेंट की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म के पूरे सिस्टम को प्रभावित करने वाली चुनौती बन रही है। कंपनियां कम गुणवत्ता वाले कंटेंट को हटाने के साथ उसकी रीच सीमित करने जैसे कदम भी उठा रही हैं।
- ऐसे में चिंता इस बात की है कि एआई से तैयार अनावश्यक सामग्री पर लगाम लगाने की कोशिश में कहीं वास्तविक और उपयोगी कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स प्रभावित न हो जाएं। कंपनियां एआई स्पैम को रोकने के लिए ऐसे कंटेंट की पहुंच को भी सीमित कर रही हैं, जिससे डिजिटल दुनिया का पूरा इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है। आने वाले समय में प्लेटफॉर्म के लिए एआई कंटेंट की पहचान और असली क्रिएटर्स के बीच सही संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।