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AI Fatigue: एआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है आपके दिमाग को 'फ्राई', रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Mon, 09 Mar 2026 09:29 PM IST
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सार

AI Mental Fatigue: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को काम आसान बनाने वाली तकनीक माना जाता है, लेकिन एक नई स्टडी में इसका उल्टा असर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई AI टूल्स का लगातार इस्तेमाल कर्मचारियों में मानसिक थकान, गलतियां और निर्णय लेने में परेशानी बढ़ा सकता है।

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एआई से बढ़ रहा ब्रेन फटीग - फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह इंसानों का काम आसान करेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा। लेकिन हाल ही में सामने आई एक स्टडी में इससे बिल्कुल उलट तथ्य पेश किए हैं। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा एआई का इस्तेमाल करने से कर्मचारियों में नई तरह की मानसिक थकान पैदा हो रही है।
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काम के दौरान हो रहा "ब्रेन फ्राई"
शोधकर्ताओं ने करीब 1500 कर्मचारियों पर सर्वे किया। इसमें पाया गया कि जो कर्मचारी एक साथ कई एआई टूल्स के बीच लगातार काम करते रहते हैं, उनमें डिसीजन फटीग (निर्णय लेने में थकान) और काम में गलतियां ज्यादा देखने को मिलीं। सर्वे में लगभग हर सात में से एक कर्मचारी ने माना कि एआई टूल्स को संभालते-संभालते उन्हें मानसिक थकान महसूस होती है। स्टडी में इस स्थिति को "ब्रेन फ्राई" कहा गया है, यानी जब दिमाग पूरी तरह थक जाता है।
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स्टडी की सह-लेखक और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर जूली बेडार्ड के अनुसार यह नतीजे एक तरह का शुरुआती चेतावनी संकेत हैं। उनका कहना है कि एआई से मिलने वाली उत्पादकता को लेकर उम्मीदों को संतुलित तरीके से समझने की जरूरत है।

कर्मचारियों को कैसे थका रहा एआई?
स्टडी के मुताबिक, एआई टूल्स के साथ रोज काम करने वाले पेशेवर इस अनुभव को महसूस कर रहे हैं। एआई के साथ काम करते समय कई विंडो और टूल्स एक साथ खुले रहते हैं। कोई काम कुछ सेकंड में पूरा होता है, तो कुछ में मिनट लग जाते हैं। इस लगातार बदलती गति के कारण दिमाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

एआई की क्षमताएं इतनी ज्यादा हैं कि कई बार यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि काम कहां रोकना चाहिए। इसलिए वह खुद और अपने एआई वर्कफ्लो के लिए समयसीमा तय करते हैं, ताकि काम संतुलित रह सके।

एआई मददगार भी बन सकता है
स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन कर्मचारियों को एआई के सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग और स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले, उनमें ब्रेन फ्राई की समस्या कम थी। विशेषज्ञों के मुताबिक समाधान एआई को छोड़ना नहीं है, बल्कि इंसानों और एआई के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। क्योंकि एआई की क्षमता भले ही असीम हो, लेकिन इंसानी दिमाग की अपनी सीमाएं हैं।

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