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AI Teacher: अमेरिका के इस स्कूल में शुरू हुई रोबोटिक पढ़ाई, क्या खतरे में है शिक्षकों की नौकरी?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 30 Mar 2026 07:20 AM IST
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सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्कूलों में भी इसकी एंट्री हो गई है। अमेरिका के अल्फा स्कूल ने एआई पावर्ड टीचर्स पेश किए हैं, जो बच्चों को पढ़ाएंगे। इससे शिक्षा का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है, लेकिन साथ ही शिक्षकों की नौकरियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
एआई
- फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हर सेक्टर में तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है। जिस तरह एआई का विकास हो रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य में ऐसा कोई भी सेक्टर नहीं होगा जो एआई से अछूता रहेगा। अब एक और सेक्टर में एआई ने एंट्री ले ली है। इस सेक्टर को अब तक एआई से सेफ बताया जा रहा था, लेकिन हाल ही में सामने आई एक खबर ने लोगों को सच्चाई से रूबरू करा दिया है।
हाल ही में अमेरिका के 'अल्फा स्कूल' (Alpha School) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पूरी तरह से एआई पावर्ड स्कूल की शुरुआत की है। यह स्कूल पूरी तरह से एआई मॉडल्स पर चलता है। यहां स्टूडेंट्स के कोर्स डिजाइन से लेकर उनके डेली होमवर्क तक एआई के जरिए मैनेज किया जाता है। यहां बच्चों के कोर्स डिजाइन से लेकर उनके दैनिक होमवर्क तक की जिम्मेदारी एआई मॉडल के कंधों पर है।
कैसे काम करता है ये स्कूल?
स्कूल का कहना है कि एआई मॉडल बच्चों को हर दिन करीब दो घंटे मुख्य शैक्षणिक विषय पढ़ाएगा। इसके बाद बाकी समय में यह बच्चों को वर्कशॉप, अलग-अलग प्रोजेक्ट्स और जीवन से जुड़ी जरूरी स्किल्स सिखाने में मदद करेगा। स्कूल की खास बात यह है कि यहां कोर्स डिजाइन से लेकर होमवर्क तक कई काम AI के जरिए मैनेज किए जाते हैं। यानी पढ़ाई का पूरा ढांचा तकनीक पर आधारित रखा गया है।
रोज दो घंटे पढ़ाई, बाकी समय वर्कशॉप
स्कूल का कहना है कि AI मॉडल बच्चों को हर दिन करीब दो घंटे मुख्य शैक्षणिक विषय पढ़ाएगा। इसके बाद बाकी समय में यह बच्चों को वर्कशॉप, अलग-अलग प्रोजेक्ट्स और जीवन से जुड़ी जरूरी स्किल्स सिखाने में मदद करेगा।
स्कूल की खास बात यह है कि यहां कोर्स डिजाइन से लेकर होमवर्क तक कई काम AI के जरिए मैनेज किए जाते हैं। यानी पढ़ाई का पूरा ढांचा तकनीक पर आधारित रखा गया है।
किताबों की जगह डिजिटल टूल्स
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में स्कूल पारंपरिक किताबों और सॉफ्टवेयर आधारित लर्निंग टूल्स का भी इस्तेमाल करेगा। बच्चों की पढ़ाई को और बेहतर बनाने के लिए खान अकादमी, मेम्बीन, मेंटावा और मोबीमैक्स जैसे एजुकेशनल एप्स का सहारा लिया जाएगा।
क्या खतरे में है शिक्षकों की नौकरी?
AI टीचर की एंट्री के बाद एक बार फिर शिक्षा क्षेत्र में नौकरियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों को लगता है कि आने वाले समय में टीचिंग जॉब्स पर असर पड़ सकता है, जबकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके काम करने के तरीके को बदल देगा। उनके मुताबिक, शिक्षक अब एआई टूल्स की मदद से बच्चों को और बेहतर तरीके से गाइड कर सकेंगे, खासकर वर्कशॉप और प्रोजेक्ट्स जैसे कामों में।
यह बदलाव बताता है कि शिक्षा का भविष्य अब तकनीक और इंसानी समझ के मेल से आगे बढ़ सकता है। AI टीचर जहां एक तरफ पढ़ाई को आसान बना सकते हैं, वहीं शिक्षक का रोल भी पहले से ज्यादा मार्गदर्शक और सहयोगी हो सकता है।
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हाल ही में अमेरिका के 'अल्फा स्कूल' (Alpha School) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पूरी तरह से एआई पावर्ड स्कूल की शुरुआत की है। यह स्कूल पूरी तरह से एआई मॉडल्स पर चलता है। यहां स्टूडेंट्स के कोर्स डिजाइन से लेकर उनके डेली होमवर्क तक एआई के जरिए मैनेज किया जाता है। यहां बच्चों के कोर्स डिजाइन से लेकर उनके दैनिक होमवर्क तक की जिम्मेदारी एआई मॉडल के कंधों पर है।
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कैसे काम करता है ये स्कूल?
स्कूल का कहना है कि एआई मॉडल बच्चों को हर दिन करीब दो घंटे मुख्य शैक्षणिक विषय पढ़ाएगा। इसके बाद बाकी समय में यह बच्चों को वर्कशॉप, अलग-अलग प्रोजेक्ट्स और जीवन से जुड़ी जरूरी स्किल्स सिखाने में मदद करेगा। स्कूल की खास बात यह है कि यहां कोर्स डिजाइन से लेकर होमवर्क तक कई काम AI के जरिए मैनेज किए जाते हैं। यानी पढ़ाई का पूरा ढांचा तकनीक पर आधारित रखा गया है।
रोज दो घंटे पढ़ाई, बाकी समय वर्कशॉप
स्कूल का कहना है कि AI मॉडल बच्चों को हर दिन करीब दो घंटे मुख्य शैक्षणिक विषय पढ़ाएगा। इसके बाद बाकी समय में यह बच्चों को वर्कशॉप, अलग-अलग प्रोजेक्ट्स और जीवन से जुड़ी जरूरी स्किल्स सिखाने में मदद करेगा।
स्कूल की खास बात यह है कि यहां कोर्स डिजाइन से लेकर होमवर्क तक कई काम AI के जरिए मैनेज किए जाते हैं। यानी पढ़ाई का पूरा ढांचा तकनीक पर आधारित रखा गया है।
किताबों की जगह डिजिटल टूल्स
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में स्कूल पारंपरिक किताबों और सॉफ्टवेयर आधारित लर्निंग टूल्स का भी इस्तेमाल करेगा। बच्चों की पढ़ाई को और बेहतर बनाने के लिए खान अकादमी, मेम्बीन, मेंटावा और मोबीमैक्स जैसे एजुकेशनल एप्स का सहारा लिया जाएगा।
क्या खतरे में है शिक्षकों की नौकरी?
AI टीचर की एंट्री के बाद एक बार फिर शिक्षा क्षेत्र में नौकरियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों को लगता है कि आने वाले समय में टीचिंग जॉब्स पर असर पड़ सकता है, जबकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके काम करने के तरीके को बदल देगा। उनके मुताबिक, शिक्षक अब एआई टूल्स की मदद से बच्चों को और बेहतर तरीके से गाइड कर सकेंगे, खासकर वर्कशॉप और प्रोजेक्ट्स जैसे कामों में।
यह बदलाव बताता है कि शिक्षा का भविष्य अब तकनीक और इंसानी समझ के मेल से आगे बढ़ सकता है। AI टीचर जहां एक तरफ पढ़ाई को आसान बना सकते हैं, वहीं शिक्षक का रोल भी पहले से ज्यादा मार्गदर्शक और सहयोगी हो सकता है।