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AI ने निकाला कंपनियों का दिवाला: KPMG की रिपोर्ट का खुलासा- 75% फर्मों को अपने AI बिल का नहीं है सही अंदाजा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Mon, 08 Jun 2026 12:40 PM IST
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सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब हर कंपनी की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके भारी-भरकम बिल ने सबकी नींद उड़ा दी है। KPMG की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब 74 फीसदी कंपनियों को पता ही नहीं है कि उनके AI का खर्च कैसे कैलकुलेट हो रहा है।

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एआई ने बिगाड़ा कंपनियों का बजट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। आज दुनिया भर की कंपनियां अपने रोज के कामकाज निपटाने के लिए क्लॉड कोड (Claude Code), ओपनएआई कोडेक्स (OpenAI’s Codex) जैसे कई बेहतरीन टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। लेकिन, बीते कुछ हफ्तों से इन कंपनियों को एक गंभीर सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है और वह है इसकी बेतहाशा बढ़ती कीमत। दरअसल, टेक कंपनियों को एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ती है और यह अब उनकी जेब तेजी से खाली कर रह है।


एक तरफ जहां वॉलमार्ट (Walmart) और उबर (Uber) जैसी बड़ी कंपनियां लागत बढ़ने के डर से एआई के इस्तेमाल पर लिमिट लगा रही हैं, वहीं एक नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की ज्यादातर कंपनियों को असल में यह समझ ही नहीं आ रहा है कि एआई कंपनियां उनसे पैसे कैसे वसूल रही हैं। हाल ही में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि एआई के खर्चे को कंट्रोल करने के लिए अब कंपनियां एआई के इस्तेमाल में कटौती कर रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि एआई मार्केट अब मैच्योर हो रहा है।
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सिर्फ 26% कंपनियों को ही पता है असली AI खर्च

  • KPMG के सर्वे में सामने आया कि केवल 26 प्रतिशत कंपनियों के पास अपने AI खर्च की पूरी और स्पष्ट जानकारी है। वहीं, लगभग 50 प्रतिशत कंपनियों को खर्च का कुछ अंदाजा है, लेकिन पूरी तस्वीर नहीं दिखती।

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  • सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 22 प्रतिशत कंपनियों ने स्वीकार किया कि उन्हें लगभग कोई जानकारी नहीं होती और वे केवल बिल आने के बाद ही वास्तविक खर्च देख पाती हैं।

  • दूसरे शब्दों में कहें तो हर चार में से केवल एक कंपनी ही अपने AI बिल को पूरी तरह समझती है।

KPMG के ग्लोबल हेड ऑफ AI स्टीव चेस के अनुसार, AI एक ऐसा नया संसाधन बन चुका है जिसकी खपत और लागत दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। कई कंपनियां इसकी रफ्तार का सही अनुमान नहीं लगा पा रही हैं।

AI का बिल आखिर इतना ज्यादा क्यों?

  • आज ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां टोकन आधारित प्राइसिंग मॉडल पर काम कर रही हैं। टोकन एआई दुनिया की एक तरह की माप इकाई है। जितना अधिक कोई व्यक्ति या कंपनी AI से काम करवाती है, उतने अधिक टोकन खर्च होते हैं।
  • कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए लाइसेंस खरीदती हैं, जिनमें सीमित टोकन शामिल होते हैं। यह सीमा पार होते ही अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
  • KPMG के मुताबिक, कुछ कंपनियां अपने पूरे साल का AI और क्लाउड बजट महज कुछ महीनों में ही खर्च कर चुकी हैं। कई कंपनियों में टोकन उपयोग छह गुना तक बढ़ गया।

उबर और अमेजन जैसे दिग्गजों का भी बिगड़ा गणित

  • रिपोर्ट के अनुसार, Uber ने अपने साल भर का एआई बजट केवल 4 महीने में ही खर्च कर दिया। इसके बाद उबर ने अपने हर कर्मचारी के लिए एआई इस्तेमाल की सीमा 1,500 डॉलर (करीब 1,42,000 रुपये) तय कर दी है।।
  • वहीं, एक कंपनी ने कथित तौर पर केवल एक महीने में क्लॉड एआई (Claude AI) पर करीब 50 करोड़ डॉलर खर्च कर दिए।
  • OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी हाल ही में स्वीकार किया कि AI लागत अब बड़ी चिंता बन चुकी है। 
  • उन्होंने कहा कि कई कंपनियां मजाक में यह कह रही हैं कि उनका पूरा 2026 का बजट पहली तिमाही में ही खत्म हो गया।

AI में निवेश जारी, लेकिन रिटर्न पर सवाल
  • बढ़ती लागत के बावजूद टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं। गूगल ने हाल ही में 80 अरब डॉलर जुटाने की घोषणा की है, जिसका बड़ा हिस्सा एआई परियोजनाओं पर खर्च होगा।
  • दूसरी ओर एंथ्रोपिक ने IPO की तैयारी शुरू कर दी है और उसकी वैल्यूएशन एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ओपनएआई के भी भविष्य में पब्लिक होने की उम्मीद है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों को एआई के लाभ और उसकी लागत के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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