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Elon Musk: क्या अब अंतरिक्ष में डाटा सेंटर बनाएंगे मस्क? क्या है कंपनियों के मर्जर की योजना का सच?

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Fri, 30 Jan 2026 09:29 AM IST
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सार

Space-Based AI Data Centers: एलन मस्क अपनी कंपनियों स्पेसएक्स और एक्सएआई (xAI) को जोड़कर एआई की दुनिया में एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य अंतरिक्ष में सैटेलाइट-आधारित डाटा सेंटर स्थापित करना है, जहां सौर ऊर्जा से चलने वाले सैटेलाइट्स भारी एआई सिस्टम को कम लागत और ज्यादा दक्षता के साथ चला सकें।

Elon Musk’s Next Big Bet: Space-Based AI Data Centers to Outrun Google and Meta
Space-Based AI Data Centers - फोटो : X
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विस्तार
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एलन मस्क अपनी दो कंपनियों, स्पेसएक्स और एक्सएआई को जोड़ने (मर्जर) की योजना बना रहे हैं, ताकि वे अंतरिक्ष में 'सैटेलाइट डाटा सेंटर' स्थापित कर सकें। इस बड़े कदम के जरिए उनका मकसद गूगल और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों को एआई (AI) की रेस में पीछे छोड़ना है। कुल मिलाकर, मस्क अब एआई तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए इसे जमीन से ऊपर अंतरिक्ष में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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स्पेस-बेस्ड एआई डाटा सेंटर क्या हैं?

अंतरिक्ष आधारित डाटा सेंटर फिलहाल एक नई सोच है, जिसके तहत अंतरिक्ष में सैंकड़ों ऐसे सैटेलाइट्स भेजे जाएंगे जो सौर-ऊर्जा से चलेंगे। ये सैटेलाइट्स मिलकर एक नेटवर्क बनाएंगे, जो ग्रोक और चैटजीपीटी जैसे भारी-भरकम एआई सिस्टम को चलाने के लिए जरूरी पावर देंगे।

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धरती पर डाटा सेंटर्स को चलाने में बहुत बिजली खर्च होती है और मशीनों को ठंडा रखने के लिए भी काफी पैसा लगता है। इसके उलट, अंतरिक्ष में 24 घंटे मुफ्त धूप मिलती है और वहां का वातावरण मशीनों की गर्मी को प्राकृतिक रूप से सोख लेता है, जिससे कूलिंग का खर्चा बच जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में डाटा प्रोसेस करना न केवल सस्ता होगा, बल्कि एआई को और भी ज्यादा तेज और कुशल बना देगा।

चुनौतियां और समय-सीमा

हालांकि, अंतरिक्ष विशेषज्ञों और इंजीनियरों का मानना है कि इस योजना को हकीकत बनने में अभी कई साल लगेंगे। इसके सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं, जैसे अंतरिक्ष में तैरते कचरे से टकराने का डर, खतरनाक रेडिएशन से मशीनों को बचाना और मशीनों के खराब होने पर अंतरिक्ष में जाकर उनकी मरम्मत करना, जो कि बेहद मुश्किल काम है। इसके अलावा, इन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने का खर्चा भी बहुत ज्यादा है।


डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) का अनुमान है कि 2027-28 तक सिर्फ टेस्टिंग के लिए छोटे डाटा सेंटर भेजे जाएंगे। अगर वे सफल रहे, तो ही 2030 के बाद इन्हें बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकेगा।

मस्क ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

स्पेसएक्स दुनिया की सबसे सफल रॉकेट कंपनी है, जिसने स्टारलिंक के जरिए पहले ही हजारों सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजकर अपनी ताकत साबित कर दी है। यही वजह है कि अगर भविष्य में एआई (AI) को अंतरिक्ष से चलाया जाना है, तो इसके लिए मस्क की कंपनी सबसे मजबूत स्थिति में है।

खुद एलन मस्क का भी मानना है कि अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी से चलने वाले डाटा सेंटर बनाना एक बहुत ही समझदारी भरा कदम है। उनका दावा है कि आने वाले दो-तीन वर्षों में एआई को चलाने के लिए अंतरिक्ष ही सबसे सस्ती जगह साबित होगी। इस बड़े सपने को पूरा करने के लिए पैसों की भी कमी नहीं होगी, क्योंकि रॉयटर्स के मुताबिक स्पेसएक्स इस साल अपना आईपीओ (IPO) ला सकती है। इससे कंपनी की वैल्यू 1 ट्रिलियन डॉलर (1 लाख करोड़) से भी ऊपर जा सकती है और इसी फंड का इस्तेमाल इन आधुनिक डाटा सैटेलाइट्स को बनाने में किया जाएगा।

प्रतियोगी क्या कर रहे हैं?

सिर्फ एलन मस्क ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां और देश भी इस रेस में शामिल हैं। अमेज़न के मालिक जेफ बेजोस की कंपनी 'ब्लू ओरिजिन' का मानना है कि आने वाले 10 से 20 वर्षों में अंतरिक्ष के डाटा सेंटर धरती के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ते होंगे। वहीं, एनवीडिया के समर्थन वाली कंपनी 'स्टारक्लाउड' ने तो अपना पहला सैटेलाइट भी लॉन्च कर दिया है, जिसमें दुनिया की सबसे ताकतवर एआई चिप लगी है।

गूगल भी पीछे नहीं है; वह अपने 'प्रोजेक्ट सनकैचर' के जरिए सूरज की रोशनी से चलने वाले सैटेलाइट्स पर रिसर्च कर रहा है और 2027 तक अपना पहला मॉडल लॉन्च कर सकता है। उधर चीन ने भी अगले पांच वर्षों में अंतरिक्ष में अपना खुद का 'स्पेस क्लाउड' बनाने का एलान कर दिया है। साफ है कि भविष्य में अंतरिक्ष सिर्फ सैटेलाइट्स के लिए नहीं, बल्कि एआई (AI) के बड़े डिजिटल हब के रूप में इस्तेमाल होने वाला है।

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