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चांद पर फैक्ट्री लगाएंगे एलन मस्क: सूर्य की ऊर्जा से चलेंगे डेटा सेंटर, xAI को अंतरिक्ष में ले जाने की तैयारी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 13 Feb 2026 10:51 AM IST
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सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ अब धरती तक सीमित नहीं रहेगी। एलन मस्क ने खुलासा किया है कि उनकी कंपनी xAI भविष्य में चांद पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बना सकती है। मकसद है ऐसी तकनीक तैयार करना जो AI को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सके।
एलन मस्क
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस तेज होती जा रही है, लेकिन अब यह मुकाबला सिर्फ डेटा सेंटर और चिप्स तक सीमित नहीं रहेगा। टेस्ला और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क ने एआई के भविष्य को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। अपनी AI कंपनी xAI के कर्मचारियों के साथ एक मीटिंग में मस्क ने खुलासा किया कि भविष्य में AI मॉडल्स इतने शक्तिशाली हो जाएंगे कि धरती के डेटा सेंटर्स उनके लिए छोटे पड़ जाएंगे।
चांद पर फैक्ट्री बनाएंगे मस्क
इस मीटिंग में मस्क ने सुझाव दिया कि अगली पीढ़ी के AI सिस्टम को सपोर्ट करने के लिए चंद्रमा की सतह पर एक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा बनाई जाए। मस्क का मानना है कि जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली बनते जाएंगे, उन्हें चलाने के लिए इतनी ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होगी, जिसे धरती पर मौजूद डेटा सेंटर लंबे समय तक टिकाऊ तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आपको चांद पर जाना ही होगा,” और इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष में बनाई गई इंफ्रास्ट्रक्चर एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में निर्णायक बढ़त दिला सकती है।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
मस्क चांद पर सिर्फ डेटा सेंटर ही नहीं बल्कि पूरी फैक्ट्री ही बनाना चाहते हैं। मस्क की सोच के मुताबिक, चांद पर ऐसी फैक्ट्री लगाई जाएगी जो खास तौर पर एआई के लिए डिजाइन किए गए सैटेलाइट्स बनाएगी। इन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए 'मास ड्राइवर' तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो बिना रॉकेट ईंधन के पेलोड को ऑर्बिट में पहुंचा सकती है।
अंतरिक्ष में संसाधनों और जगह की कमी नहीं है, जिससे एआई की प्रोसेसिंग पावर को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा।
सूरज की ऊर्जा का इस्तेमाल
मस्क ने कहा अगर हम आज की मानव सभ्यता की ऊर्जा खपत को देखें, तो हम पृथ्वी की संभावित ऊर्जा का केवल 1% हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हम सूरज की कुल ऊर्जा का 10 लाखवां हिस्सा भी हासिल कर लें, तो वह आज की सभ्यता द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा से करीब 10 लाख गुना ज्यादा होगी।
सूरज हमारे सौर मंडल के कुल द्रव्यमान का 99.8% है। अगर हमें सूरज की ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना है, तो हमें पृथ्वी की सीमा से बाहर निकलना ही होगा।
बढ़ती AI रेस और स्केल की चुनौती
मस्क लंबे समय से कहते आए हैं कि तकनीकी क्रांति का आधार “स्केल” होता है। AI सिस्टम जितने जटिल होते जा रहे हैं, उतनी ही ज्यादा हार्डवेयर और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है।
दुनियाभर की टेक कंपनियां उन्नत चिप्स हासिल करने, विशाल डेटा सेंटर खड़े करने और बेहतरीन इंजीनियरों को नियुक्त करने में जुटी हैं। मस्क का संकेत है कि केवल पृथ्वी पर बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाना भविष्य में पर्याप्त नहीं होगा।
बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि बेहद विशाल स्तर की बुद्धिमत्ता कैसी सोच रखेगी, इसकी कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन इसे साकार होते देखना बेहद रोमांचक होगा।
SpaceX और xAI का हुआ विलय
इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए मस्क ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कन्फर्म किया है कि xAI अब SpaceX का हिस्सा बनेगी। इस विलय का मकसद AI रिसर्च और स्पेस इंजीनियरिंग को एक साथ लाना है। मस्क को भरोसा है कि जब रॉकेट साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हाथ मिलाएंगे, तो कुछ ऐसा बनेगा जिसकी कल्पना आज मुश्किल है।
मस्क ने उत्साह जताते हुए कहा कि इतनी विशाल स्तर की इंटेलिजेंस क्या सोच सकती है, इसका अंदाजा लगाना भी रोमांचक है। हालांकि, अभी इस प्रोजेक्ट के बजट और समय सीमा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन मस्क के इस कदम ने पूरी टेक दुनिया में खलबली मचा दी है।
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चांद पर फैक्ट्री बनाएंगे मस्क
इस मीटिंग में मस्क ने सुझाव दिया कि अगली पीढ़ी के AI सिस्टम को सपोर्ट करने के लिए चंद्रमा की सतह पर एक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा बनाई जाए। मस्क का मानना है कि जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली बनते जाएंगे, उन्हें चलाने के लिए इतनी ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होगी, जिसे धरती पर मौजूद डेटा सेंटर लंबे समय तक टिकाऊ तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे।
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उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आपको चांद पर जाना ही होगा,” और इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष में बनाई गई इंफ्रास्ट्रक्चर एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में निर्णायक बढ़त दिला सकती है।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
मस्क चांद पर सिर्फ डेटा सेंटर ही नहीं बल्कि पूरी फैक्ट्री ही बनाना चाहते हैं। मस्क की सोच के मुताबिक, चांद पर ऐसी फैक्ट्री लगाई जाएगी जो खास तौर पर एआई के लिए डिजाइन किए गए सैटेलाइट्स बनाएगी। इन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए 'मास ड्राइवर' तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो बिना रॉकेट ईंधन के पेलोड को ऑर्बिट में पहुंचा सकती है।
अंतरिक्ष में संसाधनों और जगह की कमी नहीं है, जिससे एआई की प्रोसेसिंग पावर को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा।
सूरज की ऊर्जा का इस्तेमाल
मस्क ने कहा अगर हम आज की मानव सभ्यता की ऊर्जा खपत को देखें, तो हम पृथ्वी की संभावित ऊर्जा का केवल 1% हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हम सूरज की कुल ऊर्जा का 10 लाखवां हिस्सा भी हासिल कर लें, तो वह आज की सभ्यता द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा से करीब 10 लाख गुना ज्यादा होगी।
सूरज हमारे सौर मंडल के कुल द्रव्यमान का 99.8% है। अगर हमें सूरज की ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना है, तो हमें पृथ्वी की सीमा से बाहर निकलना ही होगा।
बढ़ती AI रेस और स्केल की चुनौती
मस्क लंबे समय से कहते आए हैं कि तकनीकी क्रांति का आधार “स्केल” होता है। AI सिस्टम जितने जटिल होते जा रहे हैं, उतनी ही ज्यादा हार्डवेयर और ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है।
दुनियाभर की टेक कंपनियां उन्नत चिप्स हासिल करने, विशाल डेटा सेंटर खड़े करने और बेहतरीन इंजीनियरों को नियुक्त करने में जुटी हैं। मस्क का संकेत है कि केवल पृथ्वी पर बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाना भविष्य में पर्याप्त नहीं होगा।
बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि बेहद विशाल स्तर की बुद्धिमत्ता कैसी सोच रखेगी, इसकी कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन इसे साकार होते देखना बेहद रोमांचक होगा।
SpaceX और xAI का हुआ विलय
इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए मस्क ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कन्फर्म किया है कि xAI अब SpaceX का हिस्सा बनेगी। इस विलय का मकसद AI रिसर्च और स्पेस इंजीनियरिंग को एक साथ लाना है। मस्क को भरोसा है कि जब रॉकेट साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हाथ मिलाएंगे, तो कुछ ऐसा बनेगा जिसकी कल्पना आज मुश्किल है।
मस्क ने उत्साह जताते हुए कहा कि इतनी विशाल स्तर की इंटेलिजेंस क्या सोच सकती है, इसका अंदाजा लगाना भी रोमांचक है। हालांकि, अभी इस प्रोजेक्ट के बजट और समय सीमा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन मस्क के इस कदम ने पूरी टेक दुनिया में खलबली मचा दी है।